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- BK Murli- 9 June 2020 | आज की मुरली Hindi | Brahma Kumaris
09-06-2020 Aaj ki Murli. Official Murli blog. मुरली ओम् शान्ति, मधुबन. Read or Listen Murli (audio) "मीठे बच्चे - सदा खुशी में रहो कि हमें कोई देहधारी नहीं पढ़ाते, अशरीरी बाप शरीर में प्रवेश कर खास हमें पढ़ाने आये हैं'' प्रश्नः- तुम बच्चों को ज्ञान का तीसरा नेत्र क्यों मिला है? उत्तर:- हमें ज्ञान का तीसरा नेत्र मिला है अपने शान्तिधाम और सुखधाम को देखने के लिए। इन आंखों से जो पुरानी दुनिया, मित्र-सम्बन्धी आदि दिखाई देते हैं उनसे बुद्धि निकाल देनी है। बाप आये हैं किचड़े से निकाल फूल (देवता) बनाने, तो ऐसे बाप का फिर रिगार्ड भी रखना है। ओम् शान्ति। शिव भगवानुवाच, बच्चों प्रति। शिव भगवान को सच्चा बाबा तो जरूर कहेंगे क्योंकि रचयिता है ना। अभी तुम बच्चे ही हो जिनको भगवान पढ़ाते हैं - भगवान भगवती बनाने के लिए। यह तो हर एक अच्छी रीति जानते हैं, ऐसा कोई स्टूडेन्ट होता नहीं जो अपने टीचर को, पढ़ाई को और उनकी रिजल्ट को न जानता हो। जिनको भगवान पढ़ाते हैं उनको कितनी खुशी होनी चाहिए! यह खुशी स्थाई क्यों नहीं रहती? तुम जानते हो हमको कोई देहधारी मनुष्य नहीं पढ़ाते हैं। अशरीरी बाप शरीर में प्रवेश कर खास तुम बच्चों को पढ़ाने आये हैं, यह किसको भी मालूम नहीं कि भगवान आकर पढ़ाते हैं। तुम जानते हो हम भगवान के बच्चे हैं, वह हमको पढ़ाते हैं, वही ज्ञान के सागर हैं। शिवबाबा के सम्मुख तुम बैठे हो। आत्मायें और परमात्मा अभी ही मिलते हैं, यह भूलो मत। परन्तु माया ऐसी है जो भुला देती है। नहीं तो वह नशा रहना चाहिए ना - भगवान हमको पढ़ाते हैं! उनको याद करते रहना चाहिए। परन्तु यहाँ तो ऐसे-ऐसे हैं जो बिल्कुल ही भूल जाते हैं। कुछ भी नहीं जानते। भगवान खुद कहते हैं कि बहुत बच्चे यह भूल जाते हैं, नहीं तो वह खुशी रहनी चाहिए ना। हम भगवान के बच्चे हैं, वह हमको पढ़ा रहे हैं। माया ऐसी प्रबल है जो बिल्कुल ही भुला देती है। इन आंखों से यह जो पुरानी दुनिया, मित्र-सम्बन्धी आदि देखते हो उनमें बुद्धि चली जाती है। अभी तुम बच्चों को बाप तीसरा नेत्र देते हैं। तुम शान्तिधाम-सुखधाम को याद करो। यह है दु:खधाम, छी-छी दुनिया। तुम जानते हो भारत स्वर्ग था, अभी नर्क है। बाप आकर फिर फूल बनाते हैं। वहाँ तुमको 21 जन्मों के लिए सुख मिलता है। इसके लिए ही तुम पढ़ रहे हो। परन्तु पूरा नहीं पढ़ने कारण यहाँ के धन-दौलत आदि में ही बुद्धि लटक पड़ती है। उनसे बुद्धि निकलती नहीं है। बाप कहते हैं शान्तिधाम, सुखधाम तरफ बुद्धि रखो। परन्तु बुद्धि गन्दी दुनिया तरफ एकदम जैसे चटकी हुई है। निकलती नहीं है। भल यहाँ बैठे हैं तो भी पुरानी दुनिया से बुद्धि टूटती नहीं है। अभी बाबा आया हुआ है-गुल-गुल पवित्र बनाने के लिए। तुम मुख्य पवित्रता के लिए ही कहते हो-बाबा हमको पवित्र बनाकर पवित्र दुनिया में ले जाते हैं तो ऐसे बाप का कितना रिगार्ड रखना चाहिए। ऐसे बाबा पर तो कुर्बान जायें। जो परमधाम से आकर हम बच्चों को पढ़ा रहे हैं। बच्चों पर कितनी मेहनत करते हैं। एकदम किचड़े से निकालते हैं। अभी तुम फूल बन रहे हो। जानते हो कल्प-कल्प हम ऐसे फूल (देवता) बनते हैं। मनुष्य से देवता किये करत न लागी वार। अभी हमको बाप पढ़ा रहे हैं। हम यहाँ मनुष्य से देवता बनने आये हैं। यह अभी तुमको मालूम पड़ा है, पहले यह पता नहीं था कि हम स्वर्गवासी थे। अभी बाप ने बताया है तुम राज्य करते थे फिर रावण ने राज्य लिया है। तुमने ही बहुत सुख देखे फिर 84 जन्म लेते-लेते सीढ़ी नीचे उतरते हो। यह है ही छी-छी दुनिया। कितने मनुष्य दु:खी हैं। कितने तो भूख मरते रहते हैं, कुछ भी सुख नहीं है। भल कितना भी धनवान है, तो भी यह अल्पकाल का सुख काग विष्टा समान है। इनको कहा जाता है विषय वैतरणी नदी। स्वर्ग में तो हम बहुत सुखी होंगे। अभी तुम सांवरे से गोरे बन रहे हो। अभी तुम समझते हो हम ही देवता थे फिर पुनर्जन्म लेते-लेते वेश्यालय में आकर पड़े हैं। अभी फिर तुमको शिवालय में ले जाते हैं। शिवबाबा स्वर्ग की स्थापना कर रहे हैं। तुमको पढ़ाई पढ़ा रहे हैं तो अच्छी रीति पढ़ना चाहिए ना। पढ़कर, चक्र बुद्धि में रखकर दैवीगुण धारण करने चाहिए। तुम बच्चे हो रूप-बसन्त, तुम्हारे मुख से सदा ज्ञान रत्न ही निकलें, किचड़ा नहीं। बाप भी कहते हैं मैं रूप-बसन्त हूँ... मैं परम आत्मा ज्ञान का सागर हूँ, पढ़ाई सोर्स आफ इनकम होती है। पढ़कर जब बैरिस्टर डॉक्टर आदि बनते हैं, लाखों कमाते हैं। एक-एक डॉक्टर मास में लाख रुपया कमाते हैं। खाने की भी फुर्सत नहीं रहती। तुम भी अभी पढ़ रहे हो। तुम क्या बनते हो? विश्व का मालिक। तो इस पढ़ाई का नशा होना चाहिए ना। तुम बच्चों में बातचीत करने की कितनी रॉयल्टी होनी चाहिए। तुम रॉयल बनते हो ना। राजाओं की चलन देखो कैसी होती है। बाबा तो अनुभवी है ना। राजाओं को नज़राना देते हैं, कभी ऐसे हाथ में लेंगे नहीं। अगर लेना होगा तो इशारा करेंगे-पोटरी को जाकर दो। बहुत रॉयल होते हैं। बुद्धि में यह ख्याल रहता है, इनसे लेते हैं तो इनको वापस भी देना है, नहीं तो लेंगे नहीं। कोई राजायें प्रजा से बिल्कुल लेते नहीं हैं। कोई तो बहुत लूटते हैं। राजाओं में भी फ़र्क होता है। अभी तुम सतयुगी डबल सिरताज राजाएं बनते हो। डबल ताज के लिए पवित्रता जरूर चाहिए। इस विकारी दुनिया को छोड़ना है। तुम बच्चों ने विकारों को छोड़ा है, विकारी कोई आकर बैठ न सके। अगर बिगर बताये आकर बैठ जाते हैं तो अपना ही नुकसान करते हैं। कोई चालाकी करते हैं, किसको पता थोड़ेही पड़ेगा। बाप भल देखे, न देखे, खुद ही पाप आत्मा बन पड़ते हैं। तुम भी पाप आत्मा थे। अब पुरुषार्थ से पुण्य आत्मा बनना है। तुम बच्चों को कितनी नॉलेज मिली है। इस नॉलेज से तुम कृष्णपुरी के मालिक बनते हो। बाप कितना श्रृंगारते हैं। ऊंच ते ऊंच भगवान पढ़ाते हैं तो कितना खुशी से पढ़ना चाहिए। ऐसी पढ़ाई तो कोई सौभाग्यशाली पढ़ते हैं और फिर सर्टीफिकेट भी लेना है। बाबा कहेंगे तुम पढ़ते कहाँ हो। बुद्धि भटकती रहती है। तो क्या बनेंगे! लौकिक बाप भी कहते हैं इस हालत में तो तुम नापास हो जायेंगे। कोई तो पढ़कर लाख कमाते हैं। कोई देखो तो धक्के खाते रहेंगे। तुमको फालो करना है, मदर फादर को। और जो ब्रदर्स अच्छी रीति पढ़ते पढ़ाते हैं, यही धंधा करते हैं। प्रदर्शनी में बहुतों को पढ़ाते हैं ना। आगे चल जितना दु:ख बढ़ता जायेगा उतना मनुष्यों को वैराग्य आयेगा फिर पढ़ने लग पड़ेंगे। दु:ख में भगवान को बहुत याद करेंगे। दु:ख में मरने समय हे राम, हाय भगवान करते रहते हैं ना। तुमको तो कुछ भी करना नहीं है। तुम तो खुशी से तैयारी करते हो। कहाँ यह पुराना शरीर छूटे तो हम अपने घर जायें। फिर वहाँ शरीर भी सुन्दर मिलेगा। पुरुषार्थ कर पढ़ाने वाले से भी ऊंच जाना चाहिए। ऐसे भी हैं पढ़ाने वाले से पढ़ने वाले की अवस्था बहुत अच्छी रहती है। बाप तो हर एक को जानते हैं ना। तुम बच्चे भी जान सकते हो अपने अन्दर को देखना चाहिए-हमारे में कौन-सी कमी है? माया के विघ्नों से पार जाना है, उसमें फँसना नहीं है। जो कहते हैं माया तो बड़ी जबरदस्त है, हम कैसे चल सकेंगे, अगर ऐसा सोचा तो माया एकदम कच्चा खा लेगी। गज को ग्राह ने खाया। यह अभी की बात है ना। अच्छे-अच्छे बच्चों को भी माया रूपी ग्राह एकदम हप कर लेता है। अपने को छुड़ा नहीं सकते हैं। खुद भी समझते हैं - हम माया के थप्पड़ से छूटने चाहते हैं। परन्तु माया छूटने नहीं देती है। कहते हैं बाबा माया को बोलो-ऐसे पकड़े नहीं। अरे, यह तो युद्ध का मैदान है ना। मैदान में ऐसे थोड़ेही कहेंगे इनको कहो हमको अंगूरी न लगावे। मैच में कहेंगे क्या हमको बाल नहीं देना। झट कह देंगे युद्ध के मैदान में आये हो तो लड़ो, तो माया खूब पछाड़ेगी। तुम बहुत ऊंच पद पा सकते हो। भगवान पढ़ाते हैं, कम बात है क्या! अभी तुम्हारी चढ़ती कला होती है - नम्बरवार पुरुषार्थ अनुसार। हर एक बच्चे को शौक रखना है कि हम भविष्य जीवन हीरे जैसा बनायें। विघ्नों को मिटाते जाना है। कैसे भी करके बाप से वर्सा जरूर लेना है। नहीं तो हम कल्प-कल्पान्तर फेल हो जायेंगे। समझो कोई साहूकार का बच्चा है, बाप उनको पढ़ाई में अटक (रूकावट) डालते हैं तो कहेगा हम यह लाख भी क्या करेंगे, हमको तो बेहद के बाप से विश्व की बादशाही लेनी है। यह लाख-करोड़ तो सब भस्मीभूत हो जाने वाले हैं। किनकी दबी रहेगी धूल में, किनकी जलाये आग, सारे सृष्टि रूपी भंभोर को आग लगनी है। यह सारी रावण की लंका है। तुम सब सीतायें हो। राम आया हुआ है। सारी धरती एक टापू है, इस समय है ही रावण राज्य। बाप आकर रावण राज्य को खलास कराये तुमको रामराज्य का मालिक बनाते हैं। तुमको तो अन्दर में अथाह खुशी होनी चाहिए-गाया हुआ है अतीन्द्रिय सुख पूछना हो तो बच्चों से पूछो। तुम प्रदर्शनी में अपना सुख बताते हो ना। हम भारत को स्वर्ग बना रहे हैं। श्रीमत पर भारत की सेवा कर रहे हैं। जितना-जितना श्रीमत पर चलेंगे उतना तुम श्रेष्ठ बनेंगे। तुमको मत देने वाले ढेर निकलेंगे इसलिए वह भी परखना है, सम्भालना है। कहाँ-कहाँ माया भी गुप्त प्रवेश हो जाती है। तुम विश्व के मालिक बनते हो, अन्दर में बहुत खुशी रहनी चाहिए। तुम कहते हो बाबा हम आपसे स्वर्ग का वर्सा लेने आये हैं। सत्य नारायण की कथा सुनकर हम नर से नारायण, नारी से लक्ष्मी बनेंगे। तुम सब हाथ उठाते हो बाबा हम आपसे पूरा वर्सा लेकर ही छोड़ेंगे, नहीं तो हम कल्प-कल्प गंवा देंगे। कोई भी विघ्न को हम उड़ा देंगे, इतनी बहादुरी चाहिए। तुमने इतनी बहादुरी की है ना। जिससे वर्सा मिलता है उनको थोड़ेही छोड़ेंगे। कोई तो अच्छी रीति ठहर गये, कोई फिर भागन्ती हो गये। अच्छे-अच्छे को माया खा गई। अजगर ने खाकर सारा हप कर लिया। अब बाप कहते हैं हे आत्मायें, बहुत प्यार से समझाते हैं। मैं पतित दुनिया को आकर पावन दुनिया बनाता हूँ। अब पतित दुनिया का मौत सामने खड़ा है। अब मैं तुमको राजाओं का राजा बनाता हूँ। पतित राजाओं का भी राजा। सिंगल ताज वाले राजा डबल ताज वाले राजाओं को माथा क्यों झुकाते हैं, आधाकल्प बाद जब इन्हों की वह पवित्रता उड़ जाती है, तो रावण राज्य में सब विकारी और पुजारी बन जाते हैं। तो अब बाप बच्चों को समझाते हैं-कोई ग़फलत नहीं करो। भूल न जाओ। अच्छी रीति पढ़ो। रोज़ क्लास अटेण्ड नहीं कर सकते हो तो भी बाबा सब प्रबन्ध दे सकते हैं। 