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1256 results found

  • 3 March 2019 Shivratri Special Poem

    Hindi Poem from today's murli. Aaj ki gyan murli se ek Kavita 3 March 2019 (Maha Shivratri). This poem is daily written on day's murli by Brahma Kumar (BK) Mukesh (from Rajasthan). To read more Hindi poems written, visit Murli Poems page. Today's special -> Shivratri Sandesh (Hindi) and hivratri message (English) * दिव्यता अपनाओ भारत को स्वर्ग बनाओ * जाने किस नींद में सोया रह गया आत्मा राजा लूट लिया रावण ने उसे खोले बिना दरवाजा किस चोर दरवाजे से रावण अन्दर घुस आया बिना खबर के हमारा सब कुछ उसने चुराया दिव्यता के सुन्दर महल को खण्डहर बनाया दीवारों दरवाजों पर विकारों का छिद्र बनाया जन्म हो गया पापों का जहर बन चुका पानी भ्रष्ट हुई जनता सारी भ्रष्ट हो चुके राजा रानी राज कुंवर जैसा सुन्दर मन पूरा बेलगाम हुआ पवित्रता को हारा खेलकर देहभान का जुआ घर घर में बहते प्यार के झरने सारे सूख गये बंजर हुई धरती बरसने वाले बादल रूठ गये धन के हुए गुलाम गिरी नैतिकता दलदल में विश्वास करने लगे सारे केवल धन के बल में पतन की और बढ़ते सब रुक ना कोई पाता नरक हो गया जीवन समझ नहीं क्यों आता पहचानों हे इंसानों तुम अपनी सत्य पहचान समझाने आया तुम्हें शिव परमात्मा भगवान सुना रहा हम सबको वो सत्य गीता का ज्ञान अपनाकर ये ज्ञान तुम बन जाओ देव समान छोड़ो विकारी जीवन दिव्यता को अपनाओ देवभूमि इस भारत को फिर से स्वर्ग बनाओ * ॐ शांति * ---- Useful links ---- NEWS - New uploads (pdf, videos) Online Services (all listed) Resources - Divine collection BK Google - A divine search engine for BKs Brahma Kumaris Website links Videos Gallery - YouTube playlist Follow our Main Blog . #Murli #Hindi #brahmakumaris #brahmakumari

  • GOD OF GODS (गॉड ऑफ़ गोड्स) the Movie

    गॉड ऑफ़ गोड्स (GOD OF GODS) released on 3 March 2019. Full Movie in Hindi, trailers, behind the scenes and information. Official post by 'Brahma Kumaris'. आप सभी को यह बताते हुए अति हर्ष हो रहा है कि बाबा की पहली थिएटर फिल्म “GOD OF GODS” 3 मार्च 2019,महाशिवरात्रि के पावन दिवस पर भारत के सभी PVR थिएटर में रिलीज़ की जायेगी। गॉड ऑफ गॉड्स एक आध्यात्मिक फिल्म है जो प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के 'फिल्म्स और मीडिया' विभाग द्वारा बनाई गई है। बीके वेंकटेश द्वारा लिखित और फिल्माया गया। यह ईश्वरीय तोफा इस वर्ष के सबसे महत्वपपूर्ण दिवस शिवरात्रि पर आप सभी की रूहानी सेवा में प्रस्तुत है। You may like to read the article GOD OF GODS - English. ----------------- ✦ गॉड ऑफ़ गोड्स - Full Movie in Hindi ✦ Download Full movie in HD (use a PC to download) * Official Movie poster * ✿ गॉड ऑफ़ गोड्स के बारे में जानकारी (About the Movie) ✿ यह फिल्म स्वयं (आत्मा), भगवान /ईश्वर /अल्लाह (परमपिता परमआत्मा) और 5000 साल और 4 युगो में विभेदित यह विश्व नाटक चक्र का परिचय व सच्ची समझ देती है। यह फिल्म सभी मानव मात्र को अपने ही जीवन कहानी का दर्शन कराती और अपने रूहानी पिता (परमात्मा) के अवतरण का सन्देश देती है। इसके साथ ही वर्तमान अनमोल संगमयुगी समय का परिचय देता है। यह फिल्म जरूर जरूर देखे। यह फिल्म 90 मिनट की है और 5 भाषाओं -> हिंदी, English, தமிழ் (Tamil), తెలుగు (Telugu) और മലയാളം (Malayalam) में बनी है. ----------------------------- ✶ कहा देख सकते है ? अगर आप इस फिल्म को अपने एरिया के PVR थिएटर में दिखाना चाहते है तो आप 20 febuary 2019 से पहले हमें सूचित करें, ताकि हम आप के एरिया के PVR थिएटर को एडवांस में बुक करवा सकें l NOTE: एक शो को PVR थिएटर में दिखने के लिए कम से कम 200 लोग होने चाहिए. * नोट (NOTE) * डिजिटल पब्लिसिटी मटेरियल (पोस्टर, PVR थिएटर List) आप निचे दिए हुए Link से देख सकते है व डाउनलोड कर सकते हैं। Drive Link – https://drive.google.com/drive/folders/1-6DksM78p-mkKbqHmPx28yqydeWpcO-L अधिक जानकारी के लिए email करें godofgodsmovie@gmail.com मोबाइल – 9769012581, 9414082388 (BK Venkatesh Bhai - director) GOG special WhatsApp numbers – 9769012581, 9549991111 ▶ दर्शको द्वारा इस फिल्म का रिव्यु ➞ GOD OF GODS फिल्म का Censor Board Certified Trailers सभी 5 भाषाओं का देख सकते हैं और सभी को link share करें. ▶ हिन्दी भाषा में गॉड ऑफ़ गोड्स का ट्रेलर (Trailer in Hindi) ▶ God of Gods the movie trailer in English ▶ Movie Making - Behind the scenes ~~~ Movie Team ~~~ ( बी.के अर्थात --> ब्रह्माकुमार -Brahma Kumar ) निर्माता ➞ बी.के जगमोहन और बी.के आईएमएस रेड्डी कार्यकारी निर्माता ➞ बी.के करुणा (माउंट अबू) लेखक / निर्देशक ➞ बी.के वेंकटेश वीएफएक्स पर्यवेक्षक ➞ बी.के अजीत छायाकार ➞ बी.के करण प्रोडक्शन कंट्रोलर ➞ बी.के परसुमन डिजिटल पेंटर ➞ बी.के सुभाष ✣✣✣ Useful links ✣✣✣ BK Videos Gallery Single Videos - Video Library Online Services About Brahma Kumaris (Hindi introduction) 7 days course in Hindi Resources - Complete Collection BK Google - Search engine On God-fatherly World Service शिव बाबा सर्विस टीम, मधुबन . #brahmakumari #Hindi #brahmakumaris

