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- आज का पुरुषार्थ 29 April 2019 - PMTV
Read and hear Aaj Ka Purusharth in Hindi from Peace of Mind TV channel for 29 April 2019. Watch PMTV Live. Topic: 'Swa-Sthiti' (स्व-स्थिति - Our Spiritual Stage) ★【 आज का पुरूषार्थ】★ बाबा कहते हैं... बच्चे, आप निश्चिन्त रहो...। अब आप बच्चों की स्व-स्थिति ऊँची होती जा रही हैं अर्थात् आप सब, इस दुनिया के प्रभाव से न्यारे अर्थात् तेरा-मेरा, क्या-क्यों, ऐसे-वैसे, अच्छा-बुरा ... हर चीज़ से न्यारे होते जा रहे हो...। अब आप बच्चों के संकल्प भी बेहद में रहते हैं। जैसे; जब पानी से भरे एक बर्तन को अग्नि के ऊपर रख दें, तो पानी भाप बन ऊपर उड़ता जाता हैं, इसी तरह अब आप बच्चों की स्थिति योग-अग्नि से ऊपर की तरफ अर्थात् बेहद में स्थित होती जा रही है। अब आप दुनिया के प्रभाव से न्यारे होते जा रहे हो। यदि कोई बच्चा अभी भी क्या-क्यों करता है, तो जैसेकि अग्नि के ऊपर plate रख देता है, जिससे वो हद में भी आ जाता हैं और योग-अग्नि भी slow हो जाती है ... इसलिए बच्चे, स्वयं पर attention रखो और हर बंधन से मुक्त रह, सभी आत्माओं को बंधनमुक्त बनाओ ... और आपकी बेहद की स्थिति अर्थात् बाप-समान स्थिति ही सभी को मुक्त कर सकती है। आपके अंदर एक ही संकल्प हो कि; • सब अच्छा हैं और • हर बात में केवल कल्याण ही कल्याण है...। आप आधारमूर्त आत्मायें हो। सर्व आत्माओं के प्रति आपको विशेष सम्मान और स्नेह होना चाहिए...। आप बच्चे तो मास्टर प्रेम के सागर हो - निर्माणता, नम्रता और मधुरता तो आपके विशेष गुण है। आप सर्व विशेष हो। आपकी presence ही सभी आत्माओं में जागृति देती है। बस, आप अपने उच्चतम authority रूपी स्वमान में स्थित रहो...। Paper के रूप में कोई भी बात आये, तो आप विशाल हृदय बन, सभी को क्षमा कर, स्नेह दो - यही विश्व-कल्याणकारी आत्मा के विशेष गुण है...। आपके साथ तो स्वयं भगवान, बाप रूप में चलता है, फिर आपको तो किसी भी बात की सोच होनी ही नहीं चाहिए...। अच्छा। ओम् शान्ति। * Hear Audio version (video) * 【 Peace Of Mind TV 】 ---- Useful links ---- Aaj Ka Purusharth Audio Daily Murli Poems Online Services (on internet) ♻♻♻♻♻♻♻♻♻♻♻ आज का स्वमान ************************** ♻ मैं परिवर्तन शक्ति द्वारा हर परिस्थिति में स्वयं को मोल्ड करनेवाली स्व परिवर्तक आत्मा हूँ ♻ जो हर परिस्थिति में स्वयं को परिवर्तन कर स्व परिवर्तक बनते हैं वह सदा सफल होते हैं इसलिए स्वयं को बदलने का लक्ष्य रखो। दूसरा बदले तो मैं बदलूँ-नहीं। दूसरा बदले या न बदले मुझे बदलना है। हे अर्जुन मुझे बनना है। सदा परिवर्तन करने में पहले मैं। जो इसमें पहले मैं करता वही पहला नम्बर हो जाता क्योंकि स्वयं को मोल्ड करने वाला ही रीयल गोल्ड है। रीयल गोल्ड की ही वैल्यु है। *MADHUBAN* BK Articles - Topic wise BK Google - our Search engine . #Murli #brahmakumari #Hindi #brahmakumaris
- (Hindi) Question Answers from Murli 4
शिव बाबा की मुरली से विशेष प्रश्न उत्तर (जरूर पढ़े) - Question Answers in Hindi from Baba's Gyan murli. Also refer: शिव बाबा की 108 श्रीमत प्रश्न: बाबा बारबार क्यो कहते कि याद करो अब घर जाना है,अशरीरी पन की प्रैक्टिस करो ? उत्तर: हम जहाँ जाना होता है वहा स्थूल रीति से जाने से पहले मनबुद्धि द्वारा बहुत बार चक्कर लगा आते है। जैसे हमे शिमला जाना है।तो पहले से तैयारी कर लेतेहै वहाँ ठंड होगी।गर्म कपड़े pack कर लेते है।फिर जहाँ ठहरना है सो होटल लॉज वालो का पता करना शुरू करते है।वहाँ कहा कहा घूमना है उसके बारे में भी जानकारी इकट्ठा करना शुरू करते है।फिर वहा जितना दिन रहना है हर दिन का tentitive प्लान भी मन सोच लेते है।यानी हम अभी फिजिकली पहुचे नही की बुद्धि में बार बार शिमला और वहाँ की बाते आती रहतीहै।और जब जब हम यह बातें सोचते है तब तब बुद्धि उस जगह से जुड़ जाती है। मतलब बुद्धि का योग उस जगह से होता रहताहै। और जब किसी से हमारा योग लगता है तब हम वहां की एनर्जी को भी attract करते। कनेक्शन से एनर्जी का conduction शुरू होता है। इसीतरह जब हम आत्माओ को पताहै अब हमें परमधाम जाना है परमात्मा के साथ जाना है। अब परमात्मा के संग जहाँ जाना है वहाँ की महिमा का बार बार बुद्धि में वर्णन करेंगे तो परमधाम से कनेक्सशन हो जाएगा।वहाँ की पवित्रता और शांति की एनर्जी को हम आवाहन करेंगे। और उसे ग्रहण करेंगे। इसलिए बाबा कहते है याद रखो की अब घर जाना है। जाने की तैयारी करो।मतलब बेहद का वैराग्य करो इस संसार का।जहाँ जाना है वहां बहुत शांति है स्वीट साइलेंस है। उस स्वीट साइलेंस को याद करो बुद्धि से जुड़ जाओ। अभी स्थूल में आत्मा वहा शरीर छोड़ तो नही जा सकती है। जब समय आएगा.. जाना है.... मानो या ना मानो जाना तो है ही....