7 रोज़ का कोर्स लो, जो मुरली को सहज समझ सको। कहाँ भी जाओ सिर्फ दो अक्षर याद करो। यह है महामंत्र। अपने को आत्मा समझ बाप को याद करो। कोई भी विकर्म वा पाप कर्म देह-अभिमान में आने से ही होता है। विकर्मों से बचने के लिए बुद्धि की प्रीति एक बाप से ही लगानी है। कोई देहधारी से नहीं। एक से बुद्धि का योग लगाना है। अन्त तक याद करना है तो फिर कोई विकर्म नहीं होगा। यह तो सड़ी हुई देह है। इनका अभिमान छोड़ दो। नाटक पूरा होता है, अभी हमारे 84 जन्म पूरे हुए। यह पुरानी आत्मा पुराना शरीर है। अब तमोप्रधान से सतोप्रधान बनना है फिर शरीर भी सतोप्रधान मिल जायेगा। आत्मा को सतोप्रधान बनाना है-यही तात लगी रहे। बाप सिर्फ कहते हैं मामेकम् याद करो। बस यही ओना रखो। तुम भी कहते हो ना-बाबा हम पास होकर दिखायेंगे। क्लास में जानते हैं सबको स्कॉलरशिप तो नहीं मिलेगी। फिर भी पुरुषार्थ तो बहुत करते हैं ना। तुम भी समझते हो हमको नर से नारायण बनने का पूरा पुरुषार्थ करना है। कम क्यों करें। कोई भी बात की परवाह नहीं। वारियर्स कभी परवाह नहीं करते हैं। कोई कहते हैं बाबा बहुत तूफान, स्वप्न आदि आते हैं। यह तो सब होगा। तुम एक बाप को याद करते रहो। इन दुश्मन पर जीत पानी है। कोई समय ऐसे-ऐसे स्वप्न आयेंगे न मन, न चित, ऐसे-ऐसे घुटके आयेंगे। यह सब माया है। हम माया को जीतते हैं। आधा-कल्प के लिए दुश्मन से राज्य लेते हैं, हमको कोई परवाह नहीं। बहादुर कभी चूँ-चाँ नहीं करते। लड़ाई में खुशी से जाते हैं। तुम तो यहाँ बड़े आराम से बाप से वर्सा लेते हो। यह छी-छी शरीर छोड़ना है। अब जाते हैं स्वीट साइलेन्स होम। बाप कहते हैं मैं आया हूँ, तुमको ले चलने। मुझे याद करो तो पावन बनेंगे। इमप्योर आत्मा जा न सके। यह हैं नई बातें। अच्छा! मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते। धारणा के लिए मुख्य सार:- 1) विकर्मों से बचने के लिए बुद्धि की प्रीत एक बाप से लगानी है, इस सड़ी हुई देह का अभिमान छोड़ देना है। 2) हम वारियर्स हैं, इस स्मृति से माया रूपी दुश्मन पर विजय प्राप्त करनी है, उसकी परवाह नहीं करनी है। माया गुप्त रूप में बहुत प्रवेश करती है इसलिए उसे परखना और सम्भलना है। वरदान:- ज्ञान कलष धारण कर प्यासों की प्यास बुझाने वाले अमृत कलषधारी भव l अभी मैजारिटी आत्मायें प्रकृति के अल्पकाल के साधनों से, आत्मिक शान्ति प्राप्त करने के लिए बने हुए अल्पज्ञ स्थानों से, परमात्म मिलन मनाने के ठेकेदारों से थक गये हैं, निराश हो गये हैं, समझते हैं सत्य कुछ और है, प्राप्ति के प्यासे हैं। ऐसी प्यासी आत्माओं को आत्मिक परिचय, परमात्म परिचय की यथार्थ बूँद भी तृप्त आत्मा बना देगी इसलिए ज्ञान कलष धारण कर प्यासों की प्यास बुझाओ। अमृत कलष सदा साथ रहे। अमर बनो और अमर बनाओ। स्लोगन:- एडॅजेस्ट होने की कला को लक्ष्य बना लो तो सहज सम्पूर्ण बन जायेंगे। ------------------- Main Page: Daily Gyan Murli (official Audio) Online Services RESOURCES -Audio,Video,PDF . #AajkiMurli #bkmurlitoday #Murli #brahmakumari #Hindi #brahmakumaris
- BK Murli - 8 June 2020 | आज की मुरली | Brahma Kumaris
08-06-2020 Aaj ki Murli. Official Murli blog. मुरली ओम् शान्ति मधुबन. Read or Listen Murli (audio) "मीठे बच्चे- तुम्हें अब ज्ञान का तीसरा नेत्र मिला है, इसलिए अब तुम्हारी आंख किसी में भी डूबनी नहीं चाहिए'' प्रश्नः- जिन्हें पुरानी दुनिया से बेहद का वैराग्य होगा, उनकी निशानी क्या होगी? उत्तर:- वो अपना सब कुछ बाप को अर्पण कर देंगे, हमारा कुछ भी नहीं। बाबा हमारी यह देह भी नहीं है, यह तो पुरानी देह है, इनको भी छोड़ना है। उनका मोह सबसे टूटता जायेगा, नष्टोमोहा होंगे। उनकी बुद्धि में रहता कि यहाँ का कुछ भी काम नहीं आना है, क्योंकि यह सब हद का है। ओम् शान्ति। बाप बच्चों को ब्रह्माण्ड और सृष्टि चक्र के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान सुना रहे हैं। जो और कोई भी सुना नहीं सकते। एक गीता ही है, जिसमें राजयोग का वर्णन है, भगवान आकर नर से नारायण बनाते हैं। यह सिवाए गीता के और कोई शास्त्र में नहीं है। यह भी बाप ने बतलाया है, कहते हैं मैंने तुमको राजयोग सिखाया था। यह समझाया था कि यह ज्ञान कोई परम्परा नहीं चलता है। बाप आकर एक धर्म की स्थापना करते हैं। बाकी और सब धर्म विनाश हो जाते हैं। कोई भी शास्त्र आदि परम्परा नहीं चलते। और जो धर्म स्थापन करने आते हैं उस समय कोई विनाश नहीं होता है, जो सब खलास हो जाएं। भक्ति-मार्ग के शास्त्र पढ़ते ही आते हैं, इनका (ब्राह्मण धर्म का) भल शास्त्र है गीता, परन्तु वह भी भक्ति मार्ग में ही बनाते हैं क्योंकि सतयुग में तो कोई शास्त्र रहता ही नहीं और धर्मों के समय विनाश तो होता ही नहीं। पुरानी दुनिया खत्म होती नहीं जो फिर नई हो। वही चलती आती है। अभी तुम बच्चे समझते हो यह पुरानी दुनिया खत्म होनी है। हमको बाप पढ़ा रहे हैं। गायन भी एक गीता का ही है। गीता जयन्ती भी मनाते हैं। वेद जयन्ती तो है नहीं। भगवान एक है, तो एक की ही जयन्ती मनानी चाहिए। बाकी है रचना, उनसे कुछ मिल नहीं सकता। वर्सा बाप से ही मिलता है। चाचा, काका आदि से कोई वर्सा नहीं मिलता। अभी यह है तुम्हारा बेहद का बाप, बेहद का ज्ञान देने वाला। यह कोई शास्त्र नहीं सुनाते हैं। कहते हैं यह सब भक्ति मार्ग के हैं। इन सबका सार तुमको समझाता हूँ। शास्त्र कोई पढ़ाई नहीं। पढ़ाई से तो पद प्राप्त होता है, यह पढ़ाई बाप पढ़ा रहे हैं बच्चों को। भगवानुवाच बच्चों प्रति-फिर 5 हज़ार वर्ष बाद भी ऐसे ही होगा। बच्चे जानते हैं हम बाप से रचता और रचना के आदि-मध्य-अन्त को जान गये हैं। यह कोई और तो समझा न सके सिवाए बाप के। इस मुख कमल से सुनाते हैं। यह भगवान का लोन लिया हुआ मुख है ना, जिसको गऊमुख भी कहते हैं। बड़ी माता है ना। इनके मुख से ज्ञान के वर्शन्स निकलते हैं, न कि जल आदि। भक्ति मार्ग में फिर गऊमुख से जल दिखा दिया है। अभी तुम बच्चे समझते हो भक्ति मार्ग में क्या-क्या करते हैं। कितना दूर गऊमुख आदि पर जाते हैं पानी पीने। अभी तुम मनुष्य से देवता बन रहे हो। यह तो जानते हो-बाप कल्प-कल्प आकर मनुष्य से देवता बनाने के लिये पढ़ाते हैं। देखते हो कैसे पढ़ा रहे हैं। तुम सबको यह बतलाते हो-भगवान हमें पढ़ा रहे हैं। कहते हैं मामेकम् याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश हो जाएं। तुम जानते हो सतयुग में थोड़े मनुष्य होते हैं। कलियुग में कितने ढेर मनुष्य हैं। बाप आकरके आदि सनातन देवी-देवता धर्म की स्थापना कर रहे हैं। हम मनुष्य से देवता बन रहे हैं। मनुष्य से देवता बनने वाले बच्चों में दैवीगुण दिखाई देंगे। उनमें क्रोध का अंश भी नहीं होगा। अगर कभी क्रोध आ गया तो झट बाप को लिखेंगे, बाबा आज हमसे यह भूल हो गई। हमने क्रोध कर लिया, विकर्म कर लिया। बाप से तुम्हारा कितना कनेक्शन है। बाबा क्षमा करना। बाप कहेंगे क्षमा आदि होती नहीं। बाकी आगे के लिए ऐसी भूल नहीं करना। टीचर कोई क्षमा नहीं करते हैं। रजिस्टर दिखाते हैं-तुम्हारे मैनर्स अच्छे नहीं हैं। बेहद का बाप भी कहते हैं-तुम अपने मैनर्स देख रहे हो। रोज़ अपना पोतामेल देखो, किसको दु:ख तो नहीं दिया, किसको तंग तो नहीं किया? दैवीगुण धारण करने में टाइम तो लगता है ना। देह-अभिमान बड़ा ही मुश्किल से टूटता है। जब अपने को देही समझें तब बाप में भी लव जाए। नहीं तो देह के कर्मबन्धन में ही बुद्धि लटकी रहती है। बाप कहते हैं तुमको शरीर निर्वाह अर्थ कर्म भी करना है, उनसे टाइम निकाल सकते हो। भक्ति के लिए भी टाइम निकालते हैं ना। मीरा कृष्ण की ही याद में रहती थी ना। पुनर्जन्म तो यहाँ ही लेती गई। अभी तुम बच्चों को इस पुरानी दुनिया से वैराग्य आता है। जानते हैं इस पुरानी दुनिया में फिर पुनर्जन्म लेना ही नहीं है। दुनिया ही खत्म हो जाती है। यह सब बातें तुम्हारी बुद्धि में हैं। जैसे बाबा में ज्ञान है वैसे बच्चों में भी है। यह सृष्टि का चक्र और कोई की बुद्धि में नहीं है। तुम्हारे में भी नम्बरवार हैं, जिनकी बुद्धि में यह रहता है ऊंच ते ऊंच पतित-पावन बाप है, वह हमको पढ़ाते हैं। यह भी तुम ही जानते हो। तुम्हारी बुद्धि में सारा 84 का चक्र है। स्मृति रहती है-अभी इस नर्क में यह