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  • Question Answers from Murli (Hindi)

    ज्ञान मुरली से कुछ प्रश्न उत्तर - जरूर सभी ब्रह्माकुमारी व कुमार इसे पढ़े और दुसरो को SHARE करे। Question Answers from Shiv Baba's Gyan murli. Every BrahmaKumari and Kumar should read this. Do SHARE. Also visit Question Answers from Murli PDF and Murli Dictionary (meaning of words in Murli) ओम् शान्ति बापदादा मधुबन 1. प्रश्न - मीठे बच्चे - अब वापिस जाना है इसलिए क्या करो? उत्तर:- पुरानी देह और पुरानी दुनिया से उपराम बनो, अपनी बैटरी चार्ज करने के लिए योग की भट्ठी में बैठो' 2. प्रश्नः- योग में बाप की पूरी करेन्ट किन बच्चों को मिलती है?* उत्तर:- जिनकी बुद्धि बाहर में नहीं भटकती। अपने को आत्मा समझ बाप की याद में रहते हैं, उन्हें बाप की करेन्ट मिलती है। बाबा बच्चों को सकाश देते हैं। बच्चों का काम है बाप की करेन्ट को कैच करना क्योंकि उस करेन्ट से ही आत्मा रूपी बैटरी चार्ज होगी, ताकत आयेगी, विकर्म विनाश होंगे। इसे ही योग की अग्नि कहा जाता है, इसका अभ्यास करना है। ओम् शान्ति। 3. प्रश्न - भगवानुवाच। अब बच्चों को क्या याद पड़ता है? उत्तर - घर भी याद पड़ता है। 4. प्रश्न - बाप किसकी बात सुनायेंगे?* उत्तर - बाप तो घर की और राजधानी की बात ही सुनायेंगे और बच्चे भी इन बातों को समझते हैं कि हम आत्माओं का घर कौन-सा है? आत्मा क्या है? 5. प्रश्न - यह भी अच्छी रीति समझ गये हैं, क्या? उत्तर - कि बाबा हमको आकरके पढ़ाते हैं। 6. प्रश्न - बाप कहाँ से आते हैं? उत्तर - परमधाम से। ऐसे नहीं कहेंगे पावन दुनिया बनाने कोई पावन दुनिया से आते हैं। नहीं। 7. प्रश्न - बाप क्या कहते हैं? उत्तर - मैं सतयुगी पावन दुनिया से नहीं आया हूँ, मैं तो घर से आया हूँ, जिस घर से तुम बच्चे आये हो पार्ट बजाने। 8. प्रश्न - मैं भी ड्रामा प्लैन अनुसार हर 5 हजार वर्ष के बाद क्या करता हूँ? उत्तर - घर से आता हूँ। मैं रहता ही घर में, परमधाम में हूँ। 9. प्रश्न - बाप समझाते भी ऐसे सहज हैं, कैसे? उत्तर - जैसे बाप शहर से आये हों। कहते हैं जैसे तुम आये हो पार्ट बजाने, हम भी वहाँ से आये हैं पार्ट बजाने, ड्रामा प्लैन अनुसार। मैं नॉलेजफुल हूँ। सब बातों को मैं जानता हूँ - ड्रामा प्लैन अनुसार। 10. प्रश्न - कल्प-कल्प मैं यही बात तुमको सुनाता हूँ, कब?* उत्तर - जब तुम काम चिता पर चढ़कर काले, भस्म हो जाते हो। आग में मनुष्य काले हो जाते हैं ना। तुम भी सांवरे हो गये हो। सतोप्रधान वाली ताकत सारी निकल गई है। 11. प्रश्न - आत्मा की बैटरी ऐसी न हो, कैसी? उत्तर - जो एकदम डिस्चार्ज हो जाये और मोटर खड़ी हो जाए। 12. प्रश्न - इस समय सभी के डिस्चार्ज होने का समय आ गया है, तब बाप क्या कहते हैं?* उत्तर - ड्रामा अनुसार मैं आता हूँ जो आदि सनातन देवी-देवता धर्म के हैं उन्हों की बैटरी चार्ज होती है। 13. प्रश्न:-तुम्हारी बैटरी अभी चार्ज होनी है जरूर। ऐसे भी नहीं, कैसे? उत्तर:- सिर्फ सुबह को यहाँ आकर बैठने से बैटरी चार्ज हो सकेगी। नहीं, *बैटरी चार्ज तो उठते, बैठते, चलते भी हो सकती है - याद में रहने से। 14. प्रश्न - तुम पहले कौन-सी आत्मा थी? उत्तर - पवित्र आत्मा सतोप्रधान थी। सच्चा सोना, सच्चा जेवर थी। अभी तमोप्रधान हो गये हैं। 15. प्रश्न - अब फिर आत्मा सतोप्रधान बनती है तो शरीर भी प्योर मिलेगा। यह बड़ी सहज प्योर होने लिए भट्ठी है, इसको क्या कह सकते हैं? उत्तर - योग की भट्ठी भी कह सकते हैं। 16. प्रश्न:- सोने को भी भट्ठी में डालते हैं। यह कौन-सी भट्टी है? उत्तर:- सोने को शुद्ध बनाने की भट्ठी, बाप को याद करने की भट्ठी। प्योर तो जरूर बनना है। 17. प्रश्न:- याद नहीं करेंगे तो इतना प्योर नहीं होंगे। फिर हिसाब-किताब चुक्तू करना ही है, क्यों? उत्तर:- क्योंकि कयामत का समय है। सबको घर जाना है। बुद्धि में घर की याद बैठी हुई है। और किसकी भी बुद्धि में नहीं होगा। 18. प्रश्न:- वह ब्रह्म को क्या कह देते हैं? उत्तर:- ईश्वर कह देते हैं, उसको घर नहीं समझते। 19. प्रश्न:- तुम इस बेहद ड्रामा के एक्टर हो, ड्रामा को तो तुम अच्छी रीति जान गये हो। बाप ने क्या समझाया है? उत्तर:- अभी 84 का चक्र पूरा होता है, अब घर जाना है। 20. प्रश्न:- आत्मा अब पतित है, इसलिए क्या करती है? उत्तर:- घर जाने के लिए पुकारती है - बाबा आकर पावन बनाओ। नहीं तो हम जा नहीं सकते हैं। 21. प्रश्न:- बाप ही बैठ यह बातें बच्चों को समझाते हैं। यह भी बच्चे समझ गये हैं, तब उनको क्या कहते हैं? उत्तर:- पिता-पिता कहते हैं। टीचर भी कहते हैं। मनुष्य तो कृष्ण को टीचर समझते हैं। 22. प्रश्न:- तुम बच्चे समझते हो कृष्ण तो खुद पढ़ता था, सतयुग में। कृष्ण कभी क्या नहीं बना है? उत्तर:- किसका टीचर बना नहीं है। ऐसे भी नहीं - पढ़कर फिर टीचर बना। 23. प्रश्न:- कृष्ण की बचपन से लेकर बड़ेपन तक की कहानी कौन जानता है? उत्तर:- तुम बच्चे ही जानते हो। 24. प्रश्न:- मनुष्य तो कृष्ण को भगवान् समझकर क्या कह देते हैं? उत्तर:- जिधर देखो कृष्ण ही कृष्ण है। राम के भक्त कहेंगे जिधर देखो राम ही राम है। धागा (सूत) ही मूँझ गया है। 25. प्रश्न:- तुम अब जानते हो भारत का प्राचीन योग और ज्ञान कैसा है? उत्तर:- मशहूर है। मनुष्य कुछ नहीं जानते। 26. प्रश्न:-ज्ञान सागर एक बाप है वह तुम बच्चों को ज्ञान देते हैं। तो तुमको भी क्या कहेंगे? उत्तर:-मास्टर ज्ञान सागर कहेंगे। परन्तु नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार। 27. प्रश्न:- सागर कहें या नदी कहें? उत्तर:- तुम हो ज्ञान गंगायें, इसमें भी मनुष्य मूँझते हैं। मास्टर ज्ञान सागर कहना बिल्कुल ठीक है। 