जब तक नही पहुचेंगे तब तक जाने की तैयारी करते रहना है।। क्या क्या करना होगा ताकि हम खुशी खुशी परमधाम परमात्मा के संग जा सके !?? वो भी हमारा गाइड पंडा शिवबाबा बताते है। 1) देह सहित देह की सभी सम्बधों को भूल जाओ।नष्टो मोह बन जाओ। 2) स्वीट साइलेंस है वहा तो अंतर्मुखी बनो।मन का भी मौन रखने की आदत डालो।ज्यादा आवाज में नही आओ।जितना जरूरी है उतना ही बोलो। 3) पवित्रता का घर है वो। तो अभी तन,मन,धन से पवित्रता को अपनाओ। आत्मा को पवित्र बनाओ। 4) बहुत दूर है परमधाम मगर आत्मा में इतनी शक्ति है कि वो सेकंड में वहां पहुँच जाती है। इसलिए अपनी शक्ति को इमर्ज करो उसके लिए बार बार मन को एक सैकंड में जहाँ जाना चाहे वहा जाने का अभ्यास कराओ।मधुबन की चार धाम यात्रा कराओ,सूक्ष्मवतन में जाओ ,कभी अपने ही सेंटर का चक्कर लगाओ। कभी विश्व ग्लोब पर जाके सकाश दो।यह है मन बुद्धि की exercise जिससे आत्मा अपनी rocket से भी ज्यादा फ़ास्ट उड़ने की शक्ति को जागृत कर ले। यह सब करेंगे तो जब बाबा कहे चलो बच्चे अब घर चलो तो फट से हम अपने मंजिल के लिए चल पड़े। ओम शान्ति BK Articles - Topic wise _______________________________________ प्रश्न: बाबा ने मांगने से मना किया है , मुरली में आता है माँगने से मरना भला तब हम अधिकार से कैसे ले सकते है प्लीज क्लीयर कीजिए। उत्तर: आपको यदि अपने लौकिक मात पिता से कुछ माँगना हो तो आप किस मनोस्थिति से माँगती है और किसी अन्य से कुछ माँगना हो तो क्या उसी मनोस्थिति से माँगेगी । विवाहित कन्या का भी अपने मायके के व्यवहार और ससुरघर के व्यवहार में फर्क साफ़ देखने में आता है । ससुराल में भी जब वह नयी नवेली दुल्हन के रूप में आती है तब के व्यवहार और कई वर्षों के बाद का व्यवहार एक समान नहीं रहता। एक में सम्बन्ध के कारण अपनापन है इसलिए अधिकार होता है जबकि दूसरे में यह नहीं होने की वजह से संकोच अथवा झुकाव है । जहाँ पर प्यार,मित्रता और घनिष्ठता है वहाँ सम्बन्ध का निर्माण होता है जिससे अपनापन अनुभव होता है और जहाँ अपनापन होता है वहाँ अधिकार स्वतः पैदा हो जाता है। भक्ति में परमात्मा का सच्चा परिचय, उनसे अपना सम्बन्ध और प्राप्तियों का ज्ञान न होने से अधिकार की भावना नहीं रहती इसलिए माँगते रहते हैं। दूसरी बात बाबा ने दूसरों से माँगने के लिये मना किया है क्योंकि हम देवता अर्थात दाता बन रहे हैं और दाता मांगते नहीं बल्कि देते हैं । बाबा के जब हम बच्चे बनते हैं तब भक्त नहीं रह जाते अधिकारी बन जाते हैं और माँगने की वृत्ति धीरे धीरे समाप्त हो जानी चाहिए। जब हम अपने अधिकारीपन की स्थिति अथवा सर्वप्राप्ति स्वरुप के स्वमान से नीचे आते हैं तभी ही मांगने की वृत्ति इमर्ज होती है । हाँ बाप के सामने प्यार अथवा अधिकार से हम अपनी इच्छा जरूर रख सकते हैं पर उसके बाद निश्चय बुद्धि हो निश्चिंत हो जाना चाहिए क्योंकि वो जानता है हमारे लिए क्या जरुरी और उचित है , बस पूर्ण रूप से विश्वास और सही वक्त आने का इंतज़ार करना पड़ता है । ओम शान्ति ---- Useful links ---- BK Articles - Topic wise BK Articles - New and old Question Answers forum Articles Blog - Q and A BK Google - Our divine Search engine . #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi
- आज का पुरुषार्थ 28-04-2019 (PMTV)
Read and hear Aaj Ka Purusharth in Hindi from Peace of Mind TV channel for 28 April 2019. Watch PMTV Live. Topic: 'Equal to the Father' (Baap Bhagwaan Samaan Banna hai) ★【 आज का पुरूषार्थ 】★ बाबा कहते हैं ... बच्चे, आपका लक्ष्य बहुत ऊँच है, अर्थात् आप मनुष्य से देवता और देवता से भगवान समान बनने का पुरूषार्थ करते हो ... अर्थात् आप सारी दुनिया के रचयिता परमपिता परमात्मा के समान इस दुनिया में रहते बनना चाहते हो। जबकि इस दुनिया की मनुष्य आत्मायें, द्वापर से ही परमात्मा से मिलने के लिए या उनके क्षण भर के दर्शन के लिए अपना पूरा जीवन ही लगा देती है...! परन्तु आप मुट्ठी भर बच्चे बाप की श्रीमत पर सच्चे मन से, पूरी लगन से चल, बाप-समान बन जाते हो...। आपका परमात्मा बाप के प्रति समर्पण भाव ही आपको, आपके लक्ष्य तक पहुँचता है...। यह समय की भी बलिहारी है जो केवल इस समय ही, कोई-कोई आत्मायें ही, शिव बाप को पहचान बाप-समान बनने का attention देती हैं ... और केवल योग्य आत्मायें ही नम्बरवार बाप-समान बन सकती है। योग्य, अर्थात् जो आत्मायें बेहद में सोचें ... और जो बच्चे सच्चे दिल से, निश्चय और धैर्यता को अपना आधार बना आगे बढे़...। ऐसे बच्चों को ही बाप का हर कदम में full सहयोग मिलता है ... अर्थात् भगवान बाप ऐसी आत्माओं को ही अपने समान बना लेता है, अन्यथा भगवान तो सबका बाप है...! कई बच्चे सोचते हैं कि पता नहीं कितना समय अभी और लगेगा...? देखो बच्चे, बाप की शक्तियाँ अपरमअपार है, इसके कारण बाप की महिमा भी अपरमअपार है...। बाप-समान बनने के लिए आपको स्वयं को इतना योग्य तो बनाना ही पड़ेगा कि आप बाप की दी गई शक्तियों को स्वयं