अन्तिम जन्म है, इनको कहा जाता है रौरव नर्क। बहुत गंद है, इसलिए सन्यासी लोग घरबार छोड़ जाते हैं। वह हो जाती है शारीरिक बात। तुम सन्यास करते हो बुद्धि से क्योंकि तुम जानते हो हमको अभी वापिस जाना है। सबको भूलना पड़ता है। यह पुरानी छी-छी दुनिया खत्म हुई पड़ी है। मकान पुराना होता है, नया बनकर तैयार होता है तो दिल में आता है ना-यह मकान टूट ही जायेगा। अभी तुम बच्चे पढ़ रहे हो ना। जानते हो नई दुनिया की स्थापना हो रही है। अभी थोड़ी देरी है। बहुत बच्चे आकर पढ़ेंगे। नया मकान अभी बन रहा है, पुराना टूटता जा रहा है। बाकी थोड़े दिन है। तुम्हारी बुद्धि में यह बेहद की बातें हैं। अब हमारी इस पुरानी दुनिया से दिल नहीं लगती है। यह कुछ भी आखिर काम में नहीं आना है, हम यहाँ से जाना चाहते हैं। बाप भी कहते हैं पुरानी दुनिया से दिल नहीं लगानी है। मुझ बाप को और घर को याद करो तो विकर्म विनाश हों। नहीं तो बहुत सज़ायें खायेंगे। पद भी भ्रष्ट हो जायेगा। आत्मा को फुरना लगा हुआ है हमने 84 जन्म भोगे हैं। अब बाप को याद करना है, तब विकर्म विनाश होंगे। बाप की मत पर चलना है तब ही श्रेष्ठ जीवन बनेगी। बाप है ऊंच ते ऊंच। यह भी तुम ही जानते हो। बाप अच्छी रीति स्मृति दिलाते हैं, वह बेहद का बाप ही ज्ञान का सागर है, वही आकर पढ़ाते हैं। बाप कहते हैं यह पढ़ाई भी पढ़ो, शरीर निर्वाह अर्थ भी सब कुछ करो। परन्तु ट्रस्टी होकर रहो। जिन बच्चों को पुरानी दुनिया से बेहद का वैराग्य होगा वह अपना सब कुछ बाप को अर्पण कर देंगे। हमारा कुछ भी नहीं। बाबा हमारी यह देह भी नहीं है। यह तो पुरानी देह है, इनको भी छोड़ना है, सबसे मोह टूटता जाता है। नष्टोमोहा हो जाना है। यह है बेहद का वैराग्य। वह हद का वैराग्य होता है। बुद्धि में है हम स्वर्ग में जाकर अपने महल बनायेंगे। यहाँ का कुछ भी काम नहीं आयेगा क्योंकि यह सब हद का है। तुम अभी हद से निकल बेहद में जाते हो। तुम्हारी बुद्धि में यह बेहद का ज्ञान ही रहना चाहिए। अभी और कोई में भी आंख नहीं डूबती है। अब तो अपने घर जाना है। कल्प-कल्प बाप आकर हमको पढ़ाए फिर साथ ले जाते हैं। तुम्हारे लिए यह कोई नई पढ़ाई नहीं है। तुम जानते हो कल्प-कल्प हम पढ़ते हैं। तुम्हारे में भी नम्बरवार हैं। सारी दुनिया में कितने ढेर मनुष्य हैं, परन्तु तुम थोड़ेही जानते हो, आहिस्ते-आहिस्ते यह ब्राह्मणों का झाड़ वृद्धि को पाता रहता है। ड्रामा प्लैन अनुसार स्थापना होनी ही है। बच्चे जानते हैं हमारी रूहानी गवर्मेंन्ट है। हम दिव्य दृष्टि से नई दुनिया को देखते हैं। वहाँ ही जाना है। भगवान भी एक है, वही पढ़ाने वाला है, राजयोग बाप ने ही सिखलाया था। उस समय लड़ाई भी बरोबर लगी थी अनेक धर्मों का विनाश, एक धर्म की स्थापना हुई थी। तुम भी वही हो, कल्प-कल्प तुम ही पढ़ते आये हो, वर्सा लेते आये हो। पुरूषार्थ हर एक को अपना करना है। यह है बेहद की पढ़ाई। यह शिक्षा कोई मनुष्य मात्र दे न सके। बाप ने श्याम और सुन्दर का भी राज़ समझाया है। तुम भी समझते हो अभी हम सुन्दर बन रहे हैं। पहले श्याम थे। कृष्ण कोई अकेला थोड़ेही था। सारी राजधानी थी ना। अभी तुम समझते हो हम नर्कवासी से स्वर्गवासी बन रहे हैं। अभी तुमको इस नर्क से ऩफरत आती है। तुम अभी पुरूषोत्तम संगमयुग पर आ गये हो। इतने ढेर आते हैं, इनसे निकलेंगे फिर भी वही जो कल्प पहले निकले होंगे। संगमयुग को भी अच्छी रीति याद करना है। हम पुरूषोत्तम अर्थात् मनुष्य से देवता बन रहे हैं। मनुष्य तो यह भी नहीं समझते कि नर्क क्या है और स्वर्ग क्या है? कहते हैं सब कुछ यहाँ ही है, जो सुखी हैं वह स्वर्ग में हैं, जो दु:खी हैं वह नर्क में हैं। अनेक मत हैं ना। एक घर में भी अनेक मतें हो जाती हैं। बच्चों आदि में मोह की रग है, वह टूटती नहीं। मोहवश कुछ समझते थोड़ेही हैं कि हम कैसे रहते हैं। पूछते हैं बच्चे की शादी करायें? परन्तु बच्चों को यह भी लॉ (नियम) समझाया जाता है कि तुम स्वर्गवासी होने के लिए एक तरफ नॉलेज ले रहे हो, दूसरे तरफ पूछते हो उनको नर्क में डालें? पूछते हो तो बाबा कहेंगे जाकर करो। बाबा से पूछते हैं तो बाबा समझाते हैं इनका मोह है। अब ना करेंगे तो भी अवज्ञा कर देंगे। बच्ची की तो करानी ही है, नहीं तो संगदोष में खराब हो जाती है। बच्चों को नहीं करा सकते। परन्तु हिम्मत चाहिए ना! बाबा ने इनसे एक्ट कराया ना। इनको देखकर फिर और करने लग पड़े। घर में भी बहुत झगड़े लग पड़ते हैं। यह है ही झगड़ों की दुनिया, कांटों का जंगल है ना। एक-दो को काटते रहते हैं। स्वर्ग को कहा जाता है गार्डन। यह है जंगल। बाप आकर कांटों से फूल बनाते हैं। कोई विरले निकलते हैं, प्रदर्शनी में भल हाँ हाँ करते हैं परन्तु समझते कुछ भी नहीं। एक कान से सुनते हैं और दूसरे कान से निकाल देते हैं। राजधानी स्थापन करने में टाइम तो लगता है ना। मनुष्य अपने को कांटा समझते थोड़ेही हैं। इस समय सूरत मनुष्य की भल है परन्तु सीरत बन्दर से भी बदतर है। परन्तु अपने को ऐसा समझते नहीं हैं तो बाप कहते हैं अपनी रचना को समझाना है। अगर नहीं समझते हैं तो फिर भगा देना चाहिए। परन्तु वह ताकत चाहिए ना। मोह का कीड़ा ऐसा लगा रहता है जो निकल न सके। यहाँ तो नष्टोमोहा बनना है। मेरा तो एक दूसरा न कोई। अब बाप आया है, लेने के लिए। पावन बनना है। नहीं तो बहुत सज़ा खायेंगे, पद भी भ्रष्ट हो जायेगा। अब अपने को सतोप्रधान बनाने का ही फुरना लगा हुआ है। शिव के मन्दिर में जाकर तुम समझा सकते हो-भगवान ने भारत को स्वर्ग का मालिक बनाया था, अब वह फिर से बना रहे हैं, कहते हैं सिर्फ मामेकम् याद करो। अच्छा! मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते। ★ धारणा के लिए मुख्य सार:- 1) इस पुरानी दुनिया से बेहद का वैरागी बन अपना सब कुछ अर्पण कर देना है। हमारा कुछ भी नहीं, यह देह भी हमारी नहीं। इनसे मोह तोड़ नष्टोमोहा बनना है। 2) कभी भी ऐसी कोई भूल नहीं करनी है जो रजिस्टर पर दाग़ लग जाए। सर्व दैवीगुण धारण करने हैं, अन्दर क्रोध का ज़रा भी अंश न हो। ✿ वरदान:- डबल लाइट बन सर्व समस्याओं को हाई जम्प दे पार करने वाले तीव्र पुरूषार्थी भव! सदा स्वयं को अमूल्य रत्न समझ बापदादा के दिल की डिब्बी में रहो अर्थात् सदा बाप की याद में समाये रहो तो किसी भी बात में मुश्किल का अनुभव नहीं करेंगे, सब बोझ समाप्त हो जायेंगे। इसी सहजयोग से डबल लाइट बन, पुरूषार्थ में हाई जम्प देकर तीव्र पुरूषार्थी बन जायेंगे। जब भी कोई मुश्किल का अनुभव हो तो बाप के सामने बैठ जाओ और बापदादा के वरदानों का हाथ स्वयं पर अनुभव करो इससे सेकण्ड में सर्व समस्याओं का हल मिल जायेगा। ✤ स्लोगन:- सहयोग की शक्ति असम्भव बात को भी सम्भव बना देती है, यही सेफ्टी का किला है. ------------------- Main Page: Daily Gyan Murli Online Services RESOURCES -Audio,Video,PDF . #Murli #Hindi #brahmakumaris #brahmakumari #bkmurlitoday #AajkiMurli
- LIVE Seminar of BK Shivani and BK Jayanti - Healing the World - 19 April 2020
IMPORTANT. Writing to all dear BK brothers and sisters, Brahman souls, Shiv Baba's direct children and lucky stars of world, that from today (Sunday, 19th April 2020), till the first week on May, we have organised a LIVE seminar where BK seniors will give an online class for 30 minutes or so on a specified topic; and then we will have powerful Yog (meditation) for another 30 minutes. ✱ Purpose ✱ These classes will be specially for the present time condition and to remind Brahman souls that it is our prime duty to send peaceful and powerful healing vibrations to our brothers and sister who are some or other way suffering either from a disease like Coronavirus (COVID-19) or by mental disturbance or by a family or a financial situation. ✤ WHEN and WHERE? ✤ The online seminar will be shown LIVE on Awakening TV channel at the below given time: BK Shivani's Live seminar ➜ Sunday, 4 pm (Indian time) BK Jayanti's Live seminar ➜ Sunday, 9 pm (Indian time) (To stay updated and receive regular sustenance, join our WhatsApp group) ✿ PLEASE SHARE this post to BKs in your connection. ✿ Note ➜ We will continue to add main points from everyday classes and seminars being held online, so that all of you can not only listen or learn but also can experience and make other souls to experience God's unlimited treasure of peace, purity, love, joy and powers. ✪ BK Sister Shivani and BK Sister Jayanti will start the day 1 of these online seminars, starting from 20th April 2020 ✪ Come join us in giving Sakaash of light and might to heal our brother souls from pain, sorrow and grief and take them towards the light of love, peace and joy. *** Main Points from Today's seminar *** Coming soon (visit later) ✣✣✣ Useful links ✣✣✣ How to Give 'Sakash'? All BK Articles - Hindi and English Peace of Mind TV live Daily Gyan Murli (official page) SITEMAP - Everything at One place BK Google - Search engine for BKs . #brahmakumaris #brahmakumari