28. प्रश्न:- बाप बच्चों को पढ़ाते हैं, इसमें कौन-सी बात नहीं? उत्तर:- मेल-फीमेल की बात नहीं। 29. प्रश्न:-वर्सा भी तुम सब आत्मायें लेती हो इसलिए बाप क्या कहते हैं? उत्तर:- देही-अभिमानी बनो। 30. प्रश्न:-जैसे मैं परम आत्मा ज्ञान सागर वैसे तुम भी क्या हो? उत्तर:-ज्ञान सागर हो। मुझे परमपिता परमात्मा कहा जाता है, मेरी ड्युटी सबसे ऊंची है। 31. प्रश्न:-राजा-रानी की ड्युटी भी कैसी होती है? उत्तर:-सबसे ऊंची होती है ना। तुम्हारी भी ऊंची रखी गई है। 32. प्रश्न:- यहाँ तुम जानते हो, क्या जानते हो? उत्तर:- हम आत्मायें पढ़ती हैं, परमात्मा पढ़ाते हैं इसलिए देही-अभिमानी भव। सब ब्रदर्स हो जाते हैं। बाप कितनी मेहनत करते हैं। 33. प्रश्न:- अभी तुम आत्मायें ज्ञान ले रही हो। फिर वहाँ जायेंगी तो क्या होता है? उत्तर:- प्रालब्ध चलती है। वहाँ सबका ब्रदर्ली प्रेम रहता है। 34. प्रश्न:- ब्रदर्ली प्रेम कैसा चाहिए? उत्तर:- बहुत अच्छा चाहिए। किसको रिगार्ड देना, किसको न देना.... ऐसा नहीं। 35. प्रश्न:- वो लोग कहते हैं - हिन्दू-मुसलमान भाई-भाई परन्तु एक-दो को वह क्या नहीं देते हैं? उत्तर:- रिगार्ड नहीं देते हैं। बहन-भाई नहीं, भाई-भाई कहना ठीक है। ब्रदरहुड। 36. प्रश्न:- आत्मा यहाँ पार्ट बजाने आई है। वहाँ भी भाई-भाई होकर रहती है। घर में जरूर सब कैसे रहेंगे? उत्तर:-भाई-भाई होकर रहेंगे। 37. प्रश्न:- बहन-भाई, यह चोला तो क्या करना पड़ता है? उत्तर:- यहाँ छोड़ना पड़ता है। भाई-भाई का ज्ञान बाप ही देते हैं। आत्मा भ्रकुटी के बीच रहती है। तुमको भी नज़र यहाँ डालनी है। 38. प्रश्न:- समझने की बातें कौन-सी हैं?* उत्तर:- हम आत्मा शरीर रूपी तख्त पर बैठे हैं। यह आत्मा का सिंहासन वा अकाल तख्त है। आत्मा को कभी काल खाता नहीं। *सबका तख्त यह है - भ्रकुटी के बीच।* इस पर वह अकाल आत्मा बैठी है। कितनी समझने की बातें हैं। 39. प्रश्न:- बच्चे में भी आत्मा जाती है तो भ्रकुटी के बीच में बैठती है। वो तख्त कैसा है? उत्तर:- वो छोटा तख्त फिर बड़ा होता जाता है। 40. प्रश्न:- यहाँ गर्भ में आत्मा को भोगना भोगनी पड़ती है तब क्या करते हैं? उत्तर:- पश्चाताप् करते हैं - हम कभी पाप आत्मा नहीं बनेंगे। 41. प्रश्न:- आधाकल्प...... आत्मा बनते हैं। अब बाप द्वारा ...... आत्मा बनते हैं।? उत्तर:- पाप, पावन 42. प्रश्न:- तुम तन-मन-धन सब कुछ बाप को देते हो, इतना दान कोई जानते नहीं। दान लेने और देने वाला भी कहाँ आता है? उत्तर:- भारत में ही आता है। यह सब महीन बातें हैं समझने की। 43. प्रश्न:- भारत कितना क्या बना है? उत्तर:- अविनाशी खण्ड बना है और सब खण्ड खत्म होने वाले हैं। यह बना-बनाया ड्रामा है। यह तुम्हारी बुद्धि में है। दुनिया नहीं जानती, इनको नॉलेज कहना अच्छा है। 44. प्रश्न:-नॉलेज इज सोर्स ऑफ इनकम, इनसे इनकम बहुत होती है, कैसे? उत्तर:- बाप को याद करो, यह भी नॉलेज देते हैं फिर सृष्टि चक्र की भी नॉलेज देते हैं। इसमें मेहनत है। 45. प्रश्न:- हम आत्माओं को अब वापिस जाना है इसलिए कैसे रहना है? उत्तर:- इस पुरानी दुनिया और पुराने शरीर से उपराम रहना है। देह सहित जो कुछ देखते हो सब खलास हो जाना है। अभी हम ट्रांसफर होते हैं। यह तो बाप ही बता सकेंगे। 45. प्रश्न:- यह बहुत बड़ा इम्तहान है, जो बाप ही पढ़ाते हैं। इसमें किसकी दरकार नहीं?* उत्तर:- किताब आदि की दरकार नहीं। बाप को याद करना है। बाप 84 का चक्र समझा देते हैं। ड्रामा की ड्युरेशन को तो कोई जानते नहीं। घोर अन्धियारे में हैं। 46. प्रश्न:- तुम अभी , ...... हो, मनुष्य तो ......... नहीं हैं।?* उत्तर:- जगे, जगते 47. प्रश्न:- कितनी तुम मेहनत करते हो, विश्वास नहीं करते, किस बात का? उत्तर:- कि भगवान् आकर इन्हों को पढ़ाते हैं। जरूर कोई में तो आयेंगे ना। 48. प्रश्न:-अब बाप आत्माओं को क्या राय देते हैं? उत्तर:- ऐसे-ऐसे करो जो मनुष्य समझ जायें। तुम्हारे लिए तो सहज है, नम्बरवार तो हैं ही। स्कूल में भी नम्बरवार होते हैं। पढ़ाई में भी नम्बरवार होते हैं। 49. प्रश्न:- इस पढ़ाई से क्या स्थापन हो रही है? उत्तर:- बड़ी राजाई स्थापन हो रही है। 50. प्रश्न:- ईश्वरीय लॉटरी किसको कहा जाता है? उत्तर:- पुरूषार्थ ऐसा करना है, जो हम राजा बने। इस समय जो तुम पुरूषार्थ करेंगे वह कल्प-कल्पान्तर करते रहेंगे। *इसको ईश्वरीय लॉटरी कहा जाता है। 51. प्रश्न:- किसको थोड़ी, किसको बड़ी लॉटरी होती है। राजाई की भी क्या है? उत्तर:- लॉटरी है। आत्मा जैसा कर्म करती है, ऐसी लॉटरी मिलती है। कोई गरीब बनते हैं, कोई साहूकार बनते हैं। 52. प्रश्न:- इस समय तुम बच्चों को सारी ........ बाप से मिलती है।? उत्तर:- लॉटरी। 53. प्रश्न:- इस समय के पुरूषार्थ पर बहुत मदार है। नम्बरवन पुरूषार्थ कौन-सा है? उत्तर:- याद का। तो पहले योगबल से स्वच्छ तो बनें। 54. प्रश्न:- तुम जानते हो जितना हम बाप को याद करेंगे उतना क्या होगा? उत्तर:- उतनी नॉलेज की धारणा होगी और बहुतों को समझाकर अपनी प्रजा बनायेंगे। 55. प्रश्न:- भल कोई भी धर्म वाला हो, जब आपस में मिलते हो तो क्या करो? उत्तर:- बाप का परिचय दो। आगे चल वह देखेंगे कि विनाश सामने खड़ा है। 56. प्रश्न:- विनाश के समय मनुष्यों को वैराग्य आता है। हमको सिर्फ क्या कहना है? उत्तर:- तुम आत्मा हो। हे गॉड फादर! किसने कहा? आत्मा ने। 57. प्रश्न:- अब बाप आत्माओं को क्या कहते हैं? उत्तर:- कि मैं तुम्हारा गाइड बनकर तुमको ले जाऊंगा, मुक्तिधाम में। *बाकी आत्मा का कभी विनाश नहीं होता तो मोक्ष का भी क्वेश्चन नहीं। 58. प्रश्न:- हर एक को अपना-अपना पार्ट बजाना है। आत्मायें सब कैसी हैं? उत्तर:- इमार्टल, कभी भी विनाश नहीं होंगी। 