में सही रीति धारण कर, उन्हें सही रीति use कर सको। बस बच्चे, बाप पर निश्चय रख आगे बढ़ो, आप ही कल्प-कल्प के विजयी हो...। अच्छा ओम् शान्ति। ---- Useful links ---- Aaj Ka Purusharth Audio Daily Murli Poems Online Services (on internet) * आज की पालना * जितना स्वयं को मन्सा सेवा में बिजी रखेंगे उतना सहज मायाजीत बन जायेंगे। सिर्फ स्वयं के प्रति भावुक नहीं बनो लेकिन औरों को भी शुभ भावना और शुभ कामना द्वारा परिवर्तित करने की सेवा करो। भावना और ज्ञान, स्नेह और योग दोनों का बैलेन्स हो। कल्याणकारी तो बने हो अब बेहद विश्व कल्याणकारी बनो। * आज की प्रेरणा * इच्छा पूरी नहीं होती तो क्रोध बढ़ता है और इच्छा पूरी होती है तो लोभ बढ़ता है। *आज से हम* अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखें... TODAY'S INSPIRATION When desire is not fulfilled, anger increases...and when desire is fulfilled, greed increases...! TODAY ONWARDS LET'S keep a tight rein on our desires... * MADHUBAN * Video Gallery - Hindi & English BK Google - Search the Divine . #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi
- आज का पुरुषार्थ 26 April 19 (Today's Purusharth)
Hear Aaj Ka Purusharth from Peace of Mind TV channel for 26 April 2019. Watch PMTV Live. Topic: 'Love and Light' (Prem aur Prakash) ★【 आज का पुरूषार्थ】★ बाबा कहते हैं ... देखो बच्चे, बाप ने आप बच्चों को महीनता से सारी पढ़ाई पढ़ा दी है और last अभ्यास भी बता दिया है कि love and light का carefully किया गया अभ्यास ही आपको इस दुनिया से न्यारा करेगा...। बस, आप बाप पर निश्चय रख यह अभ्यास करते चलो। जल्द ही प्राप्तियां शुरू हो जायेंगी। Love and light का अभ्यास अर्थात इस पाँच तत्वों से न्यारे होने का पुरुषार्थ ... और जो यह पुरूषार्थ अच्छी रीति कर रहे हैं, उन्हें इसके result भी positive मिल रहे हैं। यह जो आपकी पाँच कर्मन्द्रियाँ है ना, इनका प्रभाव भी आप पर नहीं पड़ना चाहिए अर्थात् कुछ भी देखकर, सुनकर, बोलकर कर्म का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। अब आँखों को जब भी use करो तो सबकुछ light ही देखो, वो भी बहुत प्रेम के साथ ... तो जल्दी ही इसके प्रभाव से न्यारे हो जाओगे...। देखो बच्चे, शिव बाप ने तो आप बच्चों से पहले से ही promise किया हुआ है कि 100% श्रीमत पर चलने वाले बच्चों को बाप समय से पहले तैयार कर अपने साथ लेकर जायेगा। बस, आप double light रहो अर्थात् निश्चिन्त रहो। बाप आपको किसी भी तरह की, कोई भी परिस्थिति में फँसने नहीं देगा...। बस, आप आने वाली हर परिस्थिति को मन-बुद्धि द्वारा हल्का कर, LET GO कर, हल्के रहो ... आपका ज़िम्मेवार परमात्मा बाप है...। जितने आप हल्के रहोगे उतनी जल्दी बाप आपको अपने संग बिठा लेगा। बस, आप बाप पर निश्चय रखो। बाप की एक-एक बात पत्थर की लकीर अर्थात् 100% सत्य सिद्ध होगी। शिव बाप अपने हर बच्चे के साथ है। बस, आप ना तो अलबेले बनना और ना ही दिलशिकस्त होना...। देखते ही देखते बिल्कुल अचानक ही समय परिवर्तन होना है...। अच्छा। ओम् शान्ति। Listen Aaj ki Murli (Hindi) OR Today's Murli (English) * Hear on【 Peace Of Mind TV 】* * आज का स्वमान * ♻ मैं महसूसता की शक्ति द्वारा स्व-परिवर्तक सो विश्व-परिवर्तक आत्मा हूँ ♻ कोई भी परिवर्तन का सहज आधार महसूसता-शक्ति है। जब तक महसूसता-शक्ति नहीं आती, तब तक अनुभूति नहीं होती और जब तक अनुभूति नहीं तब तक ब्राह्मण जीवन की विशेषता का फाउन्डेशन मजबूत नहीं। महसूसता की शक्ति बहुत मीठे अनुभव करा सकती है। कभी अपने को बाप के नूरे रतन आत्मा अर्थात् नयनों में समाई हुई श्रेष्ठ बिन्दु महसूस करो। कभी अपने को मस्तक पर चमकने वाली मस्तक-मणि,चमकता हुआ सितारा महसूस करो, कभी अपने को ब्रह्मा बाप के सहयोगी, राइट हैण्ड साकार ब्राह्मण रूप में ब्रह्मा की भुजायें अनुभव करो, महसूस करो। कभी अव्यक्त फरिश्ता स्वरूप महसूस करो। ऐसे महसूसता शक्ति से बहुत अनोखे, अलौकिक अनुभव करो। इस महसूसता-शक्ति को बढ़ाओ तो दूसरे तरफ की कमज़ोरी की महसूसता स्वत: ही स्पष्ट होगी। शक्तिशाली दर्पण के बीच छोटा-सा दाग भी स्पष्ट दिखाई देगा और परिवर्तन कर लेंगे। * MADHUBAN * ---- Useful links ---- Aaj Ka Purusharth Audio Daily Murli Poems Online Service (on internet) Video Gallery - Hindi & English BK Google - Search the Divine . #Murli #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi
- लेनटेन ऋतु का आध्यात्मिक महत्व