- Message from Gulzar Dadi's Centre by BK Sunita
Here is a snippet and Full message (in PDF), a message from Mumbai's Gamdevi centre (where Dadi Gulzar is staying) written by BK Sister Sunita. Message in Hindi and English, also in PDF to print. MUST read this important and useful message. Then SHARE this post or PDF to BrahmaKumari and BrahmaKumar in your contact. Also read: Shiv Baba's Message यह विशेष सन्देश मुंबई के गामदेवी सेवा केंद्र से आया है, जहा गुलज़ार दादी रेहती है। लिखा है ब्रह्माकुमारी सुनीता बहन ने। इसे जरूर पढ़े। इसका FULL version आपको PDF में मिलेंगे। यह post को सभी ब्रह्माकुमारी व ब्रह्माकुमार को जरूर SHARE करे। This is the message describing some news, a part of Dadi Gulzar stage, news of Gamdevi center. Thanks Baba for everything ~ BK Sister Sunita ➜ Only that soul can do subtle service which has packed up everything from external way. So we also get a deep realization. At that time, we used to just talk, let us also pack up like this. But today, Baba has given all of us Brahmins the golden opportunity that can we all pack up and sit in this manner? Pack up and sit in this manner, meditate in such a way that we are able spend more time with Baba in the subtle world. We cooperate with Baba in the service of the subtle world. The time is now giving us this message. Baba also wants this, even now Baba said in today's sakar murli, child, now the bombs will explode, there will be earthquakes, then military will also come. Baba has told the Lashkar will also come, there will be a blood bath now. This is the type of time that will come. In such a time, we Baba's children will see our Hero roles emerged. We have to play our hero part because in such a time, we Baba's children will be the ones who will be able to give the last and final Sakash. We also think sometimes why Baba has kept His chariot here only. Today there is the unlimited home, but Baba's chariot is housed in such a small place, and Dadi is sitting as an embodiment of penance. Now we will tell you another experience that we've had with Dadi Gulzar. When Baba milan happens, Gulzar dadiji sits before the TV screen through the entire Baba milan. Dadi while sitting here gives sakash to all Baba's children who come for Baba milan there. Sometimes, she says... ➜ To continue to read the entire message, visit PDF version (Full letter) ✻✻✻✻✻✻✻✻✻✻✻✻ यें गामदेवी सेंटर,मुम्बई, से दादी गुलज़ार की स्थिति, एवं संवाद का अवशिष्टांश हैं। शुक्रिया बाबा सबकुछ के लिए। ~ सुनीता बहिन ➜ सूक्ष्म सेवा सिर्फ वहीं आत्माएं कर सकती है जिसकी अपनी मन बुद्धि को बाह्य जगत से सम्पूर्ण रीति समेट लिया हो। तो यह भी एक गहरी समझ हमें मिलती है। उस समय पर हम सिर्फ कहनेमात्र कहते थे कि हमें भी ऐसी उपराम हो जाना चाहिए। लेकिन आज बाबा ने हम सब ब्राह्मण बच्चों को स्वर्णिम सौभाग्य प्रदान कियें है- क्या हम सभी इस तरह उपराम होकर इस बैठ सकते है? बाह्य जगत से मन बुद्धि को समेटलो और इस स्थिति में बैठ जाओ,ऐसी योग लगाओ ताकि अधिक से अधिक समय बाबा के साथ सूक्ष्म वतन में बितां सको। अभी का समय हमें यहीं संदेश दे रहा है। बाबा भी यहीं चाहता है, यह तक की आज की साकार मुरली में भी बाबा ने कहा है बच्चे,अभी तो बॉम्बस गिरने वाले हैं, भूकम्प आने वाली है, उसके बाद घोर लड़ाई भी लगने वाली है। बाबा ने बताया,लस्कर आदि भी आयेंगे, खुंन की नदियां बह रही होंगी। यह समय भी आयेगा। उस समय पर हम बाबा के बच्चे अपने हीरो पार्ट इमर्ज होते हुए देखेंगे। इस समय पर हमें अपनी हीरो पार्ट बजाना है क्यूंकि उस समय पर सिर्फ हम बाबा के बच्चे ही अंतिम एवं सर्वोच्च सकाश दे पाएंगे। हम कईं बार ये भी सोचते है की बाबा अपने रथ को(दादी गुलज़ार) को यहां पे ही क्यूं रखें हैं? आज के समय में अनगिनत गृह निर्माण होने के बावजूद भी बाबा के रथ कितनी छोटी सी जगह में रह रही है और दादी जी एक तपस्वीमूर्त की तरह बैठी हुई हैं। अब हम दादी जी के साथ हमारा और एक अनुभव आपके साथ बांटने जा रहे है। जब बाबा मिलन चलता है उस पूरे समय के दौरान दादीजी टीवी स्क्रीन के सामने बैठी रहती हैं। यहां बैठे हुए दादीजी उस हर एक बच्चे को साकश देती है जो वहां बाबा मिलन मनाने पहुंचते हैं। कभी कभी व बोलती हैं, की... ➜ पूरा सन्देश पढ़ने लिए, PDF version (Hindi letter) पर जाये। Useful links General Articles ~ Hindi and English Dadi Gulzar Biography गुलज़ार दादी की जीवनी PDF section (everything in PDF) Online Services Explore the Sitemap (Everything at 1 place) . #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi #english
- Dadi Janki's NEWS - 27 March 2020
Namaste to all who are reading this news. Beloved Rajyogini Dadi Janki ji has left her corporeal body (2:10 am in the morning of 27th March, 2020) and reached baba to play a part in the subtle world (Sukshma vatan) to give Sakaash to the world souls and to help bring our new satyugi world... Dadi spent the last few days in the Global hospital in Mount Abu. She left the body in the morning Amritvela time while the body was suffering with difficulty in respiration and digestion. Dadi Ji, a great soul of Baba's Yagya has taught us unnumberable lessons of life. As baba says, "There is nothing to be sad or shed tears." We all are Godly children who know that the 'soul' is immortal. 'I am a Soul'. I the soul will play my part using this body, and then it is time to leave to play another part at another place with another body. Dadi has become Avyakt (imperson) just as many souls in yagya already are playing their part in the ''Advance Party'' to transform the old world. Baba has sent the message with Bhog sandesh of 27-03-2020 (Friday). Full video of this ''bhog sandesh'' is on this blog post. ✿ A request to all of you ✿ ➜ We request everyone at our BK centres and those who know Dadi ji personally to sit for Yog for 1 hour specially for Dadi's soul who can feel our vibrations of love... We all give our regards and blessings to this special soul of Shiv baba's Yagya. This is a signal of time, that the time for Purusharth is also coming to an end... Our new world is just about to come... ------------------------- ✦Please read ➜ The official letter from Madhuban (Hindi) after Dadi leaves body. Dated: 27-03-2020 Notice: Please do not phone to madhuban or do not come out of your homes as per government's guidelines for the present time. -------------------------------- 1. Janki dadi once said - ''I do not want anyone to spend yagya's money on me for any reason.'' Today, we observed how Baba granted her even this small wish. Today, it is made impossible to come out of home or gather people for funeral. This also saved yagya's money. 2. Dadi lived a great life full of sacrifice, unconditional love and service to humanity, giving the message of God to souls of all religions living around the globe. Those who were close to Janki dadi knows that how she served everyone tirelessly. We welcome you to know about Dadi's life story (journey) on our official Biography page -> Dadi Janki's Biography in English or दादी जानकी की जीवनी (Hindi Bio) 3. Dadi's funeral has taken place around . You can watch the 'funeral video' given on this blog post. ✤✤ IMPORTANT VIDEOS - DADI JANKI JI ✤✤ 1. Experiences with Dadi Janki | BK Jayanti | March 2020 2. 'Bhog Sandesh' on Dadi Janki's arrival in Avyakt Vatan (Sandeshi : Sister Sashi behn) 3. Dadi Janki's funeral video released by 'Brahma Kumaris' channel OR watch short Funeral Video -> https://www.youtube.com/watch?v=_oBX875KQ_8 ✱✱✱ Useful links ✱✱✱ Awakening TV Live RESOURCES (Everything at 1 place) Daily Murli Chintan (Hindi) - BK Suraj bhai BK Google - Our 'search engine' . #brahmakumaris #brahmakumari #english
- HOLI - Spiritual Meaning and Significance
