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  • आज का पुरुषार्थ for February 2022 (audio)

    "आज का विशेष पुरुषार्थ" शिव बाबा द्वारा अमृतवेला योग समय मिली अनमोल शिक्षाएँ है, विशेष पालना है, व विशेष directions है। सभी पुरुषार्थी ब्राह्मण आत्माए (ब्रह्माकुमारी व ब्रह्माकुमार) इस पुरुषार्थ को रोज सुने और अपने जीवन में तेज़ी से अपनाए। अब समय थोड़ा है, परिवर्तन का कार्य बड़ा है। Month: February 2022 Format: Audio, mp3 file to download इस वेबसाइट पोस्ट को अनन्य ब्राह्मण आत्माओ तक SHARE (forward) करे। बाबा के सभी बच्चो को यह श्रेष्ठ विशेष पालना मिलनी चाहिए, यही हमारा संकल्प है। Share on WhatsApp⇗ ★ निचे Download links दी है ➤ पुरुषार्थ से मुख्य पॉइंट्स ➥ शिव बाबा हमे रोज ही love and light का अभ्यास करने को केहते है। देखो की सब कुछ पवित्र लाइट से बना है। इसी अभ्यास से स्व-परिवर्तन एवं स्थूल दुनिया का परिवर्तन होना है। ➥ बाबा यह भी revise कराते है की स्वयं को आत्मा निश्चय करो, और सम्बन्धो में आते भी न्यारे रहो, हल्का रहो। ➥ अपनी स्व-स्थिति को बार बार check करो। क्या देह अभिमान आता है? क्या परिस्थिति का प्रभाव पड़ता है? स्वमान में कितना समय रहता हूँ? ➥ कर्म करते हुए बाप की नेचुरल याद बनी रहे, बड़े प्यार से याद करना है। गुप्त नशा रेहना चाहिए की हम देवता बन रहे है, हमारी सतयुगी दुनिया बस आयी की आयी। Credit: This is "Aaj ka Purusharth" published by Peace of Mind TV (PMTV) Source of Daily Purusharth You may wonder what is the source of these daily Purusharth which comes through Peace of Mind... who is Shiv baba's medium through which baba is giving these precious directions. So we wish to let you know that a Gruhasthi mother (maata) from Punjab (India) was receiving baba's touchings during morning Amritvela Yog time in mid 2018 and this part continued till the end of 2019. She is in Gyan since the year 2001, while following Gyan in loukik life. These notes are then read by a BK sister working at PMTV. नमस्ते शिव बाबा की याद में, The 'Shiv Baba Services Initiative' team इस वेबसाइट पोस्ट को अनन्य ब्राह्मण आत्माओ तक SHARE (forward) करे। सभी बाबा के बच्चो को यह पालना मिलनी चाहिए, यही हमारा संकल्प है। Share on WhatsApp⇗ Useful Links Jan 2022 Purusharth (new post) Thought for Today (daily) Online Services (sustenance) शिव बाबा का सन्देश General Articles (Hindi & English) Sitemap (explore everything)

  • Advance Murli for February 2022

    Official Monthly Post➤ Hindi and English Murli PDF files in-advance for the month of February 2022, provided by BabaMurli.NET team. Please SHARE this post to BK brothers & sisters in your connection. Share on WhatsApp⇗ ✱Select Murli language: Hindi English ✱Information ➤ Murli is provided 1 or 2 weeks in-advance to local RajYog sewa-kendra (BK centres) all over the world so that the connected regular students of those centres can continually read and revise the Gyan Murli. There are four subjects at BK Godly University which we all Brahma Kumari or Brahma Kumar study and practise in our daily lives. ➤ Visit useful links to get daily sustenance on this website. Visit Daily Murli audio to get♪ today's murli in Hindi and English. Advance Murli Hindi PDF 1 February 2022 2 February 2022 3 February 2022 4 February 2022 5 February 2022 6 February 2022 7 February 2022 8 February 2022 9 February 2022 10 February 2022 11 February 2022 12 February 2022 13 February 2022 14 February 2022 15 February 2022 16 February 2022 17 February 2022 18 February 2022 19 February 2022 20 February 2022 21 February 2022 22 February 2022 23 February 2022 24 February 2022 25 February 2022 26 February 2022 27 February 2022 28 February 2022 Advance Murli English 1 February 2022 2 February 2022 3 February 2022 4 February 2022 5 February 2022 6 February 2022 7 February 2022 8 February 2022 9 February 2022 10 February 2022 11 February 2022 12 February 2022 13 February 2022 14 February 2022 15 February 2022 16 February 2022 17 February 2022 18 February 2022 19 February 2022 20 February 2022 21 February 2022 22 February 2022 23 February 2022 24 February 2022 25 February 2022 26 February 2022 27 February 2022 28 February 2022 ➤Please SHARE this post to BK souls in your connection. Share on WhatsApp⇗ Useful Links Advance Murli (official page) January 2022 murlis What is Gyan Murli? (article) All Godly Resources (for BK souls) Online Services (Get daily sustenance) Explore Sitemap (Get Everything)