  • ईश्वरीय निमंत्रण पत्र (Godly Invitation)

    ईश्वरीय निमंत्रण पत्र (Godly invitation and letter in Hindi). Come and know your eternal Father (god) and take your inheritance of Peace, purity, love and power from him through knowledge of Raja Yog (meditation to God, the Supreme Soul.) जागो ! जागो ! हे विश्व की आत्माओं.. देवों के देव, सर्व आत्माओं के परमपिता, गीता का सच्चा भगवान जिन्हें शिव, अल्लाह, खुदा, जेवोहा, ओंकार, वाहेगुरु इत्यादि अनेक नामों से पुकारते हैं भारत की पावन भूमि पर अवतरित हो चुके हैं . १) नयी सतयुगी स्वर्णिम दुनिया अथवा स्वर्ग की स्थापना करने जिससे विश्व की सभी मनुष्य आत्माएं इस पुरानी भ्रष्टाचारी, पतित, कलियुगी दुनिया के दुःख, पीड़ा, कष्टों से मुक्त हो सकें । २) सभी मनुष्यात्माओं को उनका आत्मिक परिचय देने लिए जो वास्तव में एक परमात्मा की संतान हैं ३) सभी एक्टर्स रूपी आत्माओं को इस सृष्टि रूपी नाटक के अंत में उनके वास्तविक घर परमधाम लौटने का मार्ग बतलाने हेतु । शिवरात्रि परमात्मा का संगमयुग में अज्ञान अन्धकार रूपी रात्री (कलियुग अंत और सतयुग आदि ) में प्रजापिता ब्रह्मा के साधारण मनुष्य तन में दिव्य अवतरण का ही यादगार मनाया जाता है । इस ईश्वरीय निमंत्रण का उद्देश्य है परमात्मा के दिव्य अवतरण तथा वर्तमान के दृश्य प्रति सभी को जागरूक करना तथा बचे हुए शेष समय में परमात्मा से स्वर्ग में आधा कल्प के लिए पवित्रता, सुख, शांति का अपना ईश्वरीय जन्म सिद्ध अधिकार प्राप्त करने का अंतिम पुरुषार्थ करना ताकि यह उल्हाना ना हो कि हमें बताया नहीं गया और ना ही पश्चात्ताप करना पड़े कि हम ने भाग्य बनाने का सुनहरा अवसर खो दिया। Before we begin, To listen or download the Hindi Audio of this article, click here To download or print the PDF version to this article, click here Or Go to -> Other Useful links प्रति _______________ (आपका नाम ) प्रिय आत्मन, दैवी भाई तथा बहनों, ईश्वरीय याद प्यार स्वीकार करना जी | प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आप को हार्दिक निमंत्रण है कि आप सहपरिवार यहाँ पधारकर सहज राजयोग की शिक्षा ग्रहण करें | यह रूहानी शिक्षा कोई मनुष्य द्वारा दिया हुआ नहीं है बल्कि स्वयं निराकार ज्योतिर्बिंदुस्वरुप शिव परमात्मा एक साधारण मानव तन को निमित्त बनाकर १९३६ से अब तक दे रहे हैं | परमात्मा जिस मानव को आधार बनाते हैं उनका नाम पहले दादा लेखराज था जो कि एक बहुत बड़े हीरे जवाहरात के व्यापारी थे जिनका नाम बदलकर भगवान शिव ने “प्रजापिता ब्रह्मा” रखा | फिर उनके द्वारा प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थापना का कार्य संपन्न हुआ | इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय का लक्ष्य है भारत सहित पूरे विश्व को स्वर्ग बनाना और यह बनना ही है क्योंकि यह ईश्वरीय कार्य स्वयं परमात्मा प्रजापिता ब्रह्मा और जगदम्बा सरस्वती के माध्यम से करा रहे हैं | अतः आप आत्मिक भाइयों और बहनों से नम्र निवेदन है कि आप भी सह्परिवार इस ईश्वरीय विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण कर अवश्य अपना श्रेष्ठ भाग्य बनायें क्योंकि समय बहुत कम है और जल्द परिवर्तन होने वाला है | पुरानी कलियुगी दुनिया बदल नयी सतयुगी स्वर्णिम दुनिया का शीघ्र आगमन होने जा रहा है जहाँ पर प्राणियों सहित कोई भी मनुष्य आत्माओं को किसी भी प्रकार का दुःख, अशांति वा अप्राप्ति नहीं होगी , सदैव सुख शांति समृद्धि का राज्य होगा, सभी मानव देवता तुल्य होंगे, सोने हीरों के महल होंगे , प्रकृति सतोप्रधान होगी, प्रकृति के सभी पांचो तत्व सुखदायी होंगे, कोई भी विकार नहीं होंगे, एक राज्य और एक भाषा होगी, जहाँ नर श्री नारायण और नारी श्री लक्ष्मी समान होंगे | मानव से देवता बनने की पढ़ाई इस ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में वर्तमान समय चल रहा है | एक तरफ नयी दुनिया की स्थापना का कार्य चल रहा है तो दूसरी तरफ विज्ञान द्वारा पुरानी कलियुगी दुनिया के विनाश का कार्य भी चल रहा है | कलियुगी दुनिया का विनाश तीन प्रकार से होगा १) गृह युद्ध द्वारा २) प्राकृतिक आपदाओं द्वारा और ३) परमाणु रासायनिक हथियारों द्वारा | कलियुगी दुनिया का महाविनाश अवश्यम्भावी होना ही है जिसका अंदाजा आप वर्तमान परिस्थितियों को देख लगा सकते हैं | अधिक जानकारी लिए visit page: World Transformation आखिर में, आप महानुभावों को यही बताना चाहेंगे कि विनाश सामने खड़ा है जिसको ही शास्त्रों में महाभारत का समय कहा गया है | सर्वशास्त्रमई शिरोमणि श्रीमद भगवद गीता जिसमें भगवानुवाच शब्द का जिक्र आया है उसमें भी यही दिखाया है कि एक तरफ युद्ध के लिए कौरव तैयार हैं और दूसरी तरफ भगवान अर्जुन को सत्य ज्ञान सुना रहे हैं | वर्तमान समय वही गीता का प्रकरण पुनरावृत्त हो रहा है लेकिन अंतर यह है कि वर्तमान में वास्तविक गीता के भगवान परमात्मा निराकार शिव सच्चा गीता ज्ञान सभी मनुष्यात्माओं रूपी अर्जुन को अंतर बाह्य युद्ध जैसे माहोल में दे रहे हैं | एक तरफ साइंस द्वारा महाविनाश की तैयारी जोर शोर से चल रही है तो दूसरी तरफ परमपिता परमात्मा शिव प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा सत्य ज्ञान सुनाकर पतित मनुष्यात्माओं को देवात्मा बनाने का दिव्य कार्य कर रहे हैं | आप भी इस ईश्वरीय ज्ञान और सहज राजयोग की शिक्षा को अवश्य अपने जीवन में धारण कर परमात्मा शिव जो सभी आत्माओं के एकमेव परमपिता हैं , जिन्हें शिव, अल्लाह, खुदा, जेवोहा, ओंकार, वाहेगुरु इत्यादि नामों से विभिन्न धर्मों में जानते हैं के वरदानों के पात्र बनें और भविष्य में आने वाली दैवी दुनिया में २१ जन्मों का राज्य भाग्य अवश्य प्राप्त करें | ओम शांति l * (Video) ईश्वरीय निमंत्रण ( Godly Invitation - Hindi )- BK Anil Kumar * Article Video in English (youtube) ~~~ Useful links ~~~ PDF version of this article 7 days online course in Hindi About God - Shiv Baba (introduction) Maha Shivrati - Main page RESOURCES - Everything Other Articles BK Google - Search Engine for BKs . #Hindi #brahmakumari #brahmakumaris