This article is to shed light on the spiritual significance behind celebrating HOLI (festival of colours). What are the three meanings of the word 'Holi'? How to celebrate Holi in the true sense? And the divine message of God's arrival. Visit General articles to access our all Articles in Hindi and English. Please SHARE this article with your near & dear ones. To print or download this article, visit the PDF version. To access the Hindi version of our Holi article, visit होली का महत्त्व India is a land of festivals, in which the festival of Holi has a special place in our hearts. We all celebrate Holi with great joy, do Holika Dahan & colour each other with a lot of love… Have we been celebrating this festival in this way just like that or is there a deeper secret hidden behind it? ➔ In fact, all our festivals are closely related to our own journey of life, they are memories of our divine transformation! India’s rich culture consists of 33 crore deities, and all our festivals are related to the deities in one way or the other. We also know that there was a time when India used to be a Golden Sparrow, the time/era which we call Paradise/Heaven/Satyuga, and at the same time, there were 33 crore deities on this land of India. Do we know where those deities are now?? ➔ Change is the only constant in life! Golden Age - Silver Age - Copper Age - Iron Age (Satyuga - Tretayuga - Dwaparyuga - Kaliyug) while passing through the ages, life after life, we souls drifted away from our divinity and became ordinary human beings from deities. Once who used to be embodiments of Purity, Peace, Love, Happiness & Prosperity, started falling into 5 vices (lust, anger, greed, attachment, ego), and started experiencing sorrow (Shokvatika / Kaliyug / World of Sorrow). But after every dark night the sun rises again and a beautiful day shines! Transforming this world from Iron Age and establishing Golden Age again on this earth is not a task of an ordinary soul. And that is why in the present time, at the end of the cycle the incorporeal God Shiva Himself appears on this earth to re-establish Heaven for us! From the beginning of His divine incarnation to the beginning of the Golden Age is called Confluence Age/Sangam Yug which is of about 100 years. (Yes, God has descended!). All our festivals are memorable of this Sangam Yug when we make our life pure & blissful by directly connecting to the Supreme Being and become the masters of Heaven again! Refer to: World Drama Cycle. ✿ Holy - पवित्रता ✿ Lust has been called our 'greatest enemy'. We have lost our beloved Paradise by falling in lust (which is also mentioned in The Holy Bible - “They ate the forbidden fruit & lost Paradise.”) It is only by conquering our vices that the world transforms & Heaven establishes. When we change, the world changes. God reminds us of our innate qualities, in which Purity is the main. Purity is the mother of happiness and peace, the key to all attainments. The true meaning of purity is not just celibacy, but becoming pure in thoughts-words-actions. When we receive His divine message (refer: Shiv Baba's Message), observe Purity in life & emerge our divine qualities, Heaven comes on this earth. The festival of Holi is our memorable of becoming Holy & imbibing Purity in practical life! ✼ Ho li... - Past is Past... ✼ A lot of things come up in our lifetime... Many years go by, but we say - "This will never be forgotten"... And we keep holding onto it for years although we also know that it harms our mental well-being, physical health, and relationships. God reminds us that we are all children of Him, brothers among ourselves, & the whole world is one family. Whatever has happened in the past, put a fullstop and move ahead with life waiting to give you a greater gift... ★ Ho li... - I Belong ★ "तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो... " - The time has come to live what we have been reciting in our prayers! A Father, Mother, Friend, Teacher, Life Partner - We surely have experienced all these beautiful relationships with Him once, and that’s why we all had been calling out to Him to come again & make us experience it! In fact, our true & eternal relationship is with that One (God) only. We had been looking for Him for ages... and now when He has arrived, we merge ourselves in love with our long lost and now found beloved father, and enjoy the super-sensuous bliss of his presence… HO-LI means "I belong to Him" or as we will say in Hindi: "मैं आत्मा परमात्मा की हो ली"… Surrendering to God means - Following His Shrimat (the Highest’s opinion) for the welfare of ourselves & the world. ✲Spiritual Significance of HOLI in essence ➔ As it is said - "जैसा संग वैसा रंग". By staying in God’s company we become like Him - we start becoming enrich of purity, of peace, of love, and fill the self with his light & might... and then we also apply these divine colours of purity, peace, love and joy to others, to all those who come in our company. This is why the world applies colours to each other to celebrate Holi. It is merely a remembrance of this time when God the Supreme Soul applied the colours of all virtues and powers to all of us souls (children). ➔ Staying in constant remembrance of the Supreme Being is called Yoga-fire, which destroys the sins of our many many births, the soul becomes free from all vices and thus become pure. In memory of this yoga-fire, people light up fire on the festival of Holi. Holi comes first and then Dhuleti (colouring each other) is celebrated - that is, only by burning our 5 vices we can truly rejoice in the colours of bliss and spiritual powers. (video) BK Suraj sharing the secret of HOLI festival --- Samadhan episode --- (video 2) Holi celebration with meaning ➔ https://youtu.be/jdymW55qQAM Useful links General Articles - Hindi & English Introduction of GOD - Shiv Baba What is Raja Yog meditation? 7 Virtues of Soul BK Google ~Search engine for BKs . #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi
- होली का आध्यात्मिक रहस्य (Holi Festival)
इस लेख में आपको होली मनाने का आध्यात्मिक महत्त्व समझाया जायेगा। होली के क्या क्या अर्थ है? सच्चे अर्थ सहित होली कैसे मनाये? और परमपिता परमात्मा का अगवन सन्देश। Visit General articles to access our all Articles in Hindi and English. ➤Please SHARE this article to your relatives. (इस लेख को अपने परिवार मित्र आदि को भी SHARE करे). ➤To print or download this article, visit the HOLI - PDF version. ➤To read the English version of this article, visit Significance of Holi. ➔ भारत त्योहारों की भूमि है, जिसमें होली के त्यौहार का एक विशेष महत्त्व है। होली का त्यौहार हम सभी बड़ी ख़ुशी के साथ मनाते है, होलिका दहन करतें है, एकदूसरें को बड़े प्यार से रंग लगाते है... क्या हम ऐसे ही इस त्यौहार को इस रीति से मनाते आए है या इसके पीछे कोई महीन रहस्य छिपा हुआ है? ➔ वास्तव में हमारे सभी त्यौहार हमारी अपनी जीवन-यात्रा से जुड़े है, वे हमारे ही दिव्य-परिवर्तन की यादगार है! भारत में ३३ कोटि देवी-देवताओं का गायन है, और सभी त्यौहार किसी न किसी रूप से देवी-देवताओं से संबंधित है। हम यह भी जानते है कि एक समय था जब भारत सोने की चिड़िया हुआ करता था, जिसे हम स्वर्ग / सतयुग कहते है, और इसी समय / युग में इसी धरा पर (भारत में) ३३ करोड़ देवी-देवताएं थे। क्या हम जानते है वे देवी-देवतायें अभी कहाँ है? ➔ सृष्टि चक्र का नियम ही है - युग परिवर्तन! सतयुग - त्रेतायुग - द्वापरयुग - कलियुग से गुज़रते हुए हम आत्माएं अपनी दिव्यता से दूर होते गए और देवता से साधारण मनुष्य बन गए। पवित्रता, शांति, प्रेम, सुख, समृद्धि जिसके हम अधिकारी हुआ करते थे, ५ विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार) में गिरने से शोकवाटिका (कलियुग / दुखों की दुनिया / नर्क) में आ गए। लेकिन अति के बाद अंत और घोर रात्रि के बाद नया सवेरा सुनिश्चित है। इस घोर कलियुग के बाद सतयुग लाना किसी भी साधारण आत्मा का काम नहीं है, और इसी लिए ऐसे समय में, कल्प के अंत में (कल्प में एक बार ही) निराकार परमात्मा शिव स्वयं इस धरा पर अवतरित होते है सतयुग की स्थापना के लिए! परमात्म अवतरण समय से लेकर सतयुग की शुरुआत के समय को संगमयुग कहते है। (परमात्मा का अवतरण हो चुका है।) हमारे सभी त्यौहार वर्तमान समय की यादगार है जब हम परमात्मा से सीधा संबंध जोड़कर अपने