  • दैनिक मुरली चार्ट February 2022

    शिव बाबा की रोज की ज्ञान मुरली से बनाये गए यह पुरुषार्थ चार्ट आप PDF format में यहाँ प्राप्त कर सकते हो और इसे डाउनलोड करके रोज का अपना चार्ट check करे, आज की मुरली से लिए गए प्रश्नो का उत्तर अपनी notebook में भी लिख सकते हो। Month: February 2022 Chart format: PDF (Portable Document Format) इस पोस्ट को अपने सम्बन्ध संपर्क के ब्राह्मण भाई बहनों को SHARE जरूर करे और उनको भी मुरली से चार्ट लिखने की प्रेरणा दे। Share on WhatsApp⇗ February 2022 charts ज्ञान मुरली क्या है? मुरली उस ज्ञान का अभिलेख है जो स्वयं निराकार परमपिता परमात्मा, अपने साकार माध्यम (रथ) प्रजापिता ब्रह्मा के द्वारा सुनाते हैं। यह अविनाशी ज्ञान, समस्त मनुष्य आत्माओ अर्थात अपने बच्चो के प्रति परमपिता परमपिता शिव के मधुर महावाक्य हैं।... अधिक जानने के लिए click here Share on WhatsApp⇗ Useful Links All monthly posts (latest) मुरली चार्ट January 2022 Online Services (for BKs) Godly Resources (for BKs) PDF section (everything in PDF) General Articles (Hindi, English)

  • Thought for Today Calendars: February 2022

    Get Brahma Kumaris Thought for Today calendars for all individual days from 1st Feb, 2022 to 28th Feb, 2022 ➤View Hindi and English Calendar (jpg image) or download single PDF file (entire month) or get the "full version" of daily inspirations on this google folder (for February 2022) ➥Please SHARE (WhatsApp⇗) this post to BK brothers and sisters in your connection. Visit useful links for more resources and get daily sustenance on this website. Choose Calendar language: Hindi English ✦ Hindi Calendars ✦ फ़रवरी २०२२ के हिन्दी कैलेंडर को पढ़ने के २ तरीके : 1. सभी 28 दिन का एक PDF ➤ February 2022 single PDF (coming soon) 2. विशिष्ट दिन- १ से २८ 1.02.22 2.02.22 3.02.22 4.02.22 5.02.22 6.02.22 7.02.22 8.02.22 9.02.22 10.02.22 11.02.22 12.02.22 13.02.22 14.02.22 15.02.22 16.02.22 17.02.22 18.02.22 19.02.22 20.02.22 21.02.22 22.02.22 23.02.22 24.02.22 25.02.22 26.02.22 27.02.22 28.02.22 ✤ English Calendars ✤ There are 2 ways to access Thought for today English calendars for February 2022: 1. Month (28 days) in One PDF➤ February 2022 single PDF (coming soon) 2. Individual days from 1 to 28 1.02.22 2.02.22 3.02.22 4.02.22 5.02.22 6.02.22 7.02.22 8.02.22 9.02.22 10.02.22 11.02.22 12.02.22 13.02.22 14.02.22 15.02.22 16.02.22 17.02.22 18.02.22 19.02.22 20.02.22 21.02.22 22.02.22 23.02.22 24.02.22 25.02.22 26.02.22 27.02.22 28.02.22 ➥Please SHARE (WhatsApp⇗) this post to BK brothers and sisters in your connection. "Subscribe" (or see footer) to this website and receive regular updates via email. Useful Links Thought for Today (official page) Jan 2022 Thoughts (post) PDF section (all pdf at One place) Online Services (daily sustenance) All Godly Resources (daily use) Explore the Sitemap (all links)

  • दैनिक विशेष पुरुषार्थ PDF | February 2022

    मधुबन से रोज बनाकर भेजा जा रहा विशेष पुरुषार्थ आप यहाँ प्राप्त कर सकते है। यह "विशेष पुरुषार्थ" में आज का स्वमान, संकल्प, पुरुषार्थ और आज का स्लोगन भी मिलेंगा। इसे अपने कनेक्शन के बी.के.भाई बेहनो को SHARE करे। Share on WhatsApp⇗ Month: February 2022 Format: PDF (Portable Document Format) ✱ फ़रवरी २०२२ मास के सभी (१ से २८ फ़रवरी तक के) पुरुषार्थ आप इस Google folder से डाउनलोड कर सकते हो ➜ https://drive.google.com/drive/folders/1RYpvsmc8YW5zcD-xJv0TL27gefB7Vitv इसे अपने कनेक्शन के बी.के.भाई बेहनो को ज़रूर SHARE करे। Share on WhatsApp⇗ Useful links All monthly posts (on Blog) शिव बाबा का विशेष पुरुषार्थ दैनिक ज्ञान मुरली Thought for Today (daily) Godly Resources (for BKs)