59. प्रश्न:- बाकी वहाँ जाने के लिए क्या करो? उत्तर:-बाप को याद करो तो विकर्म विनाश होंगे। घर चले जायेंगे। 60. प्रश्न:-आखरीन बड़े-बड़े सन्यासी भी समझेंगे, क्या समझेंगे? उत्तर:-वापिस तो सबको जाना है। 61. प्रश्न:- तुम्हारा पैगाम सबकी बुद्धियों में क्या करेगा? उत्तर:- ठका करेगा, तब तो गायन है - अहो प्रभू...तुम्हरी गत मत, तो जरूर किसको मत देंगे या अपने पास रखेंगे? उनकी मत से सद्गति कैसे होती है, सो जरूर बतायेगा ना। 62. प्रश्न:- फिर वह क्या कहते हैं? उत्तर:- तुम्हरी गति-मत तुम जानो, हम नहीं जानते हैं। यह भी कोई बात है! 63. प्रश्न:- बाप क्या कहते हैं? उत्तर:- इस श्रीमत से तुम्हारी गति हो जाती है। अभी तुम जानते हो बाबा जो जानते हैं वह हमको सिखलाते हैं। 64. प्रश्न:- तुम क्या कहेंगे? उत्तर:- हम बाबा को जानते हैं। 65. प्रश्न:- वो गाते हैं तुम्हरी गति-मत तुम जानो। परन्तु तुम क्या कहेंगे? उत्तर:- ऐसे नहीं कहेंगे। बुद्धि में सारा ज्ञान बैठ जाये, इसमें भी टाइम लगता है। 66. प्रश्न:- सम्पूर्ण तो अभी कोई बना नहीं है। सम्पूर्ण बन जाये तो क्या होगा? उत्तर:- यहाँ से चले जायें। जाना तो है नहीं। अब सब पुरूषार्थ कर रहे हैं। 67. प्रश्न:- बाबा को भल पहले जोर से वैराग्य आया, फिर क्या देखा? उत्तर:- डबल सिरताज बनता हूँ - यह भी ड्रामा अनुसार बाबा ने दिखाया। मैं तो झट खुश हो गया। खुशी के मारे सब कुछ छोड़ दिया। 68. प्रश्न:- विनाश भी देखा तो चतुर्भुज भी देखा। तो क्या समझा? उत्तर:- अभी राजाई मिलती है। थोड़े रोज़ में विनाश हो जायेगा। ऐसा नशा चढ़ गया। 69. प्रश्न:- अभी क्या समझते हैं? उत्तर:- यह तो ठीक है, राजधानी बनेंगी। यह बहुतों को राजाई मिलनी है। एक हम जाकर क्या करेंगे। यह ज्ञान अभी मिलता है। पहले खुशी का पारा चढ़ गया। 70. प्रश्न:- पुरूषार्थ तो सबको करना है। तुम किसलिए बैठे हो? उत्तर:- पुरूषार्थ के लिए बैठे हो। 71. प्रश्न:- सुबह को याद में बैठते हो। यह बैठना भी अच्छा है, क्यों? उत्तर:- क्योंकि जानते हो बाबा आया है। बाप आया या दादा आया, यह तो गुड़ जाने गुड़ की गोथरी जाने। 72. प्रश्न:- एक-एक बच्चे को ....... रहेंगे। एक-एक को बैठ ......... देते हैं।? उत्तर:- देखते, सकाश। योग की अग्नि है ना। योग अग्नि से उनके विकर्म भस्म हो जाएं। जैसे कि बैठकर लाइट देते हैं। 73. प्रश्न:- एक-एक आत्मा को सर्चलाइट देते हैं। जैसे बाप कहते हैं, क्या कहते हैं? उत्तर:- मैं हर एक आत्मा को बैठ करेन्ट देता हूँ तो ताकत भरती जाए। 74. प्रश्न:- अगर किसकी बुद्धि बाहर में होगी तो क्या नहीं कर सकेंगे? उत्तर:- फिर करेन्ट को कैच नहीं कर सकेंगे। बुद्धि कहाँ न कहाँ भटकती रहेगी। उनको मिलेगा फिर क्या? 75. प्रश्न:- कहते हैं मिठरा घुरत घुराय, तुम प्यार करेंगे तो क्या पायेंगे? उत्तर:- प्यार पायेंगे। 76. प्रश्न:- बुद्धि बाहर भटकती रहेगी तो क्या होगा? उत्तर:- बैटरी चार्ज नहीं होगी। 77. प्रश्न:- बाप बैटरी चार्ज करने आता है, उनका फर्ज क्या है? उत्तर:- सर्विस करना। बच्चे सर्विस स्वीकार करते हैं वा नहीं यह तो उनकी आत्मा जाने। किस ख्यालात में बैठे हैं, यह सब बातें बाप समझाते हैं। *मैं भी परम आत्मा हूँ। मुझ बैटरी के साथ योग लगाते हो। मैं भी सकाश दूंगा। बहुत प्यार से एक-एक को सकाश देता हूँ।* 78. प्रश्न:- तुम तो बैठेंगे बाप को याद करने। बाबा क्या कहते हैं? उत्तर:- मैं एक-एक आत्मा को सकाश देता हूँ। सामने बैठ लाइट देता हूँ। तुम तो ऐसे नहीं करेंगे। जो पकड़ने वाले होंगे वह पकड़ेंगे और उनकी बैटरी चार्ज़ होगी। 79. प्रश्न:- बाबा दिन-प्रतिदिन क्या बताते रहते हैं? उत्तर:- युक्तियां तो बताते रहते हैं। बाकी समझा, न समझा - यह तो नम्बरवार स्टूडेन्ट पर मदार है। 80. प्रश्न:- तुम्हें बहुत ....... माल मिल रहा है। कोई हज़म भी करे ना। बड़ी लॉटरी है।? उत्तर:- तरावटी। जन्म-जन्मान्तर, कल्प-कल्पान्तर की लॉटरी है। इस पर पूरा अटेन्शन देना है। 81. प्रश्न:- बाबा से हम क्या ले रहे हैं? उत्तर:- करेन्ट ले रहे हैं। 82. प्रश्न:- बाप भी कहाँ बैठा है? उत्तर:- भ्रकुटी के बीच में बैठा है, बाजू में। 83. प्रश्न:- तुमको भी अपने को आत्मा समझ क्या करना है? उत्तर:- बाबा को याद करना है, न कि ब्रह्मा को। 84. प्रश्न:- हम उनसे योग लगा कर बैठे हैं, इनको देखते भी किसको देखते हैं? उत्तर:- हम उनको देखते हैं। आत्मा की ही बात है ना। अच्छा! * मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते। * * धारणा के लिए मुख्य सार - 1) आत्मा को स्वच्छ बनाने के लिए सवेरे-सवेरे बाप से सर्च लाइट लेनी है, बुद्धियोग बाहर से निकाल एक बाप में लगाना है। बाप की करेन्ट को कैच करना है। 2) आपस में भाई-भाई के सच्चे लव से रहना है। सबको रिगार्ड देना है। आत्मा भाई अकाल तख्त पर विराजमान है, इसलिए भ्रकुटी में ही देखकर बात करनी है। वरदान:- बाप के संस्कारों को अपने ओरीज्नल संस्कार बनाने वाले शुभभावना, शुभकामनाधारी भव अभी तक कई बच्चों में फीलिंग के, किनारा करने के, परचिंतन करने वा सुनने के भिन्न-भिन्न संस्कार हैं, _ जिन्हें कह देते हो कि क्या करें मेरे ये संस्कार हैं...ये मेरा शब्द ही पुरुषार्थ में ढीला करता है। यह रावण की चीज़ है, मेरी नहीं। _ लेकिन जो बाप के संस्कार हैं वही ब्राह्मणों के ओरिज्नल संस्कार हैं। वह संस्कार हैं विश्वकल्याणकारी, शुभ चिंतनधारी। सबके प्रति शुभ भावना, शुभकामनाधारी। स्लोगन - जिनमें समर्थी है वही सर्व शक्तियों के खजाने के अधिकारी हैं। * ओम शांति * ~~~ Useful links ~~~ Daily Murli Poems Murli Dictionary - Meaning of Murli's words What is Gyan Murli in BrahmaKumaris? RESOURCES - Everything audio History of Yagya . #Murli #Hindi #brahmakumaris #brahmakumari