जीवन को सुखमय बनाते है और सृष्टि पर स्वर्ग निर्माण में अपना योगदान देकर फिर से स्वर्ग के मालिक बनते है। Holy - पवित्रता ➔ काम विकार को महाशत्रु कहा गया है, इसी में गिरने से हमने हमारा प्यारा स्वर्ग खोया है (जिसकी नूँध The Holy Bible में भी है - They ate the forbidden fruit & lost Paradise.) विकारों पर जीत पाने से ही सतयुग की स्थापना होती है। संस्कार परिवर्तन से ही विश्व परिवर्तन संभव है। परमात्मा हमें हमारे ओरिजिनल संस्कारों की याद दिलाते है, जिसमें पवित्रता मुख्य है। पवित्रता सुख और शांति की जननी है, सर्व प्राप्तियों की चाबी है। पवित्रता का यथार्थ अर्थ सिर्फ ब्रह्मचर्य नहीं बल्कि मन-कर्म-वचन संपूर्ण रूप से शुद्ध बनना है। जब हमें परमात्म दिव्य सन्देश मिलता है और हम अपने जीवन में प्रैक्टिकल में पवित्रता की धारणा कर फिर से हमारे दैवी गुणों को इमर्ज करते है तब इस धरा पर सतयुग आता है। होली का त्यौहार पवित्रता की इसी धारणा का यादगार है। हो ली (बीता सो बीता)- Past is Past... ➔ हरेक के जीवनकाल में बहोत सी बातें आती है... कई बार सालों बीत जाते है लेकिन हम कहते है - "ये बात कभी नहीं भूलेगी"... हम यह भी जानते है कि बातों को पकड़कर रखने में हमारी सेहत, स्वास्थ्य और रिश्तों का भरपूर नुकसान है। परमात्मा हमें याद दिलाता है कि हम सभी एक बाप के बच्चे, आपस में भाई - भाई है, समग्र विश्व एक परिवार है। जो हुआ सो हुआ, बीती को बिंदी लगाओ और प्यार से सब को साथ रख़कर आगे बढ़ो... Ho Li (हो गयी एक शिव बाबा की)- I Belong to One ➔ "तुम्ही हो माता, पिता तुम्ही हो... " - प्रार्थनाओं में हम जो गाते आए है उसे प्रैक्टिकल में अनुभव करने का समय वर्तमान समय है। पिता, माता, सखा, बंधु, जीवनसाथी... हमारे सर्व संबंध वास्तविक रूप में उस एक परमात्मा से ही है। सदियों से हमने उसे पुकारा है... और अब जब वो आया है तब जैसे एक नदिया सागर से मिलने के लिए उत्सुक होती है, और सागर मिलने पर उसमे ऐसे समा जाती है जैसे अलग किया ही न जा सके... वैसे हम आत्मा परमात्मा के संग में रहकर उसके रंग में रंग जाते है। मैं आत्मा परमात्मा की हो ली... ईश्वर को समर्पण होना अर्थात - स्वयं के और विश्व के कल्याण अर्थ अपने जीवन को मनमत पर न चला कर, परमात्म मत (श्रीमत) पर चलाना। ➔ साथ ही, जैसा संग वैसा रंग। परमात्मा के संग (यथार्थ सत्संग) से हम भी उनके जैसे बनते जाते है - शांत स्वरूप, प्रेम स्वरूप, शक्ति स्वरूप... और फिर यही स्नेह, प्यार और सम्मान का परमात्म रंग हम औरों को भी लगाते है। होली के त्यौहार पर एक दूसरे को रंग लगाना इसी का यादगार है। ➔ परमात्मा की लगन में मगन और निरंतर याद को योग-अग्नि कहा जाता है जिससे हमारे जन्म-जन्मांतर के विकर्म विनाश होते है, आत्मा सभी विकारों से मुक्त होकर पावन बनती है। इसी योग-अग्नि की यादगार में होली के त्यौहार पर स्थूल अग्नि जलाई जाती है। पहले होली जलाई जाती है फिर ही मनाई जाती है - अर्थात अपने विकारों को जलाने (ख़त्म करने) पर ही सच्चे अर्थ में जीवन की ख़ुशी मनाई जा सकती है । (Hindi) BK Suraj bhai Sharing the Secrets of HOLI festival ~ Samadhan episode on ''Holi'' ~ (video 2) Holi celebration with meaning ➔ https://youtu.be/jdymW55qQAM Useful links General Articles - Hindi & English शिव बाबा का परिचय राजयोग क्या है? ७ दिवसीय राजयोग कोर्स BK Google - Search engine for BKs
- 4 Dham Avyakt BapDada Drill
अव्यक्त बापदादा द्वारा मुरलियों से लिए गए महावाक्य - चार धाम की रूहानी ड्रिल अर्थात योग की अनुभूति जो आप घर बैठे भी इस article द्वारा पढ़ सकते हो, देख सकते हो व सुन सकते हो। मधुबन के पाण्डव भवन में स्थित चार मुख्य स्थान - १) शांति स्तम्भ २) हिस्ट्री हॉल ३) बाबा का कमरा ४) बाबा की झोपड़ी इन का स्मरण अथवा ड्रिल अभ्यास करना ही चार धाम की रूहानी यात्रा करना है जिसे भक्ति मार्ग में श्रेष्ठ पुरुषार्थ व कर्म मानते हैं । यह ड्रिल १ से ५ मिनट तक सारे दिन में अनेक बार कर सकते हैं या फिर एक समय में ३० मिनट भी किया जा सकता है । यह चार धाम की ड्रिल अथवा एक्सरसाइज मन को रूहानी यात्रा करायेगी जिससे मन सदा बिजी रहेगा, व्यर्थ संकल्प समाप्त होंगे, बाप से सहज ही योग लगेगा और बाप समान गुणों वा शक्तियों से भरपूर होंगे, ख़ुशी रहेगी; व पुरुषार्थ में उमंग-उत्साह बढ़ेगा तथा उड़ती कला की अनुभूति होंगी। तो आइये मधुबन के इन चारो स्थानों से सम्बंधित तपस्या तथा गुणों को अपने जीवन में धारण कर स्वयं को बाप समान संपन्न और सम्पूर्ण बनायें । ✽ English Article Intro ➤ The four main places in Madhuban's Pandav Bhavan are - 1) Shanti Stambh 2) History Hall 3) Baba's Room 4) Baba's Hut Remembering these or practicing drill is the journey to four dham/abode which is considered to be a sacred effort on the path of devotion. This drill can be done several times throughout the day for 1 to 5 minutes or it can also be done 30 minutes at a time (Amritvela time is prefered). This drill or exercise of 4 dham will give a spiritual journey to the mind, which gives an upliftment and always keep the mind busy; and will eliminate waste thoughts, and thus we become easy Yogi and will become full of virtues and powers equal to the father (Shiv Baba). With a regular practice, we will feel ever happy, enthusiasm for Purusharth will increase and shall experience a flying stage (as Baba says in Murli). On Godly Service, pathakau71@gmail.com ⇧⇩ ⇧⇩ ⇧⇩ ⇧⇩ ⇧⇩⇧ ⇩ ⇧⇩ ⇧⇩ ✯ ✯ ✯ ✯ ✯ ✯ ✯ ✯ ✯ ✯ ✯ ✯ 4 dham drill के pdf ( English & Hindi versions ) अथवा audio (Hindi) के download links है जो अलग से दे रहे है 👇 ★ PDF file (Hindi) - चार धाम की ड्रिल अभ्यास (pdf) ★ PDF file (English) - 4 Dham Avyakt Drill Practice ✿ Audio (mp3) version to listen - Listen Audio Drill in Hindi (video version) - YouTube ✪ चार धाम की ड्रिल अभ्यास video 👇 Please visit below given links and you will find anything related to us (Yagya). Also download our mobile app for easy access. ✣✣✣ Useful Links ✣✣✣ All Articles - Hindi & English Avyakt Murli recordings All Resources (everything in Audio) Online Services BK Google - Search anything you want Mobile Apps (android) . #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi #english
- BK Shivani upcoming Event (September 2019)
Brahma Kumari (BK) Shivani behn is appearing on an event arranged by Brahma Kumaris Godly Spiritual University's Shantivan campus and IT wing. You are also welcome to come at our main centre (Mount Abu) where you can get a spiritual atmosphere that awakens the soul and get to listen classes by senior RajYogi brothers and sisters like BK Suraj bhai, BK Sister Shivani, Didi Usha and others. With all this, if you are new, you are advised to take the initial 7 days course that you can take online also and then learn at the centre as well. ✿❀✿❀✿❀✿❀✿❀✿❀✿ Upcoming Event details ✿❀✿❀✿❀✿❀✿❀✿❀✿ Dates of event are: Start: 6 September 2019 - 8:00 am End: 9 September 2019 - 5:00 pm Speakers: BK Shivani, BK Suraj bhai, BK Didi Nirmala, BK Deepa Location / Venue: Brahma Kumaris Shantivan campus, Abu Road, Mount Abu Rajasthan, 307510 Contact phone: (+91) 953 509 1671 Register for this Event ✤ Watch this video of this Upcoming Event ✤ ★★★ IMPORTANT NOTE ★★★ You MUST register your details ''online'' via below link in order to attend this event at Shantivan campus. This is ''compulsory'' and 'free'. ➜ Register for this Event ⬅ ✣✣✣ Useful links ✣✣✣ Brahma Kumaris Introduction History of BK (Eng & Hindi) Biography of Great souls Online Service - Do use daily The Sitemap - Explore everything BK Google - Search anything . #brahmakumaris #brahmakumari
- Gyan Murli Question Answers (PART 7)