  • Year 2021 Calendar in Hindi and English

    Get Brahma Kumaris daily calendar for the entire year 2021 in a single PDF file to view, download or print. Language: Hindi and English Format: PDF (Portable Document Format) ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का कैलेंडर साल २०२१ के लिए यहाँ से डाउनलोड करे। Tip: You can view the calendar daily from this PDF, or Print it for easy daily access. Useful Links Thought for Today (official page) Learn About Us (English Introduction) हमारे बारे में जाने (Hindi Introduction) BK murli today (audio: Hindi, Eng) Video Gallery (selected most useful videos to watch or download) Downloads section (Satyug images gallery) Online RajYoga course (in English)

  • ब्रह्मचर्य और पवित्र जीवन

    ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से संपर्क में आने वाले मनुस्यो को यह प्रश्न रेहता ही है - की 'पवित्रता' जो यहाँ का मुख्य विषय है, उसका यथार्त अर्थ क्या है? क्या सिर्फ शरीर से ब्रह्मचर्य में रहना है? Tip: Read➤ English version of this article: Celibacy, A way of living ♪Listen this article (इस लेख को सुने)➤ Article Audio⇗ इस लेख में आप जानेंगे - पवित्रता का गुह्य अर्थ। ब्रह्मचर्य, जीवन जीने का तरीका दुनिया, ब्रह्मचर्य जीवन को एक कुमारी के रूप में समझती है। लेकिन यह केवल एक बाहरी जीवन शैली नहीं है, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।  अब हम ईश्वरीय ज्ञान के माध्यम से यह समझ गए है की ब्रह्मचर्य अर्थात मन में पवित्रता (विचारों में), मुख में शुद्धता (हमारे शब्दों में) और भौतिक शरीर की पवित्रता (ब्रह्मचर्य होने) में है। पवित्रता या ब्रह्मचर्य का विषय अति सूक्ष्म है। अतः यदि कोई समझने और पूरी तरह से धारण करने की इच्छा रखता है, तो एक शब्द में पवित्रता का अर्थ है 'संपूर्ण आत्म चेतना'। राजयोग के अनुशासन में से पहला अनुशासन "ब्रह्मचर्य" का पालन है। ब्रह्माकुमारी व ब्रह्माकुमार जैसे ही आगे बढ़ते है, पवित्रता के मूल्य को समझते है और दुनिया में रहते हुए भी ब्रह्मचर्य जीवन को अपनाते है। ब्रह्मचर्य आत्मा को शुद्ध करने के लिए पहला कदम है। पवित्रता का व्रत, न केवल ब्रह्मचर्य का व्रत है, बल्कि यह हर विचार, वचन और कर्म में शुद्ध रहना है। कोई कह सकता है कि ब्रह्मचर्य स्वाभाविक रूप से आसान है। दूसरे कह सकते हैं, यह लगभग असंभव है। इस तरह से, जो लोग मानते हैं कि यह किसी तरह मुश्किल है, निश्चित रूप से वह भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर सकते हैं। क्योंकि यह न भूले कि खुद भगवान ने हमें पवित्रता का संदेश दिया है। इस गुण (पवित्रता का) के बिना, कोई भी परमात्मा पर ध्यान के एक दिव्य अवस्था में प्रवेश नहीं कर सकता, जो और कुछ नहीं बस उनकी याद है। विचारों में पवित्रता हम वह है जो हम सोचते है। क्योंकि वही मैं स्वयं हूँ। मैं क्या और कैसा सोचता हूँ, वैसा ही मैं हूँ । इस सरल अनुभूति के साथ,  हम सभी नकारात्मक विचारों को जीतने या मन को मुक्त करने और अपनी पवित्रता की मूल स्थिति को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से ऐसा आध्यात्मिक पुरुषार्थ करते हैं। हम प्रयास कर और विचारों की दिशा को नियंत्रित कर सकते हैं। हाँ, निश्चित रूप से हम सोचना बंद नहीं कर सकते! लेकिन स्व-अनुभूति आत्मा को निर्देशित करता है, अपने मन और कर्मेन्द्रियों को वापस लेने के लिए। हम मन को मार्गदर्शन करेंगे कि कैसे सोचना है और कितना सोचना है। क्योंकि सकारात्मक सोच भी एक नियंत्रित तरीके से, एक स्वाभाविक तरीके से होनी चाहिए। विचारों में पवित्रता का विषय बहुत सूक्ष्म हैं। जब कोई संपूर्ण आत्म-चेतन अवस्था को प्राप्त करता है, जहाँ कोई अशुद्ध, कोई व्यर्थ विचार नहीं उभरता है, तभी यह 100% हो सकता है। यह अवस्था कई लोगों द्वारा राजयोग मैडिटेशन के नियमित और यथार्थ अभ्यास से प्राप्त की गयी है। शब्दों में पवित्रता यह निश्चित रूप से दिखता है और आसान है। फिर भी, कई लोग इसे बेहद मुश्किल पाते हैं। इसलिए यह समझा जाता है कि प्रत्येक आत्मा की एक अलग यात्रा है और इसलिए उनके विभिन्न प्रकार के संस्कार होते हैं (उनके कर्मों के आधार पर)। इसलिए, हम सभी दुनिया को अलग तरह से अनुभव करते हैं। जब शब्दों में पूर्ण दिव्यता होने की बात आती है, तो हम कहते हैं कि यह परिस्थिति पर निर्भर करता है। मगर, यह सवाल हमारा है। शब्द हमारी आंतरिक दुनिया, हमारी आंतरिक स्थिति को दर्शाता हैं। 