  • Special Message for Shivratri

    SPECIAL MESSAGE FOR SHIVRATRI. This is a Godly invitation to all Souls of world. Special for Shviratri 2019 when Shiv baba will begin the third and the most important part. Please read the article till end. So SHARE to guide other souls. Divine brothers & sisters, Awake ! Awake ! O Souls of the world… God of God, the God Father of all souls, the true Gita sermonizer called as Shiva, Allah, Khuda, Jehovah, Omkar etc. various names has re-incarnated in the holy land of Bharat (ancient land of present India) to: 1) To re-establish new righteous Golden aged world or Heaven so that all souls of the world are relieved from sorrow, pain and sufferings of this unrighteous, degraded old iron aged world of Kaliyuga. 2) To reveal the true identity of human being as souls, the child of God - the Supreme soul and impart the knowledge of creator (God) and Creation ( World drama ) 3) To guide all soul actors to return back to their original abode (soul world) at the end of this world drama. Shivratri is celebrated in the memorial of his divine birth in an ordinary medium of Prajapita Brahma at the dark night of ignorance in Confluence age (at the end of Iron age and beginning of golden age). This godly invitation is to make everyone aware of God’s descent, current scenario for making a final effort to acquire god fatherly birth right of 100% purity, peace and happiness in heaven for half cycle within the remaining time so that you neither complain that we were not informed nor repent that we missed the golden opportunity to create our destiny. Before we begin, If you wish to listen or download the Audio version, click here If you wish to download or print the PDF version, click here OR Go to Useful links To: ____________ (your name) Dear divine soul, Accept Godly love and remembrance. Hearty invitation from Prajapita Brahma Kumaris Godly University to come and gain Raja Yoga knowledge along with your family. These spiritual teachings aren't given by any human being, but by incorporeal point light form Supreme Soul Shiva himself by making an ordinary human body as his instrument, since 1936 till now. The name of the human being whom the Supreme Soul makes his instrument was initially Dada Lekhraj who was a very renowned diamond jeweller. His name was then changed to "Prajapita Brahma"by God Shiva. Then the task of establishment of the 'Prajapita Brahma Kumaris Ishwariya Vishwa Vidyalaya' was carried out through him. The aim of this Godly world university is to transform Bharat and whole world into heaven. and this will definitely be accomplished since this Godly task is being carried out through the Supreme Soul Himself through the medium of Prajapita Brahma and Jagadamba Saraswati. Hence, it's an humble request to you spiritual brothers and sisters that you too imbibe knowledge from this Godly world university along with your family, because little time remains and transformation would soon happen. The old iron aged world would change and the new golden aged world is going to arrive soon, where there won't be any type of sorrow, peacelessness or shortage for human souls as well as other creatures; the kingdom of eternal happiness, peace and prosperity would flourish; all human beings would be equivalent to deities, there would be palaces of gold and diamonds, nature would be Satopradhan ( intense pure ), all the five elements of nature would radiate happiness, there won’t be any kind of vices; there would be one kingdom, one language; men would be as Shri Narayan and women would be as Shri Lakshmi. The study of becoming a deity from human being, imparted by Supreme Soul Shiva, is going on in this Prajapita Brahma Kumaris Godly World University at present time. On one side, the task of establishment of new world is going on, while on the other side, the preparations for the task of destruction of old world through science/technology is also going on. The destruction of this iron aged world would happen in three ways 1) domestic violence 2) natural calamities 3) atomic weapons. The great destruction of iron aged world is predestined and inevitable which you can estimate looking at the current scenarios. To know more, visit page: World Transformation Finally, we would like to inform you great entities that great destruction is ahead of us, which has been described as the Mahabharata period in the scriptures. Even in Gita – the jewel of all scriptures, the word "God said” is mentioned, it is shown that the Kauravas are ready for the battle on one side, while God is imparting true knowledge to Arjuna on the other side. It is the same Gita episode which is repeating at the present time, but the only difference is that the real God of Gita, incorporeal Supreme Soul Shiva, is imparting true Gita knowledge to all human souls-like-Arjuna amidst internal external war-like-scenario. The preparations for great-destruction through science is going on in full swing on one side, while Supreme Soul is carrying on the divine task of making impure human beings into divine souls by giving true knowledge through Prajapita Brahma Kumaris Godly University on the other side. You too definitely imbibe the teachings of this Godly knowledge and easy Raja Yoga and become worthy of the blessings of Supreme Soul Shiva who is the one and only Supreme Father of all souls, known as Shiva/ Allah/Khuda/Jehovah/Omkar etc infinite names And definitely receive his inheritance of kingdom for 21 births in the coming deity world. Om Shanti. * Video - GODLY INVITATION - This Article with Voice * Article Video in Hindi voice (youtube) ~~~ Useful links ~~~ PDF version of this article 7 days course online About God - Shiv Baba (introduction) Maha Shivrati - Main page Other Articles BK Google - Search Engine for BKs . #brahmakumari #brahmakumaris

  • 1 March 2019 आज की मुरली से कविता (Today Murli Poem)