✝ लेनटेन ऋतु का आध्यात्मिक महत्व क्या है ✝ सच्चा ईश्वरीय ज्ञान, केवल परमपिता परमात्मा शिव द्वारा पुरुषोत्तम संगमायुग में ही रहस्योदघाटित करते हैं। वही सर्व आत्माओं के परमपिता हैं. इसी समय अर्थात कलयुग रूपी रात्रि के अंत और सतयुग रूपी दिन के संगमयुग पर, वे अपने परमधाम से अवतरित होकर देह-अभिमान के कारण हम आत्माओं में व्याप्त विकारों और अज्ञान के अंधकार को दूर कर, इस भारत भूमि को पुनः स्वर्ग अथवा जन्नत अथवा बैकुंठ बनाने का श्रेष्ठ कार्य कर रहे हैं। वही हम आत्माओं को सही और गलत की, सत्य और असत्य की यथार्थ समझ प्रदान करते हैं। हम आत्माएँ जो अपनी और परमात्मा की पहचान को भूल चुकी हैं, वह आकर हमे आत्मा, परमात्मा और सृष्टि के आदि, मध्य, अंत के साथ-2 कर्मों की गुह्य गति का ज्ञान देते हैं और हमें श्रेष्ठ कर्म करना सिखलाते हैं. चूंकि वे निराकार हैं इसलिए वह एक साधारण वृद्ध और अनुभवी तन, जिन्हें वह ब्रह्मा नाम देते हैं, का आधार लेकर हमें राजयोग का ज्ञान देकर हमारी मनुष्य से देवता बनाते हैं। प्रजापिता ब्रह्मा के द्वारा ही वह हम बच्चों को भी एडॉप्ट करते हैं और ब्राह्मण धर्म की स्थापना करते हैं। इसके अलावा वह विभिन्न धर्मों के प्रमुख त्योहारों के आध्यात्मिक रहस्य को भी रहस्योदघाटित करते हैं। इस ईश्वरीय ज्ञान के अनुसार, लेनटेन ऋतु इस बात का द्योतक है कि वर्तमान समय, देह-अभिमान के कारण हम आत्माएँ पतित बन चुकी हैं। अतः, परमात्मा जो की सदा पावन हैं और पवित्रता के सागर हैं और कल्याणकारी हैं, हमें 'पवित्र बनो और योगी बनो' की श्रेष्ठ मत देते हैं. वह हमें बताते हैं कि अब इस मृत्यु लोक में हमारा यह अन्तिम जन्म है, इसलिए अब हमें देह और देह की दुनिया, में रहते हुए, इनसे निमित्त मात्र संबंध निभाते हुए एक परमपिता परमात्मा शिव को ही याद कर पावन बनना है। ईश्वरीय ज्ञान के अनुसार, उपवास का आध्यात्मिक महत्व मन, वचन, कर्म, संबंध-संपर्क सहित संपूर्ण पवित्र रहना है. और काम-काज करते परमात्मा को याद करके पावन निर्विकारी बनना है। यद्यपि लेनटेन काल को सिर्फ 40 दिनों तक ही मनाया जाता है, किन्तु परमपिता परमात्मा शिव के मार्गदर्शन में अब हमें इस पुरुषोत्तम युग में प्रतिक्षण पवित्रता की दृढ़ प्रतिज्ञा करनी है और उसका पालन करना है। इस उत्सव को यथार्थ रीति से मनाने से हम आत्माएँ पुनः अपने वास्तविक गुणों और शक्तियों से भरपूर हो जाएंगी और 21 जन्मों के लिए स्वर्ग का राज्य-भाग्य के मालिक बन जाएंगी। तो आइए, परमात्मा शिव द्वारा सिखाए जा रहे श्रेष्ठ ज्ञान को धारण कर श्रेष्ठ बनें और श्रेष्ठ कर्म करें। एक ओर गुड फ्राइडे वर्तमान समय पर परमात्मा द्वारा सिखाए जा रहे राजयोग के आधार पर हमारा उनकी याद की यात्रा पर एकाग्र होने और इस पुरानी दुनिया से जीतेजी मरने का यादगार है, वहीं दूसरी ओर ईस्टर का पर्व, परमात्मा द्वारा हम आत्माओं अर्थात रूहों को वापिस अपने घर शांतिधाम लेकर जाने और उनके द्वारा वर्तमान समय में सिखाए जा रहे राजयोग के आधार पर पुरुषार्थ के द्वारा शीघ्र ही आने वाले स्वर्ग का मालिक बनने का भी यादगार है। आप सभी को गुड फ्राइडे और ईस्टर के शुभ अवसर की हार्दिक शुभ कामनाएँ। ओम शान्ति ---- Useful links ---- BK Articles - Hindi & English 7 days course in Hindi RESOURCES - Everything audio BK Google - Search the divine . #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi
- Question Answers 3 (Murli related)
These are questions and its given answers from Murli related concepts. Baba has answered everything in brief. We children only need to churn (Vichar manthan) and this way we imbibe the ''power'' from the raw knowledge. Sakar murlis are the source of pure (raw) knowledge, while Avyakt murlis are source of wisdom. 1. ''Is Moksha the ultimate aim of Life?'' Moksha if you say -it means ''complete freedom from the Drama cycle'' which is NOT possible. You see even ParamAtma (the Supreme soul) is bound to come to play his part of creating heaven in world (golden age). You are here. That simply means that you the soul has to come here again as the cycle repeats. Hence the goal of this precious life is not moksha as written in texts. Soul desires happiness. That's why you came here. Silence or Peace (Shanti) is natural. You don't need to do anything to achieve peace (liberation). But you definitely need to do Purusharth and walk on the path to achieve ''liberation in life'' which means - Happiness of the Golden age. God comes and creates the new world, o he definitely wish that maximum children will see this wonderful world. ''Everyone has to come in world now or then. So why not come at the beginning (when the world is in the Satopradhan stage)'' Please watch this video: https://www.youtube.com/watch?v=Ct6f6kSSgKs ----- Useful links ----- . #Murli #brahmakumari #brahmakumaris
- वरदानो की शक्ति