'अगर मेरे भीतर की अवस्था दिव्य है, तो कोई भी बहार की बात, मुझे थोड़ा भी हिला नहीं सकती, लेकिन जब भीतर की दुनिया में हलचल हो, तो बाहर से थोड़ी ही बात हमें तोड़ने के लिए के लिए काफी होती है ’। कर्मेन्द्रियों पर नियंत्रण करने की शक्ति की आवश्यकता है। मुरली में बाबा कहते हैं: “अपने मुंह में कुछ रखो ताकि वह तुम्हारी अवज्ञा न करें  ”। अर्थात जब कोई परिस्थिति आती है और आपको लगता है कि यह टकराव का कारण बन सकता है, तो बस अपना मुख बंद करें और मुसकुराए। बाहर जो चल रहा है उसे भूल जाए और शांति के सागर में (ईश्वर) में डूब जाए। इसको भगवान, हमारे रूहानी बाप के साथ सीधा सम्बन्ध कहा जाता है। "मीठा बोलो, धीरे बोलो, कम बोलो" - हमने इसको अपना स्लोगन बना दिया है और इसका हम अपने जीवन में अभ्यास करते है। कर्म में पवित्रता पवित्रता से लिया गया सबसे साधारण अर्थ ‘ब्रह्मचर्य’ माना जाता है,  जिसका अर्थ है - जीवन का तरीका जिसमें कोई विवाहित या यौन-क्रिया से मुक्त रहना है, काम वासना के वश से और भौतिक जगत से स्वयं को अलग करता है। सामान्य शब्दों में, जिसे हम भारत (इंडिया) में सन्यास कहते हैं (ईश्वर की खोज में भौतिक दुनिया और पारिवारिक संबंधों का त्याग)। सूक्ष्म रूप में, पूर्ण ब्रह्मचर्य का अर्थ है अशुद्ध विचारों और दृष्टिकोण (वृत्ति) के संपर्क से बचना। बल्कि, यह शरीर के भान और उसके संबंधित 5 विकारों का त्याग है, न की संसार का। कर्म के बिना कोई रह नहीं सकता। "वह आत्मा जो शरीर और शरीर के भान से खुद को अलग करती है, जो सदा अपने कर्मेन्द्रियों का मालिक है, जो दुनिया की सेवा में सभी गतिविधियों को करते हुए साक्षी रहता है, वह मनुष्यों में सबसे श्रेष्ठ है।’’ - अव्यक्त मुरली और श्रीमत गीता। संक्षिप्त में समझे, तो कोई ये निष्कर्ष निकाल सकता है की पवित्रता अन्य सभी गुणों की जननी है। मन, वचन और विचारों में संपूर्ण और स्वाभाविक पवित्रता की चाबी है, आत्म-चेतना। इस अभ्यास के लिए , हमने हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में स्वमान कमेंटरीज़ बनाई है। शुरुवात करने के लिए यह सबसे उपयोगी साधन है। ➤हिंदी स्वमान कमेंटरीज़ ➤अंग्रेजी स्वमान कमेंटरीज़ यह भी कहा जाता है, "जैसा खाओगे, वैसा बन जाओगे" - जिसका अर्थ समझाया गया है: जो भोजन को हम अपने पेट में रखते है, उस भोजन के प्रकंपन को हम ग्रहण करते है। इस रीति से, उन प्रकम्पनों को ग्रहण करते, हम उसी प्रकम्पनों को अपनाते है। आध्यात्मिकता की हमारी यात्रा में शुद्ध (सात्विक) भोजन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां तक कि संत भी हमें यही बताते हैं। आध्यात्मिक जीवन शैली के लिए, भोजन जो प्रकृति माँ से प्राप्त होता है और जानवरों से नहीं (शाकाहारी भोजन), यह सबसे अच्छा माना जाता है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए हमारा लेख पढ़े: योगी का आहार। ब्रह्मचर्य का महत्व (Importance of Celibacy)- BK Sachin bhai आत्म-चेतना - आनंदमय जीवन की चाबी है। ✦आत्म-चेतना क्या है? जब हम जागरूकता की स्थिति में होते हैं कि "मैं एक आत्मा हूं और यह भौतिक शरीर नहीं है", तो हमारी शक्तियां असीमित होती हैं, क्योंकि आत्मा किसी चीज़ से सीमित नहीं है। दूसरे शब्दों में, व्यक्ति इस भान के साथ सोचता है, महसूस करता है, कार्य करता है, प्रतिक्रिया करता है, आदि.. कि वह (आत्मा को संदर्भ करता है) शरीर का मालिक है। आत्म-चेतना में आत्मा के मूल गुण (शांति, पवित्रता, प्रेम, आनंद) स्वाभाविक रूप से उभरते है। हम आत्मा शांति और खुशी के लिए बाहरी (भौतिक) चीजों पर निर्भर नहीं हैं। वे हमारा आंतरिक स्वभाव हैं। दुःख और अशांति अनुभव करने का कारण यह विकार है। इस प्रकार से, यह अब भगवान का संदेश है और यह जाग्रत होने का समय है। हम सभी भाई है, एक निराकार परमात्मा की संतान है। ➤ आत्म-चेतना का अभ्यास (स्वमान-YouTube) ➤Reference: "Brahmacharya - Hindi eBook" (pdf): https://drive.google.com/file/d/1zhd-SLLy1aowLzdi6-RpOUIZp0l0WpVi/view Explore ➤ All Hindi and English books in PDF ओम शांति. शिव बाबा सर्विस टीम