    Hindi Poem from today's murli. Aaj ki gyan murli se ek Kavita 1 March 2019. This poem is daily written on day's murli by Brahma Kumar (BK) Mukesh (from Rajasthan). To read more Hindi poems written, visit Murli Poems page. * मुरली कविता दिनांक 1.3.2018 * बाप और बच्चों की एक्टिविटी में फर्क है महान बच्चों संग खेलकर भी बाप करता नहीं रसपान कुसंग ने हम सबको ऊंचाई से नीचे दिया उतार सत्य बाप संग बुद्धि लगाकर हो जाओ तुम पार संग करके एक बाप का बाकी सम्बन्ध भुलाओ याद में रहकर बाप समान पूरे पावन बन जाओ ज्ञान योग की दो क्लास बच्चों को बाप करवाते योग से पाप मिटाकर ज्ञान से ऊंच पद हम पाते ज्ञान मार्ग हम बच्चों को सुख का वर्सा दिलाता बच्चों को सुखधाम ले जाने बाप धरा पर आता बाप को याद कर सोने समान पावन बन जाओ सतयुगी निर्विकारी दुनिया में पवित्र शरीर पाओ लगा ग्रहण जब राहु का सर्व कलाएं हुई समाप्त तन मन के संग हर तरफ कालापन हुआ व्याप्त अपना निरकार बिंदी स्वरूप बुद्धि में जब आए आत्मा का सत्य रियलाइजेशन तब ही कहलाए एक बाप के संग बैठने खाने का अनुभव करना कुसंग छोड़कर केवल सत बाप के संग में रहना सभी कर्मों का हिसाब याद की यात्रा से चुकाना नई दुनिया के लिए खुद को ट्रांसफर करते जाना बिंदु स्वरूप में स्वयं को तुम स्थित करते जाओ मन बुद्धि को नेगेटिव के प्रभाव से मुक्त बनाओ संकल्प बोल और कर्म में जो करता है जी हजूर आज्ञाकारी का टाइटल उसको मिलता है जरूर *ॐ शांति* ---- Useful links ---- Online Services (all listed) Resources - Divine collection BK Google - A divine search engine for BKs Brahma Kumaris Website links Videos Gallery - YouTube playlist Follow our Main Blog . #Murli #brahmakumari #brahmakumaris

  • शब्दों का चुनाव (Selection of Words)

    Hindi poem for Purusharth - शब्दों का चुनाव (Selection of Words). Humare Bol (shabd) kaise ho? * शब्दों का चुनाव * अपनी वाणी में शब्दों का ठीक से करो चुनाव व्यर्थ के वाद विवाद से कर लो अपना बचाव गलत शब्द कभी कभी ऐसा बाण बन जाता ना जाने कितने दिलों को ये आहत कर जाता मामूली सी बात पर हो जाते अपने भी पराए घर भी उजड़ जाते जो थे प्यार से बसे बसाए टूट जाते रिश्ते नाते और खत्म हो जाता प्यार उदासी आती जीवन में नहीं सुहाता ये संसार रोग नहीं ये महारोग इसका कर लो समाधान करो खुद का सुधार करके आत्म अनुसन्धान भूले से भी ना हो किसी का शब्दों से अपमान वाणी मीठी रखकर सबको देते जाओ सम्मान शब्द वही अनमोल जो लाए जीवन में मुस्कान जो नफरत का मिटा दे दुनिया से नाम निशान प्यार भरे मीठे बोल ही जीवन को सुखी बनाते वसुधैव कुटुम्बकम् का साकार रूप दिखलाते *ॐ शांति* ~~~ Useful links ~~~ More Articles - Blog Daily Murli Poems Online Internet Services BK Articles Blog BK Google - Our Search Engine . #brahmakumari #Hindi #brahmakumaris

  • 28 Feb 2019 आज की मुरली से कविता (Today Murli Poem)

    Hindi Poem from today's murli. Aaj ki gyan murli se ek Kavita 28 Feb 2019. This poem is daily written on day's murli by Brahma Kumar (BK) Mukesh (from Rajasthan). To read more Hindi poems written, visit Murli Poems page. * मुरली कविता दिनांक 28.2.2019 * पुरुषार्थ करके बच्चों खुद को होली हंस बनाओ लक्ष्मी नारायण समान सम्पूर्ण पावन बन जाओ सबकुछ छोड़कर बाप की याद में समय लगाओ अपने अन्दर से विकारों का पूरा कचरा मिटाओ याद की यात्रा बच्चों को कौड़ी से हीरा बनाएगी केवल यही विधि सतयुग में पद ऊँचा दिलाएगी पतित से पावन बनाने का कर्तव्य बाप निभाता यही जिम्मेदारी निभाने बाप परमधाम से आता संगमयुग में आकर बच्चों ईश्वरीय मत अपनाओ खुद को बगुले से हँस और कांटे से फूल बनाओ रेज़गारी समान बातों में अब समय नहीं गंवाओ बाप को याद करके अन्दर का किचड़ा मिटाओ पुरानी दुनिया से बच्चों करना बेहद का सन्यास कब्रिस्तान बनी दुनिया से करो पूरा ही उपवास बाप की याद से पुराने हिसाब-किताब चुकाओ श्रीमत पर चलकर सबको कांटे से फूल बनाओ माया ही बच्चों की महसूसता की शक्ति मिटाती परवश बनाकर गलत को सही अनुभव कराती केयरफुल रहकर माया के वार खुद को बचाओ अपनी मन बुद्धि बाप की छत्रछाया में ले जाओ सहजयोगी आत्माओं को हर रोज देखते जाओ उनके वाइब्रेशन से खुद को सहजयोगी बनाओ *ॐ शांति* ---- Useful links ---- Online Services (all listed) Resources - Divine collection BK Google - A divine search engine for BKs Brahma Kumaris Website links Videos Gallery - YouTube playlist Follow our Main Blog .

