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6 Feb 2019 आज की मुरली से कविता (Today Murli Poem)


Hindi Poem from today's murli. Aaj ki gyan murli se ek Kavita 6 Feb 2019. This poem is daily written on day's murli by Brahma Kumar (BK) Mukesh (from Rajasthan). To read more Hindi poems written, visit Murli Poems page.

* मुरली कविता दिनांक 6.2.2019 *

घर चलना है इसलिए खुद को अशरीरी बनाना

बात करते समय भाई भाई की भावना जगाना

देहभान का अंश वंश अपने जीवन से मिटाना

मेहनत करके स्वयं को देही अभिमानी बनाना

पढ़ाई है भविष्य राजतिलक पाने का आधार

पढ़ाई पर ध्यान देकर स्वयं पर करना उपकार

श्रीमत पर चलते चलो बाप में रखकर विश्वास

पढ़ाई छोड़कर नहीं होना बच्चों तुम्हें नापास

शिवबाबा ही एकमात्र सुप्रीम टीचर कहलाते

ऐसा कोई पढ़ा ना सके जैसा बाप हमें पढ़ाते

बाप और बच्चे दोनों परमधाम वासी कहलाते

पार्ट बजाने बच्चे आते बाप वतन में रह जाते

पार्ट बजाते बजाते जब बच्चे पतित बन जाते

पतित से पावन बनना बाप ही आकर सिखाते

प्रवृत्ति में रहते ज्ञान योग की रेस करते जाओ

किसी और के कारण से ठहर नहीं तुम जाओ

बाप से ज्ञान रत्न पाकर मालामाल हो जाओ

राजतिलक देने के योग्य खुद को तुम बनाओ

बहुत धूमधाम से बच्चों शिव जयन्ती मनाओ

अपने सभी भण्डारों को भरपूर करते जाओ

सर्व पदार्थों के प्रति मन में अनासक्ति जगाओ

अल्पकाल के साधनों का आकर्षण मिटाओ

अनासक्ति भाव से जब न्यारे तुम बन जाओगे

इन्द्रियजीत बनकर प्रकृतिजीत कहलाओगे

मेरे-मेरे के सभी झमेलों से जो आजादी पाता

सिर्फ वही बच्चा विश्व कल्याणकारी कहलाता

*ॐ शांति*

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