  • Conversations with GOD Audiobook

    Conversations with God (An uncommon dialogue) Book 1 was published in 1995 which became an international bestseller, a life-changing book later translated in 37 languages. CWG Book 1 began a series that has changed millions of lives worldwide since then. Here we present you the Audiobooks of Book 1 and Book 2 which you can hear for Free on our SoundCloud channel or watch the video version from our YouTube channel (Kaal Samrat) ✱ Introduction Suppose you could ask God the most puzzling questions about existence, and God would provide clear, understandable answers? It happened to Neale Donald Walsch. God reveals itself as all-loving, all-knowing and all-merciful God who is always here to help and support you, love you without any judgement. This appealed and transformed millions of lives and pioneered a strong initiative called - ''CWG community''. ➜ Conversations with God is Neale Donald Walsch's account of his direct conversations with God, beginning in 1992 while Walsch was immersed in a period of deep depression. He composed a letter to God in which he vented his frustrations, and much to his surprise, even shock, God answered him. ➜ Focusing on the universal truths that influence every being's life. Conversations with God guides us to push past the imagined boundaries of what we believe ourselves capable and look instead to all that we can attain as co-creators with God. ➜ Throughout this book (and the others in the series), Neale poses questions about personal issues such as prosperity, relationships and the nature of spiritual truth, with God providing clear, understandable answers. The real gift here is that, beyond Neale’s dialogue with God, you’ll realize that the messages are timeless, and that having your own conversation with God is the true subject matter. ✦ Free listen the Audiobook on SoundCloud✦ CWG Book 1, PART 1 https://soundcloud.com/brahmakumaris-bk/conversations-with-god-book-1-audiobook-part-1 Book 1, PART 2 https://soundcloud.com/brahmakumaris-bk/conversations-with-god-book-1-full-audiobook-part-2 CWG Book 2 Audiobook https://soundcloud.com/brahmakumaris-bk/conversations-with-god-audiobook-book-2 ✦How to listen on our SoundCloud channel? Answer: 1. Install SoundCloud app on your phone. 2. Login/Sign up to the app. 3. Follow above 2 links. 4. Follow our channel to get regular uploads. Listen or Watch on YouTube ✻ FULL YouTube playlist of 'Conversations with GOD' Book 1 and 2 audiobook with short audio clips on topics like Space, Time, love, God, relativity, life lessons, male-female creations, the Self as a limitless entity (soul): https://www.youtube.com/watch?v=1-2sCJNVbpQ&list=PLs-ebcevZI7lM2ndmNPywZtLeFKUhZDQb ✣✣✣ Other Useful links ✣✣✣ Free PDF Books - English & Hindi About GOD - our Supreme Father Our Articles in English and Hindi Audio Video Resources Video Library - Watch and Learn BK Google - Search engine for BKs . #english