  • ज्ञान, योग, धारणा, सेवा में पुरुषार्थ की विधि

    ❣⚜❣⚜❣⚜❣⚜❣⚜❣ आज बाबा ने ब्रह्माकुमार सूरज भाई जी द्वारा बहुत ही लाभदायक क्लास कराई इस में बाबा ने 16 अभ्यास बताएं जिसके अभ्यास से आत्मा शक्तिशाली बन जाती है। Today Baba gave a gift of points of Shrimat for Purusharth in our Four main subjects - Gyan, Yog, Dharna and Sewa. Here is the point wise notes. Do write down all points in your notebook or print it. (Also refer to page: Four Subjects) To view, download or print this, visit PDF version. इसके छोटे छोटे अभ्यास से बड़े अभ्यास बन जाते हैं बस लयबद्ध से अभ्यास करने से मन में शक्ति भरती हैं। * ज्ञान के 5 प्वांइट * 1) मुरली को मनन जरूर जरूर करना है कि क्योंकि ज्ञान प्रकाश अनुभूति है। 2) मुरली को समझना है एक एक वाक्य पर घ्यान देना है पहले समझना होगा फिर आगे बढना है गुह्यी अर्थ को समझना होगा। 3) मुरली का वरदान या स्लोगन बच्चों की तरह रट लेना है फिर पुरा दिन याद करते करते अपने में समाना है। 4) बार बार पढ़कर फिर रिवाइज करना है पक्का पाठ याद करना है। 5) मुरली को कम से कम 2 बार पढ़ना है एक बार सुनना सुनने से कुछ बाते निकल जाती है। * योग की 4 प्वांइट * 1) बाबा को बड़े प्यार बार बार बुलाना उनका आव्हान करना बाबा को अधिकार से बड़े प्यार बुलाओ बाबा आ जाओ । 2) अमृत वेला ब्राह्मणों का फाउंडेशन है कभी मिस नहीं करना है रात को जल्दी सो जाना चाहिए। 3) बाबा को बार बार बड़े दिल से भाव से शुक्रिया कहना है शुक्रिया बाबा । 4 अटेंशन स्वय पर रखना है दूसरों को नहीं देखना है समय के महत्व को जान अपना पुरूषार्थ करना है। * धारणा के प्वाइंट * 1) डिजिटल वर्ल्ड से दूर रहना है यही माया का प्रवेश द्वार है इसे केवल ज्ञान व सेवा प्रति प्रयोग करना है। 2) झगमूई झरमूई से दूर रहना है असत्य बात न सुन्नी है ना हि फैलानी है। 3) एकांत में जरूर बैठना है मौन में रहकर कर बाबा को याद करना है अंर्तमुखी बनना है। * सेवा के प्वांइट * 1) सेवा में संकल्प बोल की इकोनामी करनी है साथ साथ भोजन पानी बिजली स्थूल धन की भी इकोनामी करनी है। 2) अपनी विशेषता को बढ़ाना है कुछ न कुछ नया सीख कर उसे सेवा में लगाना है। 3) सेवा में नवीनता लानी है एक जैसी नहीं करनी है जितनी नवीनता होगी तो खुशी भी रहेगी । 4) सेवा श्रीमत अनुसार करनी है आत्म अभिमानी स्थिति में करनी है परमात्मा की याद सारा टाइम बनी रहे स्वमान की सीट पर सेट होकर करनी है अपना तन मन धन सब सेवा में लगाना है सम्पूर्ण समर्पण सेवा निस्वार्थ निष्काम करनी है कोई इच्छा नहीं करनी है कोई वर्णन नहीं । * शुक्रिया बाबा शुक्रिया * ~~~~ Useful links ~~~~ PDF version of this Article Revelations from Gyan Murli Four Subjects of BK Resources - Total collection Explore the Sitemap BK Articles Blog . #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi

  • 27 Feb 2019 आज की मुरली से कविता (Today Murli Poem)

    Hindi Poem from today's murli. Aaj ki gyan murli se ek Kavita 27 Feb 2019. This poem is daily written on day's murli by Brahma Kumar (BK) Mukesh (from Rajasthan). To read more Hindi poems written, visit Murli Poems page. * मुरली कविता दिनांक 27.2.2019 * याद का चार्ट तुम्हारे पुरुषार्थ की गति बताएगा देहभान पीछे करेगा आत्मभान आगे बढ़ाएगा सतयुगी सुख का मोल जिसे समझ में आएगा वही बच्चा सतयुग में शुरू के जन्मों में आएगा स्वर्ग का वर्सा देने वाले की सबको दो पहचान निराकार वो ज्योति बिन्दु अपना शिव भगवान पुरुषार्थ में थककर बच्चे कितनी रड़ियाँ मारते आत्मभान की स्थिति से खुद को नीचे उतारते अति सरल सीधा ज्ञान हम सबको बाप सुनाते बाप को याद ना कर बच्चे मुश्किल इसे बनाते केवल मनुष्य मत ही सबको दुर्गति में ले जाती ईश्वरीय मत फिर से बच्चों को सद्गति दिलाती शरीर निर्वाह अर्थ बच्चों कर्म जरूर तुम करना किंतू बाप को भूलने की गलती कभी ना करना दुनिया के झंझटों में कभी खुद को ना फंसाना मनुष्य मत को छोड़कर बाप की मत अपनाना एक बाप से प्यार रखकर उसकी महिमा गाना बाकी सभी देहधारियों से मोह को तुम मिटाना नॉलेज की शक्ति से हर गलत को सही बनाओ परिवर्तन के बल से ज्ञानी तू आत्मा कहलाओ व्यर्थ और गलत संकल्पों के वश में नहीं आना ज्ञान प्रकाश के बल से अज्ञान अंधेरा मिटाना शुभ चिन्तन करते हुए शुभ चिन्तक बन जाओ व्यर्थ चिन्तन करने की आदत जड़ से मिटाओ *ॐ शांति* ---- Useful links ---- Online Services (all listed) Resources - Divine collection BK Google - A divine search engine for BKs Brahma Kumaris Website links Videos Gallery - YouTube playlist Follow our Main Blog . #Murli #brahmakumari #Hindi #brahmakumaris

