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बाबा से प्यार

𝐏𝐨𝐞𝐭: BK Mukesh Modi

प्रभु याद की मधुर यात्रा, निरन्तर हम बढ़ाएंगे
सतोप्रधानता की सीढ़ी पे, खुद को हम चढ़ाएंगे

निकालकर अवगुणी कांटे, स्वयं को पुष्प बनाएंगे
अपनी पवित्रता की शक्ति से, सबको हम लुभाएंगे

ईश्वरीय पढ़ाई पढ़ने में, लगता नहीं कोई भी खर्चा
याद की यात्रा में रहने से, मिल जाता है ऊँचा दर्जा

किचड़ा पांच विकारों का, बाबा आए हैं हमसे लेने
इसके बदले में विश्व की, बादशाही हम सबको देने

याद की यात्रा में इतनी, क्यों लड़ती हमसे माया
माया से बचना हमें, अब तक भी क्यों ना आया

शायद नहीं जागा मन में, बाबा के प्रति पूरा प्यार
अभी तक बनाए बैठे हम, माया को अपना संसार

अपने ही विकर्म बन जाते, पुरुषार्थ की राह में रोड़े
त्रेसठ जन्मों तक हमने भी, विकर्म नहीं किए थोड़े

अपने किए विकर्मों से, लाडलों कभी नहीं घबराना
बाबा से श्रीमत लेकर तुम, खुद को मज़बूत बनाना

चलना है सुखधाम तो, सबके सुखदाता बन जाना
भूलकर भी किसी को, दुःख का काँटा ना लगाना

अपना देहभान मिटाकर, बापदादा से प्यार करना
संग तेरे ख़ुद बाबा है, माया से बिलकुल ना डरना

स्वस्थिति में रहकर, परिस्थितियों को पार करना
आत्मिक भान जगाकर, दैहिक भान समाप्त करना ||

" ॐ शांति "

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