Gyan Murli related questions and answers - PART 7. इस PART (भाग) में 2 प्रश्न लिए गए है. 1. Shiv baba se help lene ki vidhi. 2. Prakrutijeet banne ki Vidhi References: Question Answers section General Articles - Hindi & English प्रश्न १ (Question 1) --------------------------- Om shanti प्रश्न - किन परिस्थितियों में हमे बाबा को सब सौप कर निश्चिंत हो जाना चाहिए और किनमे उसकी help नहीं मिलती, अपने शक्ति का use करना होगा, या कहें वो प्रत्यक्ष रूप से हमारी परेशानियां हल नहीं करता? ओम् शांति। अभी संगम पर हम बच्चो को निश्चयबुद्धि बन सभी परिस्थितियां, चाहे सुख हो या दुख हो, सभी को एक परमात्मा बाप को सौप निश्चिन्त हो जाना चाहिए । बाबा के महावाक्य भी है कि अपने सभी बोझ एक बाप को दे और उसे ट्रस्टी बना स्वयं डबल लाइट बनो। बाबा के डायरेक्शन अर्थात श्रीमत के विपरीत कोई भी कार्य करने पर बाबा की मदद नही मिलती। बाबा का कर्म की गहन गति का ज्ञान देना और उस प्रमाण श्रेष्ठ जीवन जीने की अनेको विधियां बता गुणमूर्त बनाना ही बाबा की मदद है। जब हम श्रीमत पर चलते है तो बाबा मदद करने को बन्धायमान है। .....इसलिए ऐसा सोचना की बाबा प्रत्यक्ष रूप से हमारी मदद नही करना, तर्क संगत नही है। कमी हममें है जो श्रीमत पर नही चलते और फिर बाबा को blame करते है कि बाबा मदद नही करता। बाबा कहते भी है कि हिम्मत का एक कदम बच्चो का , तो मदद के हज़ार कदम बाप के उठे ही है। इसलिये किसी विकट परिस्थिति में निश्चयबुद्धि बन श्रीमत प्रमाण अपनी शक्तियों का यूज़ करके हिम्मत का एक कदम बढ़ाने से ही बाबा फिर यथार्थ मदद के लिए आगे आएगा। नही तो फिर भगतो की तरह चिल्लानेे अर्थात पुकारने में मेहनत ज्यादा और क्षणिक प्राप्ति का अनुभव होगा। विचार करे - लौकिक में भी जब बच्चे बड़े हो जाते है अर्थात कमाने लायक हो जाते है तो बाप की चाहना होती है कि वो कमा कर घर-परिवार और रिलेशन में पड़ने वाले किसी भी समारोह में अपनी आमदनी से बाप की मदद करे। और जब बच्चा बड़ा होने के बावजूद भी कमाने के लिए पुरुषार्थ ना कर बाप के कमाई पर ही टिक जाता है तो बाप को गुस्सा आता है और उसको अपना खुद का बच्चा भी बोझ महसूस होता है। यद्दपि परमात्मा बाप के लिए हम बच्चे कभी भी बोझ नही होते पर खुद विचार सागर मंथन करे कि जब बाप इतने वर्षों से हमे पढ़ा लिखा कर लायक बना रहा है तो हम बाप का शो कब करेंगे ? क्या अंत तक भी हम बाप से स्वयं की मदद का गुहार लगाते रहेंगे ?? जबकि हम सर्वशक्तिवान बाप के डायरेक्ट मुखवंशवाली बच्चे है। बाप हमे सर्व आत्माओ का आधारमूर्त और उद्धारमूर्त का टाइटल दे सबको मुक्ति देने का ताजधारी बनाते है। बाप तो तब खुश होता है जब बच्चे बाप से भी ऊँच पोजीशन प्राप्त करे। ठीक इसी रीति सर्वशक्तिवान बाप भी तब खुश होगा जब हम मंगता नही बल्कि देवता अर्थात देने वाला बने। ....इसलिए अब हमे बाप से विघ्न आने पर या हर बात के लिए याचना और फरियाद ना कर, बाप की याद से स्वयं में इतनी शक्ति और सामर्थ्य भर लेना है, जो स्वयं तो माया पर विजय प्राप्त करे ही बल्कि अन्य आत्माओ की भी सभी चाहनाओ को पूर्ण कर मास्टर सर्वशक्तिवान के टाइटल को चरितार्थ करे। और यही सर्वोच्च धारणास्वरूप बच्चों की निशानी है, जो स्वयं भी बाप के सर्व खजानों , शक्तियों, गुणों से भरपूर होकर अन्यो को भी महादानी बन दान करते है। ओम् शांति ---------------------------- प्रश्न 2 (Question 2) ---------------------------- प्रकृतिजीत बनने की विधि क्या अपनाएं जो महा विनाश में प्रकृति सेवाधारी बन जाये....? bhaiji pls bataien.... ओम् शांति । सर्वप्रथम तो ये समझे कि प्रकृति किसे कहते है ? एक तो बाह्य जगत की पंच महाभूतों को प्रकृति कहते है। दूसरे, हमारा ये जड़ शरीर भी पंच महाभूतों से बनने के कारण आत्मा की दैहिक प्रकृति है। तीसरे स्वभाव संस्कार को भी आम बोलचाल में प्रकृति कहते है। प्रायः कभी ना कभी हर आत्मा का दूसरे आत्मा को ये कहना-सुनना आम है कि इसकी प्रकृति ही उग्र होने की है। मीठे बाबा ने हमे प्रकृतिजीत और प्रकृतिपति का ना सिर्फ स्वमान ही दिया है बल्कि विस्तार से अनेको मुरलियो में इस प्रति समझाया भी है। बाह्य जगत की प्रकृति अर्थात पांच महाभूतों को अपनी कंबाइंड स्वरूप की स्मृति और सर्व शक्तियों की पावरफुल मनसा सकाश द्वारा पोषित करना है। ऐसा करने से अंत विनाश के समय यही प्रकृति के तत्व अज्ञानी आत्माओ समक्ष अनेको उत्पात मचाने हुए जब हमारे सन्मुख आएंगे तो शांत हो जाएंगे। आन्तरिक प्रकृति को दासी बनाने के लिए ना सिर्फ साकारी शरीर की बाह्य कर्मेन्द्रियों को कर्मचारी की तरह अपने आर्डर प्रमाण चलाना है बल्कि सूक्ष्म कर्मेन्द्रियों को भी सहयोगी रूप से समझा बुझाकर अपने साथ चलाना है। समझा बुझाकर चलाना मतलब मन-बुध्दि को ना अमन करना है ना दमन करने है बल्कि सुमन कर के अपने साथ मिलाना है। मन को ना अमन करना है ना दमन करने है पर सुमन कैसे करना है इसको एक उदाहरण के रूप में समझाते है। मान लो कि हम बाज़ार में जाते हुए मिठाई की महक जाते ही जिव्हा रूपी कर्मेन्द्रिय इसको ग्रहण करने के लिए लालायित हो जाती है पर आप ने अपने मन को ये कह कर अमन कर दिया कि आज नही फिर कभी खाएंगे। अगले दिन फिर जब यही स्थिति सन्मुख आयी तो आपने मन की इस इच्छा को जबर्दस्ती ये कहने हुए दमन किया कि बाबा ने मना किया हुआ है। लेकिन तीसरी या बार बार जब पुनः यही स्थिति आएगी तो कदाचित मेजोरिटी आत्माएं मिठाई को ये समझते हुए खा लेंगी कि हम तो गृहस्थ में है, इतना तो चलता ही है। और मिठाई में कौन का लहसुन-प्याज मिला है। परंतु मन जब पहली बार ही मिठाई के लिए लालायित हुआ था अगर उस समय ही मन को अमन और दमन करने के बजाए सुमन कर देते तो शायद मिठाई खाने की जिद सहयोगी कर्मेन्द्रिय मन नही करता। अब मन को सुमन कैसे करना है , इस बारे में समझते है। मन को चिंतन दे कि बाबा ने बाहर की मिठाई आदि सभी चीजे खाने को क्यों मना किया है। क्योंकि आने वाले समय मे बहुत सारी मौते food adultaration के कारण होने वाली फ़ूड poisioning के कारण काल कवलित होंगी। और अगर हमारी बाहर खाने की वृत्ति रहेगी तो हम भी ऐसे मरने वालो की लिस्ट में होंगे। तो ऐसे ऐसे चिंतन से मन को सुमन कर ले, फिर मन दुबारा आप को परेशान अर्थात श्रेष्ठ शान की सीट से अपसेट नही करेगा। ** शरीर रूपी प्रकृति को दासी बनाने अर्थात प्रकृतिजीत बनने के लिए अन्य विधियां :-- 1. एकान्तवासी बन एकाग्रता की शक्ति से परखने और निर्णय शक्ति स्वरूप बनना है। 2. ड्रामा के हर राज़ और सबके पार्ट को अच्छे से समझ, साक्षी हो हर आत्मा के पार्ट को देख, नथिंग न्यू की स्मृति से अचल, अडोल और एकरस रहना है। 3. सहनशीलता और समाने की शक्ति के धारणास्वरूप बनना है। 4. नित्य प्रति श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ स्वमानो का अभ्यास करें और उसके स्वरूपधारी बन कर रहे। 5. अकालतख्त पर विराजमान हो, मैं आत्मा मालिक हूँ, इस स्मृति से स्वराज्यधिकारी बन बाह्य और सूक्ष्म कर्मेन्द्रियों को आर्डर और सहयोगी प्रमाण चलाये। 6. अपने आधारमूर्त और उद्धारमूर्त के हीरो हेरोइन पार्टधारी को स्मृति में रहे। 7. आत्मा के नेचुरल गुणों की स्मृति स्वरूप बनने के लिए आदि-अनादि स्वरूप की स्मृति में रहे। 8. खाली समय में मन-बुद्धि को स्व-चिंतन, श्रेष्ठ चिंतन, ज्ञान चिंतन, परमात्म चिंतन आदि में बिजी कर दे। संक्षेप में :- *-------------* मन को शुद्ध और समर्थ संकल्पो द्वारा परिमार्जन करना है। बुद्धि को अलौकिक वा दिव्य बनाने के लिए यथार्थ निर्णय शक्ति और परिवर्तन शक्ति द्वारा चेकिंग और चेंजिंग साथ साथ करना है। और पुराने संस्कारों को आदि अनादि गुणों की स्मृति द्वारा परिवर्तन करना है। जब उपर्युक्त विधि द्वारा सूक्ष्म सहयोगी मन, बुद्धि, संस्कार पर विजय प्राप्त कर लेंगे तो कर्मचारी कर्मेन्द्रिय खुद ब खुद सही रास्ते पर आ जाएंगी। एक शब्द में :- *-------------* प्रकृतिजीत बनने के लिए सम्पूर्ण नष्टोमोहा बन स्मृति स्वरूप बनना है। जब ये न्यारा सो प्यारा अवस्था होगी तो प्रकृति भी अपने मास्टर मालिक की सेवा में सदा नतमस्तक रहेगी। ओम् शांति ❈❈❈ Useful links ❈❈❈ General articles - Hindi & English Question Answers section 7 days course in Hindi ALL RESOURCES Sitemap - Explore everything BK Google - search anything . #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi #Murli
- ज्ञान योग पर प्रश्न उत्तर (Question Answers on Gyan and Yog)
Murli related questions and answers - PART 6. इस PART (भाग) में ३ प्रश्न लिए गए है. References: Question Answers section General Articles - Hindi & English ✿✿ प्रश्न १ (Question 1) ✿✿ 1.आत्मा अभिमानी स्थिति 2.Dehi abhimani sthiti 3.Videhi avastha 4.Ashariri sthiti kaisa bana -- चारो ही स्थित को अलग अलग स्पस्ट भी कीजिये भाई जी -- उत्तर: बहन, सर्वप्रथम हम आप को इन चारों स्थितियों के बारे में संक्षिप्त में बता देते है, फिर आगे इन स्थितियों को प्राप्त करने की सहज विधि भी बतलाते है। *** देही अभिमानी स्थिति *** देही अर्थात आत्मा। तो आत्मा के मौलिक गुणों और शक्तियों के स्मृति स्वरूप में रहकर कर्म करना ही देही-अभिमानी स्थिति है। *** आत्मभिमानी स्थिति *** साकार शरीर मे रह कर आत्मा के शुद्ध नैसर्गिक गुणों और शक्तियों की नेचुरल स्मृति में रहकर कर्म करने की स्थिति को आत्मभिमानी स्थिति कहते है। इस स्थिति में हमे स्वयं को आत्मा के गुणों और शक्तियों की स्मृति नही दिलानी पड़ती, बल्कि ये नेचुरल होता है। इस आत्मभिमानी स्थिति में सतयुग और त्रेता की समस्त आत्मये रहती है। *** अशरीरी स्थिति *** अशरीरी अर्थात शरीर मे रह कर किया जाने वाला हर वो कर्म जिसमे सूक्ष्म या स्थूल किसी भी रूप में कोई फल की कामना और चाहना ना हो। अशरीरी स्थिति को ही फ़रिश्ता स्थिति कहते है। फ़रिश्ता अर्थात धरनी अर्थात मिट्टी अर्थात देह और देह के संबंध, पदार्थ, वस्तु, व्यक्ति और वैभवों से कोई भी रिश्ता नही। अर्थात अनासक्त और उपराम वृत्ति में रह कर किया गया कर्म अशरीरी स्थिति का द्योतक है। *** विदेही स्थिति *** ये स्थिति राजयोगा की सबसे अंतिम और उत्कृष्ट