  • 26 Feb 2019 आज की मुरली BK murli in Hindi

    Brahma Kumaris murli today in Hindi Aaj ki murli Madhuban 26-02-2019 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन "मीठे बच्चे - इस शरीर से जीते जी मरने के लिए अभ्यास करो - 'मैं भी आत्मा, तुम भी आत्मा' - इस अभ्यास से ममत्व निकल जायेगा'' प्रश्नः- सबसे ऊंची मंज़िल कौन-सी है? उस मंज़िल को प्राप्त करने वालों की निशानी क्या होगी? उत्तर:- सभी देहधारियों से ममत्व टूट जाए, सदा भाई-भाई की स्मृति रहे - यही है ऊंची मंज़िल। इस मंज़िल पर वही पहुँच सकते हैं जो निरन्तर देही-अभिमानी बनने का अभ्यास करते हैं। अगर देही-अभिमानी नहीं तो कहीं न कहीं फँसते रहेंगे या अपने शरीर में या किसी न किसी मित्र सम्बन्धी के शरीर में। उन्हें कोई की बात अच्छी लगेगी या कोई का शरीर अच्छा लगेगा। ऊंची मंज़िल पर पहुँ-चने वाले जिस्म (देह) से प्यार कर नहीं सकते। उनका शरीर का भान टूटा हुआ होगा। ओम् शान्ति। रूहानी बाप रूहानी बच्चों को कहते हैं - देखो, मैं तुम सभी बच्चों को आपसमान बनाने आया हूँ। अब बाप आप समान बनाने कैसे आयेंगे? वह है निराकार, कहते हैं मैं निराकार हूँ तुम बच्चों को आपसमान अर्थात् निराकारी बनाने, जीते जी मरना सिखलाने आया हूँ। बाप अपने को भी आत्मा समझते हैं ना। इस शरीर का भान नहीं है। शरीर में रहते हुए भी शरीर का भान नहीं है। यह शरीर उनका तो नहीं है ना। तुम बच्चे भी इस शरीर का भान निकाल दो। तुम आत्माओं को ही मेरे साथ चलना है। यह शरीर जैसे मैंने लोन लिया है, वैसे आत्मायें भी लोन लेती हैं पार्ट बजाने लिए। तुम जन्म-जन्मान्तर शरीर लेते आये हो। अब जैसे मैं जीते जी इस शरीर में हूँ परन्तु हूँ तो न्यारा अर्थात् मरा हुआ। मरना शरीर छोड़ने को कहा जाता है। तुमको भी जीते जी इस शरीर से मरना है। मैं भी आत्मा, तुम भी आत्मा। तुमको भी मेरे साथ चलना है या यहाँ ही बैठना है? तुम्हारा इस शरीर में जन्म-जन्मान्तर का मोह है। जैसे मैं अशरीरी हूँ, तुम भी जीते जी अपने को अशरीरी समझो। हमको अब बाबा के साथ जाना है। जैसे बाबा का यह पुराना शरीर है, तुम आत्माओं का भी यह पुराना शरीर है। पुरानी जुत्ती को छोड़ना है। जैसे मेरा इसमें ममत्व नहीं है, तुम भी इस पुरानी जुत्ती से ममत्व निकालो। तुमको ममत्व रखने की आदत पड़ी हुई है। हमको आदत नहीं है। मैं जीते जी मरा हुआ हूँ। तुमको भी जीते जी मरना है। मेरे साथ चलना है तो अब यह प्रैक्टिस करो। शरीर का कितना भान रहता है, बात मत पूछो! शरीर रोगी हो जाता है तो भी आत्मा उसको छोड़ती नहीं है, इससे ममत्व निकालना पड़े। हमको तो बाबा के साथ जाना जरूर है। अपने को शरीर से न्यारा समझना है। इसको ही जीते जी मरना कहा जाता है। अपना घर ही याद रहता है। तुम जन्म-जन्मान्तर से इस शरीर में रहते आये हो इसलिए तुमको मेहनत करनी पड़ती है। जीते जी मरना पड़ता है। मैं तो इसमें आता ही टैप्रेरी हूँ। तो मरकर चलने से अर्थात् अपने को आत्मा समझकर चलने से कोई भी देहधारी में ममत्व नहीं रहेगा। अक्सर करके किसी न किसी का किसी में मोह हो जाता है। बस, उनको देखने बिगर रह नहीं सकते। यह देहधारी की याद एकदम उड़ा देनी चाहिए क्योंकि बहुत बड़ी मंज़िल है। खाते-पीते जैसेकि इस शरीर में हूँ ही नहीं। यह अवस्था पक्की करनी है तब 8 रत्नों की माला में आ सकते हैं। मेहनत बिगर थोड़ेही ऊंच पद मिल सकता है। जीते जी देखते हुए समझें कि मैं तो वहाँ का रहने वाला हूँ। जैसे बाबा इसमें टैप्रेरी बैठा है, ऐसे अब हमको भी घर जाना है। जैसे बाबा का ममत्व नहीं है, वैसे हमको भी इसमें ममत्व नहीं रखना है। बाप को तो इस शरीर में बैठना पड़ता है, तुम बच्चों को समझाने लिए।तुमको अब वापिस चलना है इसलिए कोई देहधारी में ममत्व न रहे। यह फलानी बहुत अच्छी है, मीठी है - आत्मा की बुद्धि जाती है ना। बाप कहते हैं शरीर को नहीं, आत्मा को देखना है। शरीर को देखने से तुम फँस मरेंगे। बड़ी मंज़िल है। तुम्हारा भी जन्म-जन्मान्तर का पुराना ममत्व है। बाबा का ममत्व नहीं है तब तो तुम बच्चों को सिखलाने आया हूँ। बाप खुद कहते हैं मैं तो इस शरीर में नहीं फँसता हूँ, तुम फँसे हुए हो। मैं तुमको छुड़ाने आया हूँ। तुम्हारे 84 जन्म पूरे हुए, अब शरीर से भान निकालो। देही-अभिमानी होकर न रहने से तुम कहीं न कहीं फँसते रहेंगे। कोई की बात अच्छी लगेगी, कोई का शरीर अच्छा लगेगा, तो घर में भी उनकी याद आती रहेगी। जिस्म पर प्यार होगा तो हार खा लेंगे। ऐसे बहुत खराब हो जाते हैं। बाप कहते हैं स्त्री-पुरुष का सम्बन्ध छोड़ अपने को आत्मा समझो। यह भी आत्मा, हम भी आत्मा। आत्मा समझते-समझते शरीर का भान निकलता जायेगा। बाप की याद से ही विकर्म भी विनाश होंगे। इस बात पर तुम अच्छी तरह से विचार सागर मंथन कर सकते हो। विचार सागर मंथन करने बिगर तुम उछल नहीं सकेंगे। यह पक्का होना चाहिए कि हमको बाप के पास जाना है जरूर। मूल बात है याद की। 84 का चक्र पूरा हुआ फिर शुरू होना है। इस पुरानी देह से ममत्व नहीं हटाया तो फँस पड़ेंगे या अपने शरीर में या कोई मित्र-सम्बन्धी के शरीर में। तुमको तो किससे भी दिल नहीं लगानी है। अपने को आत्मा समझ बाप को याद करना है। हम आत्मा भी निराकार, बाप भी निराकार, आधा-कल्प तुम भक्ति मार्ग में बाप को याद करते आये हो ना। 