वरदानों की शक्ति (Power of Blessings). This is Hindi 25 points article on Power of blessings, inspired by Avyakt Murlis. Do SHARE this article (blog post) to many others... * शिव भगवानुवाच :-* 1.) जैसे मैं इस ड्रामा को साक्षी होकर देखता हूँ वैसे तुम भी देखो तो बाप समान बन जाएंगे। 2.) स्वस्थिति श्रेष्ठ है तो परिस्थितियां बदल जाएगी, तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकेंगी। 3.) तुम सिर्फ मुझे याद करो, तुम्हारे लिए सोचने का काम भी मैं करूँगा। 4.) तुम अपनी श्रेष्ठ पोजीशन में रहो तो कोई भी अपोजीशन कर नही सकता। 5.) तुम अपने श्रेष्ठ स्वमान में रहो तो वहां हर गुण व शक्ति का नशा सदा इमर्ज रूप में रहेगा। 6.) तुम्हारा सोचना, देखना सम्पूर्ण बनने का आधार है, तुम्हारी दृष्टि से आत्माएं और प्रकृति पावन बन रही है। 7.) ज्ञानसूर्य से शक्ति लेकर सबको देना यह मुख्य सेवा है बाकी सेवाएं तो निमित्त मात्र हैं। 8.) स्वभाव में सरल और पुरुषार्थ मे अटेंशन रख चलो तो नम्बरवन में आ जाएगी। 9.) तुम बाप की याद मे रहो तो प्रकृति विनाश के समय तुम्हारे समीप आकर एक फुट की दूरी पर रुक जाएगी। 10.) जब तुम अपने आप को सम्पूर्ण रीति से जान जाओगे तो सम्पूर्णता को प्राप्त कर लेंगे। 11.) तुम अपने को निमित्त समझकर चलो, जिम्मेवार मैं हूँ- यह स्मृति सब जिम्मेवारियों से हल्का कर देगी। 12.) यह सेवाएं तो तुम्हे बिजी रखने के लिए हैं, तुम्हारा लक्ष्य तो स्वयं परिवर्तन से विश्व परिवर्तन करना है। 13.) याद का बल उन बच्चों को मिलता है जो ऑनेस्ट हैं और जो सच्चे बाप से सच्चे होकर चलते हैं। 14.) बाप अपने को निमित्त समझकर निश्चिंत रहता है और बच्चे अपने को जिम्मेवार समझ कर परेशान रहते हैं। 15.) सर्वस्व त्यागी बनो तो सरलता और सहनशीलता का गुण आ जाएगा। 16.) जो बच्चे स्वमान की सीट पर सेट रहते हैं और उनका जिम्मेवार बाप है, जो नही रहते उनके जिम्मेवार वे स्वयं हैं। 17.) जितना बाप की याद में रहेंगे तो बाप के साथ का व बाप की छत्रछाया का अनुभव होता रहेगा। Video: Yaad aur Farista stage (Avyakt murli clip) 18.) जो त्यागी और तपस्वीमूर्त हैं भाग्य उनके आगे-पीछे दासी के समान आता है। 19.) तुम सुख के सागर के बच्चे हो, तुम्हे संकल्प में भी दुख की लहर नही आ सकता। 20.) बुध्दि रूपी विमान से सेकंड में वतन में पहुँच सर्वशक्तिमान बाप की किरणों का अनुभव करना ही शक्तिशाली योग है। (Refer: आत्मा की 8 शक्तियां) 21.) तुम कल्याणकारी बाप के बच्चे हो, स्वप्न में भी तुम्हारा अकल्याण नही हो सकता। 22.) तुम नॉलेजफूल आत्माएं संसार को रोशन करने वाले हो, तुम्हारे जीवन में एक सेकंड भी अंधकार नही हो सकता। 23.) तुम्हारे भाग्य का निर्माण स्वयं भाग्यविधाता बाप ने किया है, भाग्यविधाता ही तुम्हारा हो गया है। 24.) जो बच्चे परमात्मा प्यार में खोए रहते हैं उन्हें संसार का कोई भी आकर्षण आकर्षित नही कर सकता। 25.) जो आत्माएं बाप के नयनों में समाई रहती हैं माया की नजर उन पर पड़ नही सकती। * ॐ शांति * ----- Useful links ----- मुरली से कविता (Murli Poems) विशेष हिन्दी कविताये परमात्मा का परिचय All BK Articles - Hindi & English RESOURCES - Everything audio BK Google - Search the divine . #Hindi #brahmakumari #brahmakumaris
- हनुमान जयन्ती पर विशेष
हनुमान जयंती के अवसर पर यह सुंदर कविता प्रस्तुत करते हैl आशा है बहुतो को पुरुषार्थ मे प्रेरणा देंगी l हनुमान जयन्ती पर लघु कविता श्री राम के प्रति रखा जिसने समर्पित भाव सदा ही आज्ञाकारी का था उसका स्वभाव कामना नहीं थी पाने की मान और सम्मान नहीं था उसके जीवन में अहंकार का भान जिसकी नस नस में भरी थी स्वामी भक्ति धर्म के लिये लगाई थी उसने अपनी शक्ति अचल अडोल रहा सदा वो अपने इरादों पर खरा उतर दिखलाया अपने सभी वादों पर ऐसे महावीर हनुमान का जन्म दिन मनाओ उसके गुणों को खुद में धारण करते जाओ * ॐ शांति * हनुमान जयन्ती की शुभकामनायें Useful links All Articles - Hindi & English Online Services (all covered) Videos Gallery - Hindi & English शुद्ध विचार सुखी जीवन का आधार खेल ये मन के संकल्पों का बहुत ध्यान से खेल बढ़ाते जाना एक दूजे संग शुद्ध विचारों का मेल समान विचारों के बल से ही वातावरण बदलता समस्याओं का समाधान इसी विधि से निकलता शुभ भावना भरे संकल्पों से चरित्र बनता महान सफलता के शिखर पर चढ़ना हो जाता आसान नहीं होते कोई वैर विरोधी ना होता व्यर्थ विवाद श्रेष्ठ चरित्र तब ही बनता जब होता शुद्ध संवाद चिंता की रेखा मिटकर आती चेहरे पर मुस्कान सुखी बनता जीवन मिटता दुख का नाम निशान पांचों तत्व भी पावन बन जाते शुद्ध विचारों से पतझड़ से मुक्ति पाकर परिचय होता बहारों से शुद्ध विचार ही करते सारी दुनिया पर उपकार शुद्ध विचार से बन जाता सुखमय सारा संसार आज से अपने मन में शुद्ध विचार ही अपनाना सात्विक विचार से जीवन सबका सुखी बनाना * ऊँ शांति * Get mobile apps (Android & iOS) BK Google - A divine search engine for BKs
- राम, सीता, हनुमान, रावण कौन?