  • माता पिता और बच्चे का सम्बन्ध

    Small Hindi Guide on Parenting for all Parents. सभी माता पिता के लिए आज के समय अनुसार गाइडेंस - अपने बच्चो की संभाल कैसे करे? माता पिता और बच्चे का सम्बन्ध कैसा होना चाहिए? ऐसा होना चाहिए। By Mind Management team. ╔══❖•ೋ° °ೋ•❖══╗ GUIDANCE on PARENTING ╚══❖•ೋ° °ೋ•❖══╝ ∴━━━✿━━Ⓜ━━✿━━━ ∴ ‍‍‍बच्चे और माता-पिता के बीच रिलेशनशिप कैसा होना चाहिये? अगर आप भी इस बारे में जानना चाहते है, तो नीचे बताएगे कुछ टिप्स आपके बहुत काम आएंगे... * हेल्दी रिलेशनशिप से बनेगी बच्चे की हेल्थ * आजकल कॉम्पिटिशन इतना बढ़ गया है कि हर माता-पिता अपने बच्चे को बेस्ट देने की कोशिश करते हैं। बच्चा अच्छे से पढ़-लिख जाये, इसलिए सबसे अच्छे स्कूल में भेजने की कोशिश करते हैं। वह यह उम्मीद करते हैं कि बच्चा स्कूल से ज्ञान के साथ-साथ अच्छा व्यव्हार भी सीखेगा। लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च की माने, तो बच्चे का अच्छी तरह से पालन-पोषण, उसे अच्छे स्कूल में भेजने से ज़्यादा ज़रूरी है। आमतौर पर सभी स्कूल एक जैसे होते हैं और अपने हर छात्र पर बराबर ध्यान देते हैं। लेकिन जिन बच्चों के माता-पिता उनका होमवर्क करने में मदद करते हैं, पढ़ाई की अहमियत समझते हैं और बच्चे के सभी स्कूल ईवेंट्स अटेंड करते हैं, उनके बच्चे दूसरे बच्चों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। ‍‍‍- अच्छा पेरेंट-चाइल्ड रिलेशनशिप है ज़रूरी - बच्चे और उसके पेरेंट के बीच का रिश्ता सबसे अच्छा और ज़रूरी बंधन होता है। यह रिश्ता बच्चे की पर्सनेलिटी, उसके व्यवहार और पसंद की नींव डालता है। यही से उसका शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का विकास होता है। (video) How to understand your child? अगर बच्चे का माता-पिता के साथ रिश्ता अच्छा हो तो, उसके कई फायदे होते हैं। जैसे- – जीवन में दूसरे लोगों से भी अच्छा रिश्ता बनना। – मुश्किल परिस्थिति में अपनी भावनाओं पर काबू रखना। – बच्चे के मानसिक, भावनात्मक और भाषा का विकास होना। – बच्चे का आशावादी और आत्मविश्वास से पूर्ण होना। – बेहतर सोशल और अकैडमिक स्किल्स होना। आप चाहे कितने भी बिज़ी हो, लेकिन अपने बच्चे के लिए समय ज़रूर निकालें। जैसे-जैसे आपके बच्चे की उम्र बढ़े तो, आप अपने पेरेंटिंग स्टाइल को भी बदल दें। बच्चे की उम्र कुछ भी हो, उससे हमेशा प्यार से बात करें और गर्मजोशी दिखाएं। उनको बातों-बातों में प्यार से यह समझाये कि आप उनसे क्या उम्मीद रखते हैं और उन्हें आगे का रास्ता दिखाये। बच्चा जो कुछ भी कहें, उसे ध्यान से सुनें और उसके प्रति हर परिस्थिति में हमदर्दी दिखाये। कोई भी समस्या हो, उसे हल करने में उसकी मदद करें। जब आप अपने बच्चे के साथ कोई भी समस्या को हल करेंगे, तो वह आपको देखकर सीखेगा कि किसी भी मुश्किल हालात में कैसा व्यवहार करना चाहिए। अपने बच्चे की छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर आप उसके करीब आ सकते हैं और उसके जीवन का सबसे अच्छा दोस्त बन सकते हैं। Mind Management Facebook group: https://fb.com/groups/mindmanagementmeditation/ (video) माता पिता की जिम्मेवारी - ब्रह्माकुमारी शिवानी (video) Responsibility of Every Parents - BK Shivani's speech ---- Useful links ---- BK Shivani's guidance on Parenting Videos of Awakening on Parenting All BK Articles - Hindi & English Video Gallery - Videos in Hindi & Eng Question-Answers & more - Forum . #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi

  • शिव बाबा को कैसे याद करे?

    प्रश्न: शिवबाबा को कहाँ, कैसे याद करें इसको स्पष्ट करें क्योंकि बाबा कभी कहते है मुझे ऊपर याद करो और कभी कहते मैं नीचे आ गया हूँ। Question: How to Remember Shiv Baba? Please clarify because sometimes Baba tells in Murli that remember me in Paramdham (silent home) and sometimes tells that I have now come here. So where to remember and How? उत्तर (Answer): मुरली में बाबा ने स्पष्ट किया है कि जब बाबा साकार तन में प्रवेश हो सन्मुख मुरली चला रहे हैं तभी मुझे उस तन में याद करना है। पहले शरीर जरुर याद आएगा क्योंकि बड़ी चीज याद करने में सहज है और उस आत्मा का आधार है, उससे ही आत्मा के गुण व कर्तव्य साकार में प्रकट होते हैं परन्तु उस देह में उपस्थित देही याने आत्मा को ही वैल्यू देनी है क्योंकि करावनहार तो अविनाशी चैतन्य आत्मा ही है । बाबा ने कई बार यह भी स्पष्ट रूप से कहा है कि ब्रह्मा तन में अवतरित मुझ निराकार को याद करो क्योंकि देह को याद करने से विकर्म विनाश नहीं होगा उसमें स्थित ज्योति बिंदु परमात्मा को याद करने से ही होगा । राजयोग की सही विधि अनुसार हमें स्वयं को निराकार ज्योतिबिंदु आत्मा समझ उस निराकार ज्योतिबिंदु परम आत्मा (सभी आत्माओ के बाप व पिता) को स्नेहयुक्त होकर याद करना है। स्नेह अथवा निःस्वार्थ प्रेम ( unconditional love ) का ही दूसरा नाम याद है । जहाँ सच्चा प्रेम नहीं वहाँ सच्ची याद भी नहीं हो सकती। Refer: परमात्मा का परिचय जब बाबा सम्मुख साकार में नहीं हैं तो उन्हें परमधाम में ही याद करना है । परमधाम तो है ही निराकारी दुनिया वहाँ तो निराकारी स्वरुप में ही याद करना है यह तो understood है। सूक्ष्म वतन है आकरी दुनिया, फरिश्तों की दुनिया वहाँ पर सूक्ष्म शरीर में निराकार को याद करना हैं। Refer: तीन दुनिया सार रूप में बाबा जब सम्मुख हैं तो साकार में निराकार को याद करें नहीं तो परमधाम में , सूक्ष्म वतन में आकार में निराकार को याद करें और परमधाम में डायरेक्ट निराकार को याद करें। जिस स्वरुप में परमात्मा को याद करते हैं स्वयं को भी उसी चोले में अर्थात स्वरुप में देखना है परन्तु चाहे कोई भी चोला हो या सम्बन्ध हो उस चोले में उपस्थित चैतन्य आत्मा की स्मृति नहीं भूलनी चाहिए नहीं तो आत्मा का पक्का कनेक्शन परमात्मा से नहीं जुड़ेगा और याद का बल भी जैसा और जितना मिलना चाहिए वैसा और उतना नहीं मिलेगा । ओम शांति... ---- Useful links ---- ७ दिवसीय राजयोग कोर्स Videos Gallery (Hindi & English) RESOURCES - Everything you need Online Services - For regular BKs Revelations from Gyan Murli BK Google - Search engine . #brahmakumari #Hindi #brahmakumaris

  • 28 March 2019 आज की मुरली से कविता (Today Murli Poem)

    Aaj ki Gyan Murli se Ek Kavita - 28 March 2019. आज की मुरली से कविता. This is poem from today's baba's murli. To access old murli poems and more, visit the Daily Murli Poems page. * मुरली कविता दिनांक 28.3.2019 * कांटो के जंगल को बाप फूलों का बगीचा बनाते नम्बर वन फैमिली प्लानिंग की विधि सिखलाते फैमिली प्लानिंग का श्रेष्ठ शास्त्र गीता कहलाती काम विकार पर जीत पाना गीता ही सिखलाती केवल गीता ज्ञान ही पतित फैमिली को मिटाता संसार को पावन फैमिली गीता का ज्ञान बनाता बाप के प्लान से होता कांटों का जंगल खलास सतयुगी बगीचे में हो जाता सुख शांति का वास अपनी अवस्था को तुम एकरस अडोल बनाओ किसी के भी नाम रूप में खुद को नहीं फंसाओ भाई-भाई की भावना से दृष्टि को पावन बनाओ रूहानी रूहाब जगाकर औरों को ज्ञान सुनाओ बाप के प्यार के लिए रूहानी धंधे को अपनाओ आसुरी निंद्रा में सोई हुई आत्माओं को जगाओ बालक सो मालिकपन की स्मृति मन में जगाओ स्वराज्य अधिकारी बन सर्व कर्मेन्द्रियाँ चलाओ मनमनाभव के मंत्र को जीवन का अंग बनाओ व्यर्थ से मुक्त होकर खजानों का अनुभव पाओ परमात्म प्यार का झूला तुम सदा झूलते जाओ उड़ती कला की मौज मनाकर श्रेष्ठ भाग्य पाओ * ॐ शांति * ---- Useful links ---- Online Services (all listed) Resources - Divine collection BK Google - A divine search engine for BKs Brahma Kumaris All useful Websites Videos Gallery - Hindi & English Main Blog - Articles, Q & A . #Murli #brahmakumaris #brahmakumari