  • ओम शान्ति का सत्य अर्थ

    आईये अब हम ‘ओम शान्ति' महा-मंत्र का सत्य व यथार्थ अर्थ जानते हैं। आपने देखा होंगा कि जो जन ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़े हैं वे एक दूसरे को 'ओम शांति' कह कर मिलते और अभिवादन करते हैं। और यह दो शब्दों का अर्थ है 'मैं शांत स्वरुप आत्मा हूँ' व 'मेरा स्व-धर्म शांति है'। ओम का यहाँ सामान्य सा अर्थ है 'मैं' और शांति अर्थात शांत अवस्था, व इसके संदर्भ में स्व-धर्म। Editor's Tip इस लेख को सुने : Audio version इस लेख को डाउनलोड करे : PDF version Also read English version: Om Shanti meaning ➥ वास्तव में ॐ शांति... शांति... शांति... भारत का प्राचीन मंत्र है जिसे अक्सर सतसंग में, यज्ञ में और भोजन से पहले बोला जाता है। अगर आपने स्कूली शिक्षा भारत से ली है, तो आपको अवश्य ही पता होगा कि प्राथमिक विद्यालयों में दोपहर भोजनावकाश (lunch-break) के समय भोजन परोसने से पहले भी यह गाया जाता है। इस वाक्यांश का २३००-वर्ष-पुरानी प्रार्थना 'असतो माँ सद्गमय' में भी पता लगाया जा सकता है। यह प्रार्थना परमात्मा से आने का निवेदन करती है कि वे आएं और शांति,अविनाशी ज्ञान व धर्म की दुनिया पुनः स्थापन करे। परन्तु वास्तव में इसका अर्थ आत्मा के सम्बन्ध में है , नाकि देह के। आइये अब विस्तार में अन्वेषण करे। ओम शांति - मेरा मूल धर्म शांति है अधिक सटीक रूप से, 'ओम शांति' वाक्यांश का उपयोग हमें यह याद दिलाने के लिए है कि 'शांति' हमारा मूल धर्म है। यह हमारे परम पिता (परमात्मा) का व्यक्तित्व है और हम सभी आत्माएं शांति का प्रतीक हैं। यह जानते हुए कि मनुष्य सच्ची शांति, सच्चा प्यार, और सच्ची खुशी की तलाश में व्याकुल है, परमात्मा पिता आते हैं और हमें याद दिलाते हैं कि वास्तव में ये आपके स्वाभाविक गुण हैं। अधिक जानिए : आत्मा के ७ गुण "जिस शांति या प्रेम को आप बाहर खोज रहे हैं वह वास्तव में आपके भीतर ही है।" तुम शांति हो -हम प्रकृति को याद दिलातें हैं व्यापक रूप में, जब हम अनुभव करते हैं कि 'मैं शांत हूँ', है, तो हम वही स्पंदन (वाइब्रेशन) ब्रह्मांड में भेजते हैं। हम पूरे अस्तित्व को याद दिलाते हैं कि 'आप शांति हैं'। प्रत्येक आत्मा का स्वाभाविक स्वरुप शांति है, जैसे इस भौतिक शरीर के बिना, एक आत्मा अपने आप में एक पवित्र चेतना बिंदु शक्ति है। भगवान कहते हैं: "सब कुछ एक जैसी वाइब्रेशन से बना है, जिसे आप शांति, प्रेम या आनंद कहते हैं ... इस प्रकार, हम नदियों, समुद्र, पहाड़ों, पेड़ों, आकाश और पृथ्वी, जानवरों और पक्षियों और सामान्यतः पूरे विश्व को यही स्मरण कराते हैं। एक योगी आत्मा का शक्तिशाली स्पंदन निश्चित रूप से विश्व के हर कोने तक पहुंचता है। जैसा ही हम दुनिया को उसकी मूल स्थिति की याद दिलाते हैं, परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। प्रत्येक जीवित प्राणी या निर्जीव वस्तु हमारी चिन्तन की शक्ति का उत्तर देते है। क्या आप यह जानतें हैं कि पौधे जैसी निर्जीव वस्तु भी पूरी तरह से विकसित हो जाती है यदि उच्च शक्ति चिन्तन, जैसे कि प्रेम और शांति, दिए जाएं तो, जबकि कम ऊर्जा के विचार, जैसे घृणा या अपवित्रता, से जल्दी ही मर भी जाते हैं। यह हमारे विचारों की ही शक्ति है जिसे अब हम रचनात्मक (परमात्मा के निर्देशानुसार) तौर पर नई दुनिया बनाने के लिए उपयोग कर रहे हैं। 'ओम शांति' शब्द का मुरली से सम्बन्ध साकार मुरलियाँ (प्रजापिता ब्रह्मा के साकर/भौतिक माध्यम से शिव बाबा द्वारा बोली जाने वाली मुरली) के संबंध में, 'ओम शांति' मौलिक शब्द है जिसे बाबा प्रत्येक मुरली की शुरुआत और अंत में बोलते थे। आप वास्तविक मुरली (स्वयं ब्रह्मा बाबा की आवाज़ में) भी सुन सकते हैं। एक अव्यक्त मुरली में, बापदादा ने कहा: "जितनी सरलता से आप आवाज़ में आते हैं और शब्दों का उपयोग कर बोलते हैं, उतनी ही आसानी से आप मौन में रहने और अपनी संकल्प शक्ति व योग शक्ति के माध्यम से संदेश देने का अभ्यास कर सकते हैं।" ✱स्पष्टीकरण: हम शब्दों/भाषा द्वारा अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं। यही है आवाज में आना। लेकिन आत्मा विचारों के द्वारा संदेश पहुंचा सकती है। यहाँ मौन रहने का अर्थ बोलना बंद करना नहीं है, बल्कि बोलते या बातचीत में आते समय और अपने दैनिक कार्यों को करते समय, हमारी आंतरिक स्थिति शांत होनी चाहिए। बुद्धि स्थिर और मन शांत, ऐसी आत्मिक स्थिति में, यदि कोई आत्मा किसी अन्य आत्मा को विचार भेजती है, तो यह मौन की शक्ति को बढ़ाता है। प्रेम और शांति आत्मा की भाषा है। इस प्रकार बाबा हमें प्रेरित करते रहते हैं कि हम स्वयं के 'आत्मा' होने की अनुभूति से और अधिक जागरूक हो जाएँ। Useful Links Revelations from Murli (advance) राजयोग का कोर्स (online) परमात्मा शिव का परिचय General Articles (Hindi & English)