प्रश्न : राम , सीता , हनुमान व रावण कौन हैं? - रामायण के पत्रों का अध्यात्मिक रहस्य। What is the Spiritual Significance of Rama, Sita, Hanuman and Ravana? What or whom does these names represent? ✅उत्तर : वास्तव में परमात्मा ईश्वर को ही ''राम'' कहा जाता है। हम सभी आत्माए उनकी सीता रूपी पत्नी है। हममें से जो आत्माए राम (परमपिता परमात्मा) की श्रीमत पर चलते है, वे हनुमान जैसे आज्ञाकारी है। रावण वास्तव में कोई मनुष्य नहीं लेकिन ५ विकार रूपी माया को ही रावण कहा जाता है। परमपिता परमात्मा यही श्रीमत देते है की इन विकारो को जीतो। निर्विकारी व पवित्र बनो। अभी भगवान हमे रावण की लंका (नर्क) से निकाल, सतयुगी सुखमय स्वर्ग में ले जाते है - इसलिए अब पवित्र जरूर बनो। 1. राम राम वास्तव में निराकार शिव है जो संगम युग पर धरा पर अवतरित हो कर अपनी बिछड़ी हुई सीता ( सतयुगी आत्मा ) को रावण ( विकारों ) के चंगुल से छुड़ाने आया है । 2. सीता हर वह आत्मा जो वास्तव में पवित्र है परंतु आज रावण के चंगुल में फँसी हुई दूख़ी व अपवित्र है । 3. रावण पतित व विकार युक्त सोच व धारणा ही रावण है जिसमें फँसी हर आत्मा आज विकर्मों के बोझ तले दबती जा रही है। पाँच मुख्य विकार पुरुष के व पाँच विकार स्त्री के ही रावण के दस शीश हैं । 4. हनुमान वास्तव में धरा पर अवतरित हुए परमात्मा को सर्वप्रथम पहचानने वाली आत्मा ( ब्रह्मा बाबा ) ही हनुमान हैं परंतु हर वह आत्मा जो ईश्वर को पहचान दूसरी आत्माओं ( सीता ) को धरा पर आए ईश्वर ( राम ) का संदेश देने के निमित बनती है वह भी हनुमान की तरह ही है । 5. वानर सेना साधारण दिखने वाली मनुष्य आत्माएँ ईश्वर ( राम ) को पहचान कर, संस्कार परिवर्तन द्वारा पूरानी दुनियाँ या रावण राज्य ( पतित सोच पर आधारित दुनिया ) को समाप्त करने में राम का साथ देने वाली संसार की ३३ करोड़ आत्माएँ ही वानर सेना है। 6. लंका पूरानी पतित दुनियाँ यहाँ हर कार्य देहभान ( body consciousness ) में किया जाता है वह रावण नगरी लंका है l ओम शान्ति 🤴 ---- Useful links ---- Navratri Spiritual Significance Spiritual Significance of Raksha Bandhan All General Articles - Hindi and English RESOURCES - For Everything BK Google - our Search engine . #Hindi #brahmakumari #brahmakumaris
- मनमनाभव का अर्थ (ManManaBhav)
* मुरली के मनमनाभव शब्द का यथार्थ अर्थ * मनमनाभव होना ही सबसे बड़ा मनोरंजन है क्योंकि सर्व सम्बन्धो का रस वा अनुभूतियां करना ही मनमनाभव है। सिर्फ बाप ,टीचर ,सतगुरु के रूप में नही बल्कि सर्व सम्बन्धो के स्नेह का अनुभव कर सकते हो लेकिन फर्क क्यों पड़ जाता है? एक है दिमाग से नॉलेज के आधार पर सम्बन्ध को याद करना और दूसरा है दिल से उस सम्बन्ध के स्नेह में , लव में लीन हो जाना....आधा तो करते हो बाकी आधा रह जाता है इसलिए थोड़ा समय तो ठीक रहते हो , थोड़े समय के बाद सिर्फ दिमाग से ही सम्बन्ध को याद करते हो तो दिमाग मे दूसरी बात आने से दिल बदल जाता है ,फिर मेहनत करनी पड़ती है....ऐसे में कहते है हमने याद तो किया ,परमात्मा हमारा कम्पेनियन है लेकिन कम्पेनियन ने तोड़ तो निभाई नही , अनुभव तो कुछ हुआ नही... क्यों ? क्योंकि.ये दिमाग से याद किया , दिल मे स्नेह को समाया नही। याद दिमाग से होती है तो निकलती भी जल्दी है लेकिन दिल मे समाई हुई याद को चाहे सारी दुनिया भी दिल से निकालना चाहे तो भी नही निकाल सकते। हर सम्बन्ध को स्नेह से , दिल से अनुभव करो.. जिस समय , जिस सम्बन्ध की आवश्यकता है उसी प्रमाण दिल से याद करो जैसे आवश्यकता है फ्रेंड की और याद करो बाप के रूप में तो मज़ा नही आएगा । स्नेह से जिस सम्बन्ध की अनुभूति चाहिए, उसे दिल से अनुभव करो तो मेहनत भी नही लगेगी , बोर भी नही होंगे, सदा मनोरंजन होता रहेगा। अब मेहनत से निकलो। अपने स्वमान तो देखो, परमात्मा का कितना प्यार है आप सबसे प्यार है तब तो पत्र लिखते है अर्थात मुरली में उत्तर भी देते है और याद प्यार भी देते है,अगर कोई क्वेश्चन उठता है , कोई समस्या सामने आती है ,आप सोचते हो और सूक्ष्म वतन के कम्प्यूटर में आ जाता है तो मुरली से आपको रेस्पॉन्स मिलता है। बेहद के पत्र में सबके क्वेश्चन का उत्तर