'हे प्रभू' कहने से शिवलिंग ही सामने आयेगा। कोई देहधारी को 'हे प्रभू' कह न सके। सभी शिव के मन्दिर में जाते हैं, उनको ही परमात्मा समझ पूजते हैं। ऊंचे से ऊंचा भगवान् एक ही है। ऊंचे से ऊंचा अर्थात् परमधाम में रहने वाला। भक्ति भी पहले अव्यभिचारी होती है एक की। फिर व्यभिचारी बन जाती है। तो बाप बार-बार बच्चों को समझाते हैं कि तुमको ऊंच पद पाना है तो यह प्रैक्टिस करो। देह का भान छोड़ो। सन्यासी भी विकारों को छोड़ते हैं ना। आगे तो सतोप्रधान थे अभी तो वह भी तमोप्रधान बन पड़े हैं। सतोप्रधान आत्मा कशिश करती है, अपवित्र आत्माओं को खींचती है क्योंकि आत्मा पवित्र है। भल पुनर्जन्म में आते हैं तो भी पवित्र होने के कारण खींचते हैं। कितने उन्हों के फालोअर्स बनते हैं। जितनी पवित्रता की जास्ती ताकत, उतने ज्यादा फालोअर्स। यह बाप तो है ही एवरप्योर और है भी गुप्त। डबल है ना, त़ाकत सारी उनकी है। इनकी (ब्रह्मा की) नहीं। शुरू में भी तुमको उसने कशिश की। इस ब्रह्मा ने नहीं क्योंकि वह तो एवरप्योर है। तुम कोई इनके पिछाड़ी नहीं भागे। यह कहते हैं मैं तो सबसे जास्ती पूरे 84 जन्म प्रवृत्ति मार्ग में रहा। यह तो तुमको खींच न सके। बाप कहते हैं मैंने तुमको खींचा। भल सन्यासी पवित्र रहते हैं। परन्तु मेरे जैसा पवित्र तो कोई भी होगा नहीं। वह तो सब भक्ति मार्ग के शास्त्र आदि सुनाते हैं। मैं आकर तुमको सब वेदों शास्त्रों का सार सुनाता हूँ। चित्र में भी दिखाया है विष्णु की नाभी से ब्रह्मा निकला फिर ब्रह्मा के हाथ में शास्त्र दिखाये हैं। अब विष्णु तो ब्रह्मा द्वारा शास्त्रों का सार सुनाते नहीं हैं। वो तो विष्णु को भी भगवान् समझ लेते हैं। बाप समझाते हैं मैं इन ब्रह्मा द्वारा सुनाता हूँ। मैं विष्णु द्वारा थोड़ेही समझाता हूँ। कहाँ ब्रह्मा, कहाँ विष्णु। ब्रह्मा सो विष्णु बनते हैं फिर 84 जन्म के बाद यह संगम होगा। यह तो नई बातें हैं ना। कितनी वन्डरफुल बातें हैं समझाने की।अब तो बाप कहते हैं - बच्चे, जीते जी मरना है। तुम शरीर में जीते हो ना। समझते हो हम आत्मा हैं, हम बाबा के साथ चले जायेंगे। यह शरीर आदि कुछ भी ले नहीं जाना है। अब बाबा आया है, कुछ तो नई दुनिया में ट्रांसफर कर दें। मनुष्य दान-पुण्य आदि करते हैं दूसरे जन्म में पाने के लिए। तुमको भी नई दुनिया में मिलना है। यह भी करेंगे वही जिन्होंने कल्प पहले किया होगा। कम जास्ती कुछ भी होगा नहीं। तुम साक्षी होकर देखते रहेंगे। कुछ कहने की भी दरकार नहीं रहती। फिर भी बाप समझाते हैं जो कुछ करते हैं तो उसका भी अहंकार नहीं आना चाहिए। हम आत्मा यह शरीर छोड़कर जायेंगे। वहाँ नई दुनिया में जाकर नया शरीर लेंगे। गाया भी जाता है राम गयो रावण गयो..... रावण का परिवार कितना बड़ा है। तुम तो मुट्ठी भर हो। यह सारा रावण सम्प्रदाय है। तुम्हारा राम सम्प्रदाय कितना थोड़ा होगा - 9 लाख। तुम धरनी के सितारे हो ना। माँ-बाप और तुम बच्चे। तो बाप बार-बार बच्चों को समझाते हैं कि मरजीवा बनने की कोशिश करो। अगर किसको देखकर बुद्धि में आता है - यह बहुत अच्छी है, बहुत मीठा समझाती है, यह भी माया का वार होता है, माया ललचा देती है। उनकी तकदीर में नहीं है तो माया सामने आ जाती है। कितना भी समझाओ तो गुस्सा लगेगा। यह नहीं समझते हैं कि यह देह-अभिमान ही काम करा रहा है। अगर ज्यादा समझाते हैं तो टूट पड़ते हैं इसलिए प्यार से चलाना पड़ता है। किससे दिल लग जाता है तो बात मत पूछो, पागल हो जाते हैं। माया एकदम बेसमझ बना देती है इसलिए बाप कहते हैं कभी कोई के नाम-रूप में नहीं फँसना। मैं आत्मा हूँ और एक बाप जो विदेही है, उनसे ही प्यार रखना है। यही मेहनत है। कोई भी देह में ममत्व न हो। ऐसे नहीं, घर में बैठे भी वह ज्ञान देने वाली याद आती रहे - बड़ी मीठी है, बहुत अच्छा समझाती है। अरे, मीठा तो ज्ञान है। मीठी आत्मा है। शरीर थोड़ेही मीठा है। बात करने वाली भी आत्मा है। कभी भी शरीर पर आशिक नहीं होना है।आजकल तो भक्ति मार्ग बहुत है। आनन्दमई माँ को भी माँ-माँ करते याद करते रहते हैं। अच्छा, बाप कहाँ है? वर्सा बाप से मिलना है या माँ से? माँ को भी पैसा कहाँ से मिलेगा? सिर्फ माँ-माँ कहने से जरा भी पाप नहीं कटेंगे। बाप कहते हैं मामेकम् याद करो। नाम रूप में नहीं फँसना है, और ही पाप हो जायेगा क्योंकि बाप का ऩाफरमानबरदार बनते हो। बहुत बच्चे भूले हुए हैं। बाप समझाते हैं मैं तुम बच्चों को लेने आया हूँ सो जरूर ले जाऊंगा, इसलिए मेरे को याद करो। एक मुझे याद करने से ही तुम्हारे पाप कटेंगे। भक्ति मार्ग में बहुतों को याद करते आये हो। परन्तु बाप बिगर कोई काम कैसे होगा। बाप थोड़ेही कहते हैं माँ को याद करो। बाप तो कहते हैं मुझे याद करो। पतित-पावन मैं हूँ। बाप के डायरेक्शन पर चलो। तुम भी बाप के डायरेक्शन पर औरों को समझाते रहो। तुम थोड़ेही पतित-पावन ठहरे। याद एक को ही करना है। हमारा तो एक बाप, दूसरा न कोई। बाबा हम आप पर ही वारी जायेंगे। वारी जाना तो शिवबाबा पर ही है और सबकी याद छूट जानी चाहिए। भक्ति मार्ग में तो बहुतों को याद करते रहते हैं। यहाँ तो एक शिवबाबा, दूसरा न कोई। फिर भी कोई अपनी चलाते हैं तो क्या गति-सद्गति होगी! मूँझ पड़ते हैं - बिन्दी को कैसे याद करें? अरे, तुमको अपनी आत्मा याद है ना कि मैं आत्मा हूँ। वह भी बिन्दी रूप ही है। तो तुम्हारा बाप भी बिन्दी है। बाप से वर्सा मिलता है। माँ तो फिर भी देह-धारी हो जाती है। तुमको विदेही से ही वर्सा मिलना है इसलिए और सब बातें छोड़ एक से बुद्धियोग लगाना है। अच्छा! मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते। धारणा के लिए मुख्य सार:- 1) शरीर का भान खत्म करने के लिए चलते-फिरते अभ्यास करना है-जैसे कि इस शरीर से मरे हुए हैं, न्यारे हैं। शरीर में हैं ही नहीं। बिगर शरीर आत्मा को देखो। 2) कभी भी किसी के शरीर पर तुम्हें आशिक नहीं होना है। एक विदेही बाप से ही प्यार रखना है। एक से ही बुद्धियोग लगाना है। वरदान:- ब्राह्मण जीवन में सर्व खजानों को सफल कर सदा प्राप्ति सम्पन्न बनने वाले सन्तुष्टमणि भव ब्राह्मण जीवन का सबसे बड़े से बड़ा खजाना है सन्तुष्ट रहना। जहाँ सर्व प्राप्तियां हैं वहाँ सन्तुष्टता है और जहाँ सन्तुष्टता है वहाँ सब कुछ है। जो सन्तुष्टता के रत्न हैं वह सब प्राप्ति स्वरूप हैं, उनका गीत है पाना था वह पा लिया... ऐसे सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनने की विधि है - मिले हुए सर्व खजानों को यूज़ करना क्योंकि जितना सफल करेंगे उतना खजाने बढ़ते जायेंगे। स्लोगन:- होलीहंस उन्हें कहा जाता जो सदा अच्छाई रूपी मोती ही चुगते हैं, अवगुण रूपी कंकड़ नहीं। #Murli #brahmakumari #Hindi #brahmakumaris #bkmurlitoday