  • What is Shrimat given in Murli?

    What is Shrimat of Shiv Baba? - Here is an essence of guide book to understand. To access Hindi version, visit Shiv Baba ki 108 Shrimat. Soul is the master of 5 senses (eyes, mouth, ears, nose and hands). It is Baba's shrimat to control these senses - this is RajYog (Yog with ParamAtma/Supreme soul, through which a soul become a master of all its senses) Baba always says, “Children, follow Shrimat.” So what is the Shrimat (advice of Godfather Shiv)? Shrimat is not a set of rules but a system or way of living in the world without any type of violence. There are 2 types of violence: 1. Physical violence: Hurting someone's body with a stick or so. 2. Lust violence: Hurting the soul with the vice of lust/impurity. ''Lust is your greatest enemy'' - God says. This vice took away your kingdom, took away peace from life. Hence the first shrimat of Shiv baba is: ''Become Pure''. Brahmacharya means only physical celibacy. But Baba teahes ''complete celibacy.'' Please refer: Celibacy - A way of life Shrimat is advice of Shiv baba. 'Shri' itself means 'best or most elevated'. It takes a lot of wisdom to be able to do this. It also keeps us from creating more karmic debts. Deep knowledge and Yoga is for settling our debts, which is what we really want. This is why Brahma Baba’s life was so incredible. Each and every action had wisdom behind it. His life teaches us how to live, how to dance the beauty of life. Through the study of Raja Yoga Meditation we souls become familiar with 'matt'(some directions) matters that is - 1. MANMAT - The dictates/directions of one's own mind 2. PARMAT - The dictates/directions of someone else's mind 3. SHRIMAT - The elevated directions of God. The Benefits of Shrimat The sanskaras of this alokik(new birth considered after god finds you) birth are pulling us towards the land of peace. Be an observer of the self and see how, peaceful and cool you are. If you are cool you automatically have love for God. When water. boils steam comes out. When the thoughts boil and bubble out of the mind, what state would the soul be in and what atmosphere would it create? Baba is creating heaven, but we need to help by spreading peace throughout the whole world through the power of remembrance. People these days are afraid of dying a violent death. We shouldn’t live in fear, but we should have caution not to make mistakes or create misunderstandings. Be cautious and sensible. This is Baba’s shrimat. Live peacefully by remembering Baba. Sit and write down what is shrimat and what is the benefit of it. WHEN YOU FOLLOW SHRIMAT BABA IS RESPONSIBLE FOR EVERYTHING YOU DO. BABA WILL THEN PUT RIGHT LITTLE ERRORS, WHICH THE SOUL WOULDN’T NORMALLY DO. If you are always following manmat, how can Baba help? He helps those who are honest and faithful. If you only give to support to those you are attached to, and don’t bother with anyone else, thenhow can Baba give you support? YOU Should Not BE DEPENDENT ON ANY BODILY BEINGS. When the soul becomes light through knowledge and yoga, you are able to fly. Seeing one bird fly, all the birds begin to fly, THEY PICK UP THE VIBRATION. Everything is dependent on the vibrations we are creating. Have vibrations filled with the power of love. Seeing me fly, others will have the desire to fly also. Shrimat makes us very light, so that we don’t need to think about anything. We don’t have to do anything else. When Baba makes us instruments, then the whole task is already accomplished. He makes us instruments so that we can create our fortune. If you make your illness an excuse, you make it a mountain by thinking about it. Let your thoughts be pure and elevated. Baba fills power in such thoughts. Everything will be dependent on those thoughts. Our attitude has to be very pure and clean. Cleanse your sanskaras. WHATEVER YOU THINK AGAIN AND AGAIN CREATES YOUR SANSKARAS. If your sanskaras are those of a child of God and you live to do his service, then you feel that this is your godly family. No matter how much you are engaged in service or yoga, you won’t be successful if you don’t feel that this is your godly family. They are all part of this family, all are equal to God. If you don’t do this work for Baba, of maintaining a pure vision and attitude, then you are no use to Baba. Even if someone is thinking ill of you, by giving good vibrations, you finish whatever was in souls towards you. If you can’t spread peace in a small gathering, how can you be called a peaceful soul? Sit and make your self peaceful, cool and sweet. Your tone should always be very sweet and lovely. Drink nectar and give it to others. People live in fear, but we live in comfort with no fear and no grudges towards anyone. A feeling of having a grudge won’t allow you to have love for God, to belong to God or to feel that He is your companion. Shiv Baba's Shrimat makes us BK souls pass with honors all the exam papers of life easily. If i really want to ' Pass with Honors ' let me concentrate on all the 4 subjects -* My personal study - GYAN,* My obedience to inculcation - DHARNA,* My surrendered intellect for service - SEVA,* And above all my constant attention on Baba's sweet remembrance - YAAD . None but ONE Shivbaba! One support, One faith, One trust in BABA alone - Ek BABA Doosra Na Koi... Om Shanti. Useful links 108 points of Shrimat (PDF) What is Murli in BrahmaKumaris? Four Subjects of BK About Us - Introduction Online Services

  • प्यारे बापदादा की 108 श्रीमत (Shiv Baba's 108 Shrimat)

    परमपिता परमात्मा शिव बाबा व प्यारे बापदादा की 108 श्रीमत (108 points of Shrimat in Hindi, derived from Shiv Baba's Gyan Murli - BapDada's aspirations for all Brahman children) ➤Visit the PDF version to download or print. शिव बाबा कहते है: 1. पवित्र बनो, योगी बनो । 2. देह सहित देह के सर्व सम्बन्धों को भूल एक बाप को ही याद करना है। 3. ब्राह्मण कुल की मर्यादाओं का पालन करना है। 4. कभी भी संगदोष में नहीं आना है। 5. सदा श्रेष्ठ संग, ईश्वरीय संग में रहना है। 6. सब को सुख ही देना है। 7. किसी को भी मन्सा, वाचा, कर्मणा से दुख नहीं देना है। 8. सदा शान्तचित, हर्षितचित, गंभीर और एकान्तप्रिय बनकर रहना है। 9. सबको बाप का परिचय देना है, सुख, शान्ति का रास्ता बताना है। 10. किसी भी देहधारी से दिल नहीं लगाना है। 11. सभी को आत्मिक दृष्टि से देखने का अभ्यास करना है। 12. अपनी चलन देवताओं जैसी बड़ी रॉयल रखनी है। 13. कभी भी मुरली मिस नहीं करनी है। 14. कभी भी रूठना नहीं है। 15. कभी भी मूड ऑफ नहीं करना है। 16. सदा रूहानी खुशी में रहना है । 17. सबको सुखदायी वरदानी बोल से उमंग-उत्साह में लाकर आगें बढाना है । 18. सदा ईश्वरीय याद में रह रूहानी नशे में रहना है । 19. विश्वकल्याण की सेवा में तत्पर रहना है । 20. अमृतवेले उठ विचार सागर मंथन का विश्व सेवा के नए नए प्लान बनाने हैं । 21. अमृतवेले उठ बाप को बडे, प्यार से, दिल से याद करना है । 22. किसी भी आत्मा पर क्रोध नहीं करना हे । 23. बहुत-बहुत मीठा बन सबको मीठा बनाने की सेवा करनी है । 24. कभी भी विकारों में नहीं जाना है । 25. आत्म अभिमानी बन बाप को याद करना है । 26. कोई भी विकर्म नहीं करना है । 27. दैवी गुण धारण करने हैं । 28. आसुरी अवगुणों को निकाल देना है । 29. स्वदर्शनचक्र फिराते रहना है । 30. आपस में ज्ञान की ही लेन देन करनी है । 31. आपस में कभी भी लूनपानी नहीं होना है । 32. माया से कभी भी हार नहीं खानी है । 33. इस मायावी संसार के आकर्षण में नहीं आना है । 34. लोभवृत्ति नहीं रखनी है । 35. चोरी नहीं करनी है । 36. झूठ नहीं बोलना है । 37. बाप से कुछ भी छिपाना नहीं है । 38. बाप के भण्डारे से जो भी मिले उसमें ही सदा सन्तुष्ट रहना है । 39. सचखण्ड की स्थापना के कार्य में बाप का पूरा-पूरा मददगार बनना है । 40. संगठन को मजबूत बनाने के लिए सदा एकमत होकर रहना है । 41. सदा ज्ञान का सिमरन करते रहना है । 