होता है सिर्फ दूसरे दिन की मुरली को उस विधि से देखो कि जो मैंने सोचा उसका उत्तर क्या है ? * मनमनाभव का अर्थ - Soul talk Ep.15 * परम आत्मा की महिमा ही है मुश्किल को सहज करने वाले, ऐसा बाप आपके साथ है साथी के रूप में तो कोई मुश्किल हो सकती है? फिर क्यों मुश्किल करते हो? बाप स्वयं आफर करते है कि जिस समय जैसा सम्बन्ध चाहिए वैसे रूप में साथी बनाओँ फिर भी किनारा कर देते हो और कहते हो कि बोरिंग लाइफ हो गई है अकेलापन फील होता है , श्रेष्ठ जीवन साधारण जीवन अनुभव होता है , कुछ चेंज चाहिए। वैसे तो एक तरफ बाप को खुश करने के लिए कहते है कि हम तो कम्बाइंड है और फिर दूसरी तरफ कहते है अकेले हो गए हैं । कम्बाइंड कभी अकेला और बोर हो सकता है क्या? ज्ञान सागर को दिल से कम्पेनियन नही बनाया है क्या ? कितना भी गहरा काला बादल सूर्य की रोशनी को छिपाने वाला हो लेकिन आपके पास ऑटोमैटिक डायरेक्ट परमात्म लाइट का कनेक्शन है सिर्फ चेक करो कि लाइन कलीयर है या कोई लीकेज है। डायरेक्ट लाइन में इतनी लाइट है कि स्वयं तो लाइट में होंगे ही लेकिन औरों के लिए भी लाइट हाउस हो जाएंगे। बाप से मिले अपने स्वमान और प्राप्तियों की स्मृति के स्विच ऑन करो तो अंधकार भाग जाएगा। जब सहारे को और अनुभव को किनारे कर देते हो तो मेहनत करनी पड़ती है । मार्ग मेहनत का नही है लेकिन हाई वे की बजाय गलियों में चले जाते हो व मंज़िल के निशाने से आगे बढ़ जाते हो तो लौटने की मेहनत करनी पड़ती है। परमात्मा स्नेह और सहयोग से मंज़िल की ओर लेकर जा रहे है फिर भी साथी को छोड़ देते हो। बाप के लव में लीन हो जाओ , लवलीन होकर हर कार्य करो तो मेहनत समाप्त हो जाये। ( अव्यक्त बापदादा : 18.2.94 ) 1. मैं आत्मा हूँ। 2. मैं आत्मा सर्व शक्तियों से सम्पन्न हूँ। 3. मैं आत्मा परमपिता परमात्मा की संतान हूँ। 4. मैं आत्मा भगवान के नयनो का नूर हूँ। ---- Useful links ---- शिव बाबा को कैसे याद करे ? शिव बाबा की मुरली और याद का पुरुषार्थ आज की मुरली से कविता BK Articles - Hindi & English Articles & Question-Answers Blog . #brahmakumari #Hindi #brahmakumaris
- स्वमान और पुरुषार्थ क्लास BK Suraj bhai
पुरुषार्थ और स्वमान अभ्यास पर ब्रह्माकुमार सूरज भाई के क्लास से लिए गए 16 पॉइंट्स। बाबा ने भाई द्वारा इस क्लास में पुरुषार्थ के लिए बहुत प्रेरणाएं दी है। सभी ब्रह्माकुमारी व कुमार जरूर पढ़े और SHARE करे। 16 important (main) points from BK Suraj bhai's class. आज बाबा ने सूरज भाई जी द्वारा ब्राह्मणों को अपसेट से सेट होने की विधि बताई, स्वमान की सीट पर सेट रहने के लिए कुछ बातों पर घ्यान देना जरूरी है:- 【1】हमारी स्थिति से ही हम परिस्थिति पर विजय प्राप्त सकते हैं। हम यदि छोटी-छोटी बातों में अपसेट होंगे तो श्रेष्ठ स्थिति कभी नहीं बन पाएगी। 【2】बाबा ने कहा है कि जो स्वमान की सीट पर सेट हैं, कभी अपसेट नहीं होते उनकी जिम्मेदारी स्वय परमात्मा लेते हैं। जो सदा अपसेट रहते हैं उनकी जिम्मेदारी कभी नहीं लेते हैं। 【3】अभी कलियुग है, चारों ओर तमोप्रधानता ही तमोप्रधानता है, चारों तमोगुणी आत्माएं अभी तो और बढ़ना है, इस सब को स्वीकार करना है, इस समय हमें दूसरों को न देख स्वय को देखना है, जितनी स्वस्थिति श्रेष्ठ होगी, उतनी हमारे और हमारे घर परिवार कि स्थिति श्रेष्ठ होगी। 【4】संगमयुग पर जिसने अपने चित्त को शांत करना सीख लिया उसे कोई भी परिस्थिति अपसेट नहीं कर सकती है। इसके लिए अपने विचारों को महान बनना है। हमारे महान विचार ही संसार को रोशन करेंगे। 【5】हर परिस्थिति में चुप रहना है। जिसने चुप रहना सीख लिया वो शक्तिशाली आत्मा है। हर आत्मा अपना अपना पार्ट बजा रही है। किसी के पार्ट को नहीं देखना है। 【6】कभी अमृतवेला मिस नहीं करना है। वो समय अपनी आत्मा को भरपूर करना है। शक्तियों से व वरदानों से भरना है। फिर पुरे दिन परिस्थिति में अपसेट नहीं होंगे। 【7】ट्रैफिक कंट्रोल के समय तीन मिनट मैं मास्टर ज्ञान सूर्य हूं, ज्ञान सागर से किरणें ले फिर पुरे घर पर फैलाए तो घर के विघ्न दूर हो जाएंगे। 【8】कोई भी विघ्न या समस्या आए तो 21 दिन की भट्ठी करें- "मैं विध्न विनाशक आत्मा हूं" तो सब विघ्न दूर होंगे यह भट्ठी सब कर सकते हैं। 