  • 27 March 2019 आज की मुरली से कविता (Today Murli Poem)

    Aaj ki Gyan Murli se Ek Kavita - 27 March 2019. आज की मुरली से कविता. This is poem from today's baba's murli. To access old murli poems and more, visit the Daily Murli Poems page. * मुरली कविता दिनांक 27.03.2019 * बच्चों वानप्रस्थी बनकर वाणी से परे हो जाओ घर वापसी के लिए तुम पावन खुद को बनाओ बच्चों संभलकर रहना दृष्टि से धोखा ना खाना आत्मभान में रहकर बाप को याद करते जाना भाई भाई की दृष्टि का अभ्यास हर रोज बढ़ाना एकान्त में बैठकर तुम अपने आपसे बतियाना काम महाशत्रु से बच्चों तुम्हें रहना है खबरदार आंखें क्रिमिनल बनाकर बिगाड़ेगा हर संस्कार खुद को पावन बनाने की लगाओ मन में लगन हर विकार को भस्म करो जलाकर योग अगन पावन बनने की बात पर संसार में हंगामा होता विकार के कारण ही अबलाओं पर जुल्म होता बाप समझाते मैं आया बच्चों को पावन बनाने योगबल से बच्चों की वानप्रस्थ अवस्था जमाने स्वर्ग का वर्सा पाने बच्चे बाप के पास ही आते वर्सा पाना है तो क्यों ना पावन खुद को बनाते पवित्रता बनने के हुक्म की नहीं करना अवज्ञा बापदादा के आगे करो पवित्र रहने की प्रतिज्ञा ड्रामा की भावी समझकर निश्चिन्त होते जाओ विनाश होने से पहले पैगाम बाप का पहुंचाओ बाबा शब्द की याद से जब सेवा करते जाओगे सच्चे सच्चे सेवाधारी बच्चों तब ही कहलाओगे दिल से बाबा कहकर खुशी अविनाशी पाओगे दिमाग से बाबा कहकर स्थाई खुशी ना पाओगे परमात्मा रूपी शमा पर बच्चों फिदा हो जाओ सम्पूर्ण समर्पण होकर सच्चे परवाने कहलाओ * ॐ शांति * ---- Useful links ---- Online Services (all listed) Resources - Divine collection BK Google - A divine search engine for BKs Brahma Kumaris All useful Websites Videos Gallery - YouTube playlist Main Blog - Articles, Q & A . #Murli #Hindi #brahmakumaris #brahmakumari

  • 16 Celestial Degree of Soul (16 Kala)

    16 celestial degrees of Soul (16 kala - आत्मा के १६ कला) - Our original quality as we had in the beginning of cycle (in Golden age/Satyug). Also visit 8 Powers of Soul Recognise the 16 Kala of Soul 1. ART OF RELAXATION ( आराम करने की कला ) If we live our life with the definite belief that the Supreme Soul is the real director and actor and we are only His instruments, we can always remain contented and relaxed even in illness. The knowledge that this is all on account of our own past deeds enables us to be stable in varying-situations. 2. ART OF DEALING OR BEHAVIOR ( दैवीय व्यवहार करने की कला ) Our behaviour towards all should be such that it is full of natural and selfless love, respect, divine family feeling and sweetness. 3. ART OF KEEPING HEALTHY ( स्वस्थ्य रहने की कला ) Performing all deeds in soul- conscious stage is the key to be healthy. Understanding the deep secret of drama and remaining happy in all situations- is the art of keeping healthy. 4. ART OF TEACHING ( सिखाने की कला ) The essence of art of teaching is loveful behaviour. Read What is Murli in BrahmaKumaris 5. ART OF LETTER WRITING ( लिखने की कला ) Baba's letters used to be the source of inspiration in everybody's life. Baba's letters created desire for repeated reading. Baba used to win hearts through his letters. 6. THE ART OF SUSTENANCE ( पालना करने की कला ) Like a mother Baba used to bring up and guide the children with great love, sacrifice, service and with tirelessness. Read the History of Yagya 7. ART OF MARCHING AHEAD & INSPIRING OTHERS ( आगे बढ़ने व बढ़ाने की कला ) Whatever challenges (tests) come on the way, always go on marching ahead to the goal. 8. ART OF ENTERTAINMENT ( मनोरंजन की कला ) --- Baba used to entertain and make children laugh while imparting knowledge. 9. ART OF SWEET TALKING ( मधुर बोलने की कला ) With sweet words, a person crosses many difficult situations. In soul-conscious stage, a man always speaks sweet words. 10. THE ART OF CREATING HOPE ( दूसरों को अपना बनाने की कला ) --- Bringing warmth in relations. Baba used to fill hope in hopeless souls. This is filling the needful souls with powers through the service of mind and also by writing letters. Visit Email Letters responded (Forum) 11. THE ART OF LEADERSHIP ( नेतृत्व करने की कला ) Leader's task is to awaken people and encourage them to progress. Baba effortlessly turned every effort- maker into a leader or a teacher. (video) SEVEN VIRTUES OF SOUL - Soul Reflections Ep. 80 12. THE ART OF Learning ( सीखने की कला ) -- Learning implies transformation in one's life. Brahma Baba, even after attaining old age, always used to consider himself just a student. Learning needs inquisitiveness. Visit Biography of great souls 13. THE ART OF Accommodation ( परिवर्तन करने की कला ) Baba used to say that after understanding one's duty and aim of life, it is not difficult to mould oneself and transforming one's life style and the old sanskars. In Brahma Baba's own life, such transformation was evident. 14. THE ART OF CHANGING WASTE INTO BEST ( व्यर्थ से समर्थ करने की कला ) After making others to give up their old sanskars (tendencies) and old habits, Baba used to inspire them to transform these into good habits. He always uphold the pious thought to transform the vicious world into viceless. 15. THE ART OF ADMINISTRATION ( प्रशासन करने की कला ) The greatest artist or administrator is one who can complete a task with minimum means. Baba's motto was- 'Begin the job and means will automatically start coming by themselves'. Baba always used to give an opportunity to everyone to do something or the other. 16. THE ART OF ABSORBANCE ( समाने की कला ) It was observed in Baba' s life that if any child used to put his/her confidence in Baba, Baba used to absorb his weakness like an ocean and never expressed it to others. OM SHANTI. Useful Links 7 virtues of Soul- YouTube playlist The 7 virtues of Soul Satyug - Golden age revealed 7 days course online (Eng) Revelations from Murli RESOURCES - Everything Audio * BK Articles - Hindi & English . #brahmakumari #brahmakumaris

  • आत्मिक दृष्टि से सेवा (Service through Eyes)