  • दिव्य बुद्धि (Hindi poem on Win over Maya)

    Hindi poem on the Divine nature of Soul. How to defeat Maya of 5 vices? Purusharth to develop Divine nature from a devil-like nature. * आसुरी वृत्ति की हार * भीतर के मनोयुद्ध में ना मालूम कौन हारेगा कौन बचेगा जिंदा और कौन किसको मारेगा वर्षों से मनोयुद्ध सबके मन में चलता आया इसी युद्ध ने हमको देवता या असुर बनाया कहानी इस युद्ध की सदियों से आई चलती हर जन्म यह कहानी अपनी चाल बदलती कभी बनाती राजा हमें कभी ये रंक बनाती कभी चढ़ाती अर्श पे कभी फर्श पे गिराती बड़ा कमाल का है यह उठा पटक का खेल बनता और बिगड़ता है कर्मों का पोता मेल एक जन्म का पुण्य आगे हमको सुख देता अगर पाप किए तो दुःख भी हमें बहुत देता आने वाले हर दुख का हमने कारण जाना ईश्वर से मिले ज्ञान नेत्रों से इसको पहचाना हमने सब दुख बढ़ाये अपने ही विकर्मों से नाश करेंगे दुख का हम अपने ही सुकर्मों से युक्ति हमें मिल गई सम्पूर्ण सुखी बनने की कसम खाई आसुरी संस्कारों को बदलने की जीवन से विकारों को जड़ से हम मिटा देंगे आने वाले हर विघ्न को हम पथ से हटा देंगे अपना आत्म अभिमान पूरा हम जगा लेंगे देह त्याग से पहले खुद को पावन बना लेंगे आत्म भान को बनाएंगे जीवन का श्रृंगार हम जीतेंगे और होगी आसुरी वृत्ति की हार *ॐ शांति* ~~~ Useful links ~~~ Hindi Poems from Today's Murli Special Hindi poems (selected) NEWS - New uploads, and more Resources - Everything Audio Our mobile apps - Android . #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi

  • 25 Feb 2019 आज की मुरली से कविता (Today Murli Poem)

    Hindi Poem from today's murli. Aaj ki gyan murli se ek Kavita 25 Feb 2019. This poem is daily written on day's murli by Brahma Kumar (BK) Mukesh (from Rajasthan). To read more Hindi poems written, visit Murli Poems page. * मुरली कविता दिनांक 25.2.2019 * आत्म अभिमानी बनने से दैवी गुण आते जाएंगे अपार खुशी रहेगी क्रिमिनल ख्याल मिट जाएंगे स्मृति रखो हम दैवी स्वराज्य स्थापन करने वाले मृत्युलोक छोड़कर हम अमरलोक में जाने वाले ये स्मृति रखने से तुम्हारी चलन सुधरती जाएगी दैवी गुण जागृत होंगे और खुशी बढ़ती जाएगी हम बच्चे थे रामराज्य और सूर्यवंशी घराने वाले बहुत जल्द फिर से हम उसी राज्य में जाने वाले रावण ने ही छीना था सूर्यवंशी राम राज्य हमारा बाप ने आकर समझाया भूलो रावण राज्य सारा सदाकाल के सुख की दुनिया में हमको है जाना यही निश्चय जगाकर बच्चों सच्ची खुशी मनाना रावण ने यहां आकर हमारी चाल चलन बिगाड़ी सुख से भरी दुनिया हमारी उसने आकर उजाड़ी बेहद के बाप खुद ही आकर दैवीगुण सिखलाते इसी खुशी का बच्चों तुम पारा क्यों नहीं चढ़ाते सतयुग के दैवी गुण बच्चों फिर से धारण करना सर्वगुण सम्पन्न बनने की तुम पूरी मेहनत करना सुखदाता बाप के बच्चों तुम औरों को सुख देना अवगुणी आदतों के वश दुख ना किसी को देना बहुतों का कल्याण करना वाणी मीठी बनाकर जगतजीत देवता बनना विकारों पर जीत पाकर हम बच्चों की भाग्य रेखा स्वयं भगवान खींचते श्रेष्ठ भाग्य से अपने बच्चों की जन्मपत्री सींचते ब्राह्मणों के जीवन में सबकुछ अच्छा होने वाला स्वयं भाग्य विधाता हमें इसकी गारंटी देने वाला एक बाप से सर्व संबंधों का रस तुम लेते जाओ एकरस स्थिति का अनुभव हर पल करते जाओ *ॐ शांति* ---- Useful links ---- Online Services (all listed) Resources - Divine collection BK Google - A divine search engine for BKs Brahma Kumaris Website links Videos Gallery - YouTube playlist Follow our Main Blog . #Murli #Hindi #brahmakumaris

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