【9】भाग्य विधाता बाप साथ है, वो हमारा साथी बना है, उसको साथ रखें। कभी भी कोई परिस्थिति आए तो बाबा को बहुत प्यार से बुलाओ- मीठे बाबा आ जाओ.. वो हमारे स्नेह में बंधा हुआ है। 【10】बाप-दादा का घर पर कम से कम 5 बार आह्वान करें, बाबा के साथ सारे घर पर चक्र लगाए, पुरे घर में शांति की, कभी पवित्रता की किरणें फैलाए। 【11】बुद्धि को कुड़ा-दान मत बनाओ, बुद्धि को सोने का बर्तन बनाओ, ज्ञान रत्नो से भरपूर करो, वरदानों से, शक्तियों से भरो। बुद्धि में व्यर्थ बातों से मत भरो। 【12】बातें बड़ी नहीं होती, हम सोच-सोच कर बड़ा बना देते हैं। इसलिए अपनी स्थिति को बड़ा बनना है। हमारी स्थिति, परिस्थिति से ऊंची है। 【13】बातों को पकड़ कर नहीं रखना है। जो बीत गया वो पार्ट हो गया, इसलिए उसे याद कर नहीं करो। 【14】घरों के माहौल को शांत रखें। एक-दो कि मदद करें, घर में हर आत्मा को स्वीकार करना है, कोई की भी बुराई नहीं करनी है। 【15】अपने को सुखी रखना हमारे हाथ में है। आगे परिवर्तन का समय तेजी से आ रहा है। एक तरफ जय जयकार होगी और दूसरी तरफ हाहाकार। 【16】हमें अपने को महान बनना है। हमें संसार की आत्माओं की सेवा करनी है। छोटी-छोटी बातों में अपसेट नहीं होना है, आगे बढ़ना है। अपनी स्थिति को महान बनना है। * शुक्रिया बाबा शुक्रिया * * ''Swamaan'' - BK Suraj bhai class * ---- Useful links ---- Audio Classes (playlist) - Hindi & English Daily Gyan Murli - Audio Daily Murli Poems RESOURCES - Everything Audio Get our mobile apps . #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi
- आज का पुरुषार्थ 14 April 2019
★【 आज का पुरूषार्थ】★ Hear Aaj Ka Purusharth from Peace of Mind TV channel for 14 April 2019. Watch PMTV Live Topic: 'Ekagrata' (Power of Concentration) बाबा कहते हैं ... बच्चे, एकाग्रता की शक्ति को बढ़ाओ, क्योंकि समय अनुसार एकाग्रता की शक्ति की अत्यधिक आवश्यकता है। एकाग्रता की शक्ति वाला ही अचानक के paper में pass हो पायेगा। यदि अभी-अभी पुरूषार्थ खत्म हो जायें, तो आपकी result क्या होगी...? देखो बच्चे, पुरूषार्थ इसी तरह अचानक ही खत्म होगा...! और जिस बच्चे ने स्व-स्थिति के आसन पर अर्थात् ऊँच स्वमान में स्थित होने का और बाप को अपने संग रखने का अभ्यास किया होगा, वो ही अचानक के paper में pass होगा। बच्चे सोचते हैं कि हम अचानक के paper में तो pass हो जायेंगे...! परन्तु अचानक का paper बहुत भयानक होगा...। जिस बात में आप कमज़ोर हो, अचानक का paper उसी बात का आयेगा ... और वो समय स्वयं के साथ-साथ बाप की याद भुलाने वाला होगा ... वो समय ऐसा होगा जिसमें आप विस्मृत हो जाओगे अर्थात् आप स्वयं ही परिस्थिति में या उस समय के बहाव में इतना ज्यादा उलझ जाओगे कि स्वयं की याद और बाप की याद भूल जायेगी...! परन्तु जो बच्चा अभी से ही..., • अपने ऊँच स्वमान में स्थित होने की drill बार-बार कर रहा है... • और साथ ही साथ अशरीरी बन अपने बाप (परमात्मा पिता) के पास घर जाने का भी पुरूषार्थ कर रहा है... • अर्थात् जो स्वयं को आत्मा realize कर, बाप के साथ सर्व सम्बन्ध जोड़ने का पुरूषार्थ कर रहा है... • अर्थात् बाप की श्रीमत पर चलने का 100% attention दे रहा है..., वो ही बच्चा अचानक के paper में बाप की मदद से ‘PASS WITH HONOUR‘ बन पायेगा...। इसलिए बच्चे, • स्मृति स्वरूप बनो...। • मन-बुद्धि को एकाग्र करने का अभ्यास बढ़ाओ...। बाबा बार-बार कह रहा है कि अचानक ... अचानक ... अचानक ...। तो इस बात की importance अर्थात् समय के महत्व को समझ ... बाप की समझानी के महत्व को समझ, पुरूषार्थ करो ... अन्यथा बाप भी कुछ नहीं कर पायेगा...। अन्तकाल आप अकेले हो जाओगे और वो घड़ी केवल पश्चाताप की होगी...। इसलिए सोच-समझकर अपने एक-एक second को सफल करो। अभी का पुरूषार्थ ही अन्तिम विजय का आधार है...। *अच्छा। ओम् शान्ति।* *【 Peace Of Mind TV 】* ---- Useful links ---- Aaj Ka Purusharth Audio Daily Murli Poems Online Service (many) Video Gallery - Hindi & English BK Google - Search the Divine . #Murli #brahmakumari #brahmakumaris
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