    आत्मिक दृष्टि से सेवा (Service through Yog Dhristi or Sakash or Vibration). Hindi article by BK Anil. Question: चलते फिरते आत्मिक दृष्टि से किसी को देखें तो क्या इसमें सेवा समाया हुआ है? क्या इसमें वह आत्मा को बाबा की टचिंग होगी ? Answer: सेवा तो आखिरी सब्जेक्ट है जो परिणाम है पहले तीन सब्जेक्ट का । वास्तव में देखा जाए तो हमारा जो साप्ताहिक राजयोग कोर्स है उसकी शुरुआत ही *आत्मा* के पाठ से होती है और हमारी पढाई का अंत भी तभी होगा जब सभी ब्राह्मण *आत्मिक स्वरुप* में स्थित हो जायेंगे जो हमारा *वास्तविक स्वरुप* है । ब्राह्मण जीवन का सारा पुरुषार्थ ही वास्तविक – ओरिजिनल स्वरुप में स्थित होने का है। यदि इस स्वरुप में स्थित होने में देरी हो रही है तो अभ्यास को और बढ़ाना चाहिए और जब तक यह पक्का नहीं हो जाता तब तक थकना नहीं है रुकना नहीं है । आत्मिक स्मृति में रहना ही *सच्चा ज्ञान* है, परमात्मा से योग लगाने के लिए भी पहले आत्मिक स्वरुप में स्थित होना जरुरी है, यही सहज *राजयोग का आधार है । विश्व का राज्य प्राप्त करने के लिए *स्वराज्य अधिकारी* बनना जरुरी है याने आत्मा का कर्मेन्द्रियों पर नियंत्रण जिस प्रकार देवता बनने के लिए ब्राह्मण सो फ़रिश्ता बनना जरुरी है । भाई भाई की दृष्टी भी तभी साकार होती है जब आत्मिक दृष्टी रहती है याने आत्मिक स्मृति में होते हैं । आत्मिक स्मृति भी तभी जगती है जब स्वयं देह और देह की दुनिया से ऊपर उठकर एक परमात्मा की संतान समझते हुए परमधाम निवासी समझते हैं । कर्मातीत बनाने का, फ़रिश्ता बनने का आधार ही आत्मिक स्मृति है। जब तक सभी ब्राह्मण इस अभ्यास में पूर्णता व सिद्धि को प्राप्त नहीं करते तब तक नयी दुनिया को नहीं लाया जा सकता । क्योंकि *नयी दुनिया* का आधार ही आत्मिक वृत्ति, आत्मिक दृष्टि व आत्मिक स्नेह है। आत्मिक दृष्टि से किसी को जब देखते हैं जो वह जैसे एक पावरफुल beam अथवा किरण के तरह काम करता है औरे सीधे आत्मा को तीर की तरह भेदता है और सामने वाला भी उसी स्थिति का अनुभव करने लगता है जिससे वह देहभान भूल अशरीरी बन जाता है जैसे ब्रह्मा बाप के सामने आते अनुभव करते थे । यही है *बाप समान स्थिति* । इस स्थिति में बाप के साथ *कंबाइंड स्वरुप* की अनुभूति होने लगती है । इसलिये *अब समय अनुसार ज्यादा से ज्यादा आत्मिक स्वरुप के अभ्यास पर ही निरंतर जोर देना चाहिए । यही अभ्यास फ़रिश्ता स्वरुप में स्थित करने में सहयोगी बनेगी और अंतिम सेवा जो बाबा चाहते हैं “ अन्तःवाहक शरीर द्वारा सेवा उसमें सहयोगी बन सकेंगे* । ओम शांति ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ *** Useful links *** Sakash Dene ki Vidhi (Hindi) How to give Sakash (English) * All BK Articles - Hindi & English Guidance on Sakash for Health issue More Question-Answers (on Forum) BK Google - Search the divine . #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi

  • होली का अर्थ (Meaning of Holi)

    इस आर्टिकल में आपको संक्षिप्त में होली त्यवहार का आध्यात्मिक रूप में सत्य अर्थ बताया जायेगा। In this Hindi article, we will learn about the Spiritual Significance of Holi festival celebrated in Bharat since ancient times. Also visit All Articles Dear Divine Angels... 🧚‍♂ * होली मुबारक ( HAPPY HOLI ) * ईश्वरीय परिवार के हर रूहानी और रंगीन फरिश्तों को होली के पावन त्योहार की हार्दिक शुभ-कामनाएं ! होली अर्थात रंगों से भरा त्योहार। इस वर्ष होली के हर रंग से हम एक शिक्षा लें कि हमें अपने और दूसरों के जीवन को भी इन रंगों से भरकर रंगीन और खुशहाल बनाना है। होली का हर रंग एक-एक गुण का प्रतीक है... निचे लिखा गया है रंग और उसके सामने उसी रंग से जुड़ा आत्मा का गुण : हरा - स्नेह लाल - शक्ति आसमानी रंग - शांति नीला - दया/रहम गुलाबी - एकता पीला - खुशी आदि आदि.... Reference: 7 virtues of Soul परमात्मा के ईश्वरीय संग के रंग में और सुख, शांति, पवित्रता, शक्ति के रंगों से भरकर हम सर्व प्राप्ति सम्पन्न बन जाते है...तो आइए आज इस रंग में रंगकर अनेकों के जीवन को रंगीन बनाएं....और होली के आध्यात्मिक भाव गहराई से समझें.... शिव पिता द्वारा बताए गए होली का आध्यात्मिक अर्थ... 🔸 *हो ली....* बीती को बिंदी लगाना (सभी बीती बातों को व अपने मन के सभी ईर्ष्या व घृणा भाव को समाप्त कर आज सभी को रूहानी दृष्टि से देखें, मतभेद को खत्म करें) 🔸 *Holy...* पवित्रता (पवित्र बन भारत को स्वर्ग बनाने की सेवा करें) 🔸 *हो ली....* मैं आत्मा परमात्मा की हो ली...अर्थात परमात्मा की बन गई... होली का उत्सव भारत में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। होली का आध्यात्मिक मतलब यही है की - आत्मा holy (पवित्र) बनती है। कैसे? - परमपिता परमात्मा के साथ मिलान (योग) होने से। फिर यह भी मतलब है की ''जो बात हो-ली उसे भूलो और जीवन में आगे बड़ो - बीत गयी सो बात गयी'' होली के दिन हम अपनी पुराणी चीजों को, कीचड़ से बानी चीजों को अग्नि में डालते है - इसका अर्थ है - ''अपने पुराने स्वाभाव संस्कार को योग की अग्नि में भस्म (ख़तम) कर देना, अर्थात पवित्र बनना''अर्थात पहले अपनी आत्मा को योग से पवित्र बनाना और फिर परमात्मा से मिलान मानना। Refer: आत्मा की ८ शक्तिया इसी आध्यात्मिक समझ के साथ हम होली के त्योहार का भरपूर आनंद लें। *एक बार पुनः आप सभी को होली की बहुत-बहुत बधाइयाँ!!!* * Flowers * 🧡🧡 ----- Useful links ----- विशेष - आत्मिक स्थिति के ८४ रंग 84 colours of Soul Consciousness (Holi special) All Articles - Hindi & English BK Anil's YouTube channel Video Gallery (Useful for new BK) BK Google - Our Search engine . #brahmakumari #brahmakumaris #Hindi

  • 84 Colours of Soul (Holi Special Article)