42. व्यर्थ की बातों में समय बर्बाद नहीं करना है । 43. सभी की विशेषताओं को ही देखना है । 44. किसी से भी पैसे की लेन-देन का अब हिसाब-किताब नहीं रखना है । 45. एक दो के स्नेही सहयोगी बनकर रहना है । 46. न्यारा प्यारा कमल पुष्प समान बनकर रहना है । 47. बीमारी में भी सदा खुश रहना है । 48. किसी की भी निन्दा अथवा परचिन्तन नहीं करना है । 49. सबको शान्तिधाम, सुखधाम की राह दिखानी है । 50. निन्दा-स्तुति , मान-अपमान में एकरस स्थिति रखनी है । 51. कभी भी झरमुहीं- झंगमुहीं नहीं होना है । 52. ट्रस्टी होकर रहना है । 53. सिवाए एक बाप के किसी से भी मोह नहीं रखना है । 54. योगयुक्त अवस्था में रहकर ही हर कर्म करना है । 55. ज्ञान की टिकलू-टिकलू, भूं- भूं और शंखध्वनि करते रहना है । 56. भोजन की एक-एक गीटटी बाप की याद में रहकर बाप के साथ खानी है । 57. किसी की मी विशेषताओं के ऊपर प्रभावित नहीं होना है । 58. सदैव सात्विक भोजन ही स्वीकार करना है । 59. भोजन पर एक दो को बाप और वर्से की ही याद दिलानी है । 60. कोई मी उल्टी चलन नहीं चलनी है । 61. सर्विस में कमी मी बहाना नहीं देना है । 62. बड़ों को रिगार्ड और छोटो को स्नेह देना है । 63. संगम पर अपना तन-मन-धन सबकुछ सफल करना है । 64. चलते-फिरते, उठते-बैठते भी बाप की याद में रहकर दूसरों को भी बाप की याद दिलानी है । 65. सदा श्रेष्ठ से श्रेष्ठ स्वमान में रहना है । 66. ट्राफिक कंट्रोल का उल्लंघन नहीं करना है । 67. रात्रि सोने से पूर्व भी बाप को अपना सच्चा पोतामेल देना है । 68. ज्यादा से ज्यादा अशरीरी बनने की प्रेक्टिस करनी है । 69. सर्ब सम्बन्ध एक बाप से ही रखने हैं । 70. सर्विस में अपनी हड्डियां स्वाहा करनी हैं । 71. कभी भी ईश्वरीय कुल का नाम बदनाम नहीं करना है । 72. खाने-पीने की चीजों में भी अनासक्त वृति रखनी है । 73. अपने स्वीटहोम, शान्तिधाम को याद करना है । 74. ज्यादा हंसी मजाक में नहीं आना है । 75. जरुरत से ज्यादा चीजें संग्रह नहीं करनी हैं । 76. विनाश के पहले पहले अपना सबकुछ सफल कर लेना है । 77. अपनी विशेषताओं पर कभी भी अहंकार नहीं करना है । 78. देह-अभिभान वश कोई भी विकर्म नहीं करना है । 79. किसी भी बात में संशयबुद्धि नहीं बनना है । 80. याद की फांसी पर लटके रहना है । 81. ब्रह्मा बाप समान बनने का पुरूषार्थ करना है । 82. पढ़ाई में रेग्युलर, पंक्चुअल बनना है । 83. न बुरा देखना, न बुरा बोलना, न करना, न सोचना और न ही बुरा सुनना है । 84. सबको मुक्ति