स्थिति है। इसे हम कर्मातीत अवस्था या स्थिति के रूप में भी जानते है। ये स्थिति तो हमे पुरुषार्थ की पराकाष्ठा में अंत समय में ही मिलनी है। बहन, वैसे तो मुरलियों में बाबा ने समय प्रति समय अनेको पॉइंट हर स्थिति के अभ्यास और अनुभव के संबंध में बताए है। पर मैं आत्मा आप को इन स्थितियों का अनुभव करने के लिए बहुत सहज अभ्यास बताते है। मीठे ब्रह्मा बाबा ने अव्यक्त होने से पहले सम्पूर्ण और संपन्न अव्यक्त फ़रिश्ता और कर्मातीत बनने की सहज विधि 3 मूल मंत्र के महावाक्यों द्वारा बता दिया। १- निराकारी २- निर्विकारी ३- निरहंकारी ध्यान दे - इन तीन महावाक्यों का केवल अर्थ ही अत्यंत सारगर्भित नही है, बल्कि जिस क्रम में बाबा ने इसे उच्चारा, वो भी अत्यंत सारगर्भित है। ऐसा नही है कि पहले हमें निरहंकारी बनना है, फिर उसके बाद निराकारी और निर्विकारी बन जाएंगे, कदापि नही। सबसे पहले हमें स्वयं को निराकारी अर्थात आत्मीक स्टेज पर रह कर हर कर्म करना है। जब ये स्टेज पक्की हो जाएगी तो देह देखने की जो सबसे बड़ी विकार है, जिससे ही अन्य सभी विकारो की उत्पत्ति होती है, उससे सहज ही छुटकारा मिल जाएगा । आगे, जब देह को ही नही देखेंगे तो किसी भी प्रकार का अहंकार आने का कोई सवाल ही नही है। जब ये तीनो महावाक्य ब्राह्मण जीवन मे 75% के ऊपर धारण कर लेंगे तो सहज मायाजीत सो कर्मातीत अवस्था को नम्बरवार प्राप्त कर लेंगे। इसलिए अलग अलग कई बिंदुओं को स्मृति में ना रख इन 3 मुख्य बिंदुओं पर फोकस करे और इनमें से भी मुख्य आत्म-स्मृति में रहने का अभ्यास बढ़ाते जाए। आप जैसे जैसे इस आत्म-स्मृति में आगे बढ़ते जाएंगे, वैसे वैसे ही देही-अभिमानी से लगायत अशरीरी स्थिति और अंतोगत्वा कर्मातीत अर्थात विदेही अवस्था को प्राप्त कर लेंगे। --- आत्मीक स्थिति को बढ़ाने के लिए tips --- दृष्टि और वृति पर अटेन्शन देना है। दृष्टि हमारी भाई -भाई या भाई-बहन की हो। वृत्ति में सर्व प्रति कल्याण और रहम-क्षमा की भावना, अपकारी पर भी उपकार की भावना, सतत ज्ञान का मनन - चिंतन और मन को भिन्न-भिन्न ड्रिल में बिजी रख कर आत्मीक स्थिति को श्रेष्ठ बनाया जा सकता है। यह योग की कमेंटरी जरूर सुने -> RajYog guided commentaries ओम शांति ✿✿✿ प्रश्न 2 ✿✿✿ Non gyani आत्माओं से interaction के समय, ये बिल्कुल भूल जाता है कि सभी आत्माएं है, बाह्यमुखता की अधिकता हो जाती है, इसके लिए कुछ युक्ति बताएं। - ग्रुप का हिस्सा होते हुए उपराम और न्यारे कैसे रहे, और वो भी अगर वो non bks हैं? उत्तर -> ओम् शांति। जब स्वयं को सदा सेवा क्षेत्र पर होने अर्थात रूहानी मैसेंजर और soldier होने की स्मृति में रहने का अभ्यास बढ़ाते जाएंगे तो सहज ही अज्ञानी आत्माओ से interaction के समय या अनेको हलचल में भी अपनी अवस्था को अचल, अडोल और एकरस बना सकेंगे। शादी -विवाह या घर मे आयोजित किसी उत्सव में हमे अनेको अज्ञानी आत्माओ के संबंध संपर्क में तो आना ही पड़ता है। ऐसे समय पर हम सबसे कट कर नही रह सकते क्योंकि इससे फिर dis-service हो जाती है। इसलिए ग्रुप का हिस्सा होते भी उपराम और न्यारे बनने के लिए अलौकिक व्यवहार को धारण करे। साक्षीदृष्टा हो सबके पार्ट को देखते अपने पार्ट की स्मृति में रहे। कम बोलना, धीरे बोलना और मीठा बोलने का अभ्यास करें। वास्तव में द्वापर से आत्मा को अनेक बातो का रस लेने की बुरी आदत बहुत गहरे समा गई है इसलिए अब सर्व रसों को त्याग एक रस में परमात्म रस में डूबने के पुरुषार्थ की मेहनत तो स्वयं ही करनी होगी ना। मन बार बार अनेको रस की तरफ भागेगा पर आप को अपने मन-बुद्धि को ज्ञान के मनन-चिंतन, आत्मीक दृष्टि-वृत्ति के अभ्यास में रत रखना होगा। ध्यान रखे - वास्तव में ऐसे लौकिक संगठन भी हमारे स्व-स्थिति को परखने के पेपर ही है। तो चेक करें कि अनेको हलचल में एकान्तवासी, एकाग्रचित्त और एकरस अवस्था मे रहने की आप की स्व-स्थिति कितनी शक्तिशाली है। ओम् शांति ✦✦✦ प्रश्न 3 ✦✦✦ Kal ki baba ki murli me ek point hai ki es purrane sharir ko sambhalna bhi hai aur bhulana bhi hai. Yeh kaise ho? Qyounki ki deh yaad aate hi deh ke naate rishte Maya sab attached ho jaati hai. Es purusharth ki kaise sahaj kare? * उत्तर -> ओम् शांति। आप का प्रश्न - एक तरफ देह को संभालना भी है तो दूसरी तरफ भुलाना भी है । ये कैसे संभव होगा ?..... ये संभव है भाई जी। बाबा ने इस संबंध में अनेको विधियां भी बताई हुई है। देह को संभालने और भुलाने का पुरुषार्थ एक साथ हो और सहज भी हो इसके लिए निम्न स्मृतियां रखे - स्वयं को इस देह और धरा पर मेहमान समझे। इस स्मृति से महान आत्मा बन जाएंगे। इसके लिए मम्मा के स्लोगन - *हर घड़ी अंतिम घड़ी* और बड़ी दीदी के स्लोगन - *अब घर जाना है* को स्मृति में रखे। विश्व नाटक के क्लाइमेक्स वा कल्प का अंत समय होने की स्मृति द्वारा नष्टोमोहा और साक्षीदृष्टा भाव का पार्ट पक्का रखे। इस शरीर को शिवबाबा की अमानत समझ कर इसकी संभाल करनी है क्योंकि इस अंतिम शरीर द्वारा 21 जन्मो की प्रालब्ध बनानी है। पर ध्यान रखे कि शरीर की संभाल करने के बहुत ज्यादा चक्कर मे आत्मा में ताकत भरने का समय कही समाप्त ना हो जाये। देह में रहते देह के स्थान को सेवा स्थान और देह के संबधी आदि को सेवा के निमित्त समझना है। इस स्मृति से सहज ही इस सबसे अनासक्त वृत्ति से संबंध संपर्क में आएंगे। नए और पुराने शरीर के contrast का विचार सागर मंथन करने से - चिंतन करे कि ये पुराना पतित जडजड़ीभूत शरीर है, पुरानी जुत्ती है। अब हमें जल्द ही नई सतयुग में नया शरीर, नए संबंध, अविनाशी सुख-शांति और समृद्धि युक्त जीवन्मुक्त जीवन मिलने वाला है। इस चिंतन द्वारा इस पुरानी दुनिया और देह से आसक्ति नष्ट हो नई सतयुगी दुनिया और देवताई पवित्र शरीर की स्मृति रहने से दिव्य गुणों की धारणा सहज होती जाएगी। ट्रस्टी और निमित्तपन के भाव से - सबकुछ शिवबाबा का है। हमे अमानत में खयानत नही करना है। साकारी सो आकारी सो निराकारी के अभ्यास द्वारा - कर्म करते समय स्वयं को देह में अवतरित हो कर्म करे, बाद में स्वयं को आकारी फ़रिश्ता सो निराकारी परमधाम निवासी होने की स्मृति स्वरूप का अभ्यास बढ़ाये। ..... इसके अलावा कई अन्य सहज विधियां भी बाबा मुरली में बताते रहते है, उस पर अमल कर के देह को संभालने और भूलने का पुरुषार्थ सहज रूप से एक साथ कर सकते है। ओम शांति ✦✦✦ प्रश्न 4 ✦✦✦ सुख और खुशी में क्या अंतर है?* * उत्तर: ओम् शांति बहन। ज्ञान मार्ग में हम सभी जानते है कि आत्मा की मुख्य सात गुण - पवित्रता, ज्ञान, सुख, शांति, प्रेम, आनंद और शक्ति है, इसलिए ही आत्मा को सतोगुणी कहते है। सुख तो आत्मा की शक्ति ही है पर जब आत्मा को किसी वस्तु, वैभव या व्यक्ति से सुख या दुख की अनुभूती वा प्राप्ति होती है तो उसको व्यक्त करने का साधन स्थूल या बाह्य कर्मेन्द्रियां ही बनती है, जिससे किसी को उस् मनुष्यात्मा के खुश या दुखी होने का संज्ञान होता है। ...इसलिये संक्षेप में कह सकते है कि सुख अंतर्मन वा आत्मा का प्रसंग है और खुशी उसका बाह्य प्रत्यक्ष स्वरूप। ओम् शांति ✠ ✠ ✠ Useful links ✠ ✠ ✠ General Articles - Hindi & English Question Answers section Question Answers on our Blog (general) 7 days course in Hindi Explore the Sitemap BK Google - Search engine for BKs . #Murli #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi
- Advance Murlis (August 2019)
ईश्वरीय भेट स्वरुप आज आपको शिव बाबा की आने वाली ज्ञान मुरलिया in advance भेज रहे है। इसका लाभ वो उठा सकते है जो travel करते होंगे व अन्य कर्मो में busy होने कारन आने वाली मुरली अभी ही पढ़ना चाहे व notes लेना चाहे। समझा? ( As a form of Godly gift, today we are sending you Shiv Baba's Gyan murlis in ''advance''. Those who are travelling or those who are busy in loukik tasks can take benefit from this. Download these murli PDFs and keep in record. Study whenever you get time. Understood? ) निचे अगस्त मॉस की पहले 18 दिनों की मुरलिया 3 भागो में रखी है। ( Below we have kept all Hindi Murlis in PDF for the first 18 days of August. You can download, save on phone or print. Do SHARE this blog post to others who can receive this gift ) 30 July to 4 August Murlis 5 August to 11 August Murlis 12 August to 18 August Murlis | v Read: What is Murli & Shrimat of Baba? (English) ___________________________ ✿ MORE Godly Gifts ✿ Gyan Amrit magazine of July 2019 (Hindi) Purity magazine of July 2019 (English) ज्ञान योग सम्बंधित प्रेरणा दायी कविताए पढ़े -> हिन्दी कविताएँ ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ ♚♚♚ Useful links ♚♚♚ PDF Books online (free) General Articles (Hindi & English) All RESOURCES (everything) Online Services 7 days course in Hindi BK Google - our search engine Question Answers Save or Bookmark above links to visit later... Om Shanti On Godfatherly World Service oo . #Murli #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi
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