    Happy Holy. Holi festival is celebrated in Bharat to signify the purification of souls by meeting with the Supreme soul. It also signifies that we say 'Past is Past'. Let us create future a-new. Before holi (celebration), we burn our old objects in the holy fire. This signifies that before enjoying a meeting with God, we must first burn our old sanskaras (old habits) connected with the 5 vices. After burn them only we celebrate the colours - Colours signifies different virtues and powers of soul. Refer to: 8 powers of soul or 7 virtues of soul So here the the special article: 84 colours of Soul, also available to listen in English and Hindi on given video. You can access this same article in Hindi - ८४ आत्मिक स्मृति के रंग ** Happy Holi to all dear divine brothers & sisters ** Today the whole world is playing sorrowful Holi because everyone is showering the colours of five vices and it’s progeny. Some paint thecolour of lust, some the colour of anger, some the colour of greed orattachment. Majorly, no one has escaped the subtle colours ofselfishness, envy, jealousy, hatred, cruelty, attraction and necessity. The root colour behind these is the colour of body consciousness due to which the soul has become dis-coloured and covered with the rubbish of vices. The original colour which is of knowledge, peace, love, joy, purity, power, bliss is concealed. So let us make every one soulful before the arrival of the new world. This spiritual colour is acquired through the gathering of only one God father. God Father Shiva reincarnates in the confluence age of each world cycle for the establishment of new world and make his soul children equal to him by purifying them with the colours of his company. This is a True Holi celebration but in order to become holy and celebrate holi first of all impurity and all that is bad has to be burnt off.We have to forget all feelings of differences & keep the attitude of equalitythat is, of being brothers then only we can experience the imperishable colour. Until impurity is completely finished you cannot be coloured with the colour of purity. * (video) 84 Spiritual Colours of Soul Consciousnes * * Above video on YouTube: https://youtu.be/P_LYtcdw9aI ---- Useful links ---- PDF version of this Article Listen or Download the Audio version BK Anil's Articles (Hindi & English) - YouTube playlist Other Articles -- Hindi & English NEWS - New uploads & more 7 days course in English BK Google - Search the Divine . #brahmakumari #brahmakumaris

  • आत्मा के रंग (होली पर विशेष)

    * Holi special Hindi article by BK Anil Kumar. आत्मा के रंग (होली पर विशेष) होली का उत्सव भारत में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। होली का आध्यात्मिक मतलब यही है की - आत्मा holy (पवित्र) बनती है। कैसे? - परमपिता परमात्मा के साथ मिलान (योग) होने से। फिर यह भी मतलब है की ''जो बात हो-ली उसे भूलो और जीवन में आगे बड़ो - बीत गयी सो बात गयी'' होली के दिन हम अपनी पुराणी चीजों को, कीचड़ से बानी चीजों को अग्नि में डालते है - इसका अर्थ है - ''अपने पुराने स्वाभाव संस्कार को योग की अग्नि में भस्म (ख़तम) कर देना, अर्थात पवित्र बनना'' अर्थात पहले अपनी आत्मा को योग से पवित्र बनाना और फिर परमात्मा से मिलान मानना। Refer: आत्मा की ८ शक्तिया You can also access this article in English. Visit 84 colours of Soul Consciousness सभी प्रिय दैवी भाइयों और बहनों को होली पर्व की हार्दिक बधाई आज सारा विश्व दुःख की होली खेल रहा है क्योंकि सभी एक दूसरे पर पांच विकारों व उनके वंशों के रंगों की बौछार कर रहे हैं । कोई काम का रंग, कोई क्रोध का रंग, कोई लोभ का तो कोई मोह के रंग से रंग रहा है, स्वार्थ, इर्ष्या, द्वेष, घृणा, अमानवता, आकर्षण और आवश्यकता के सूक्ष्म रंग से तो अधिकतर कोई बचा ही नहीं है । इन सबके मूल में है देह अभिमान का रंग जिसके कारण आज आत्मा बदरंग हो गयी है । उसका ओरिजिनल ( वास्तविक ) गुण रूपी रंग जो ज्ञान, शान्ति, प्रेम, सुख, पवित्रता, शक्ति, आनंद का है वह छिप गया है और ऊपर यह विकारों का कीचड़ आ गया है । तो आओ इस नयी दुनिया के आगमन के पहले सभी को आत्मिक रंगों से रंगकर सारे विश्व को आत्ममय बनायें । यह आत्मिक रंग एक परमात्मा के सत्संग द्वारा प्राप्त होती है । शिव परमात्म पिता नयी दुनिया के स्थापनार्थ कल्प कल्प संगमयुग में अवतरित होकर अपने आत्मा रूपी बच्चों को अपने संग के रंग से रंगकर आप समान पवित्र बना देते हैं । यही है सच्ची होली मनाना । लेकिन होली बनने वा होली मनाने के लिए पहलेअपवित्रता, बुराई को भस्म करना होगा । भिन्न भिन्न भाव भूलकर एक ही परिवार के हैं, एक ही समान याने भाई भाई की वृत्ति रखनी होगी तभी ही अविनाशी रंग का अनुभव कर सकेंगे । जब तक अपवित्रता, बुराई को भस्म नहीं किया है तब तक पवित्रता का रंग चढ़ नहीं सकता है । * ८४ आत्मिक स्मृति के रंग * (video) * Above video link: https://youtu.be/j57kZM1qtsA Download the PDF version file Listen or Download the Audio * Articles Videos - YouTube playlist Other Articles - Hindi and English BK Anil's YouTube channel Videos Gallery (useful for new) * Sitemap - Everything at One place . #brahmakumari #Hindi #brahmakumaris

  • आज की मुरली से कविता 20 March 2019 (Today Murli Poem)

    Aaj ki Gyan Murli se Ek Kavita - 20 March 2019. आज की मुरली से कविता. This is poem from today's baba's murli. To access old murli poems and more, visit the Daily Murli Poems page. * मुरली कविता दिनांक 20.3.2019 * विचार सागर मंथन करने की आदत को पकाना ज्ञान की पॉइंट बुद्धि में सहज होगा तभी समाना बाप जो भी सुनाते केवल वही तुम सुनते जाओ अच्छी रीति से पढ़ने वालों का संग करते जाओ बाप की श्रीमत पर स्थिति फर्स्ट क्लास बनाओ स्थापन होने वाली राजधानी में उत्तम पद पाओ खुद भगवान हमें पढ़ाते है तो बाकी पढ़ाई छोड़ो ईश्वरीय शिक्षा और बाप से अपने मन को जोड़ो ज्ञान योग में बच्चों अपने आपको तीखा बनाओ बाप के संग तुम भी ईश्वरीय सेवा में काम आओ बने बनाए इस ड्रामा में कुछ भी बदल न पाएगा सही वक्त पर हर पात्रधारी अपना पार्ट बजाएगा बाप जो पढ़ाते सुनाते केवल वही धारण करना कुसंग से बचकर तुम विचार सागर मंथन करना ड्रामा की भावी समझकर हर पल बेफिक्र रहना संशय से मुक्ति पाकर तुम ड्रामा पर अटल रहना होली के अर्थ स्वरूप में बच्चों स्थित हो जाओ बीती बात भुलाकर सच्ची सच्ची होली मनाओ अपनी और दूसरों की बातें चिन्तन में ना लाओ बीती बातें खत्म कर तीव्र पुरुषार्थी बनते जाओ पालना पढ़ाई और श्रेष्ठ जीवन जो बाप से पाते सारे जग में श्रेष्ठ भाग्य वाले वही बच्चे कहलाते * ॐ शांति * ---- Useful links ---- Online Services (all listed) Resources - Divine collection BK Google - A divine search engine for BKs Brahma Kumaris All useful Websites Videos Gallery - YouTube playlist Main Blog - Articles, Q & A . #Murli #Hindi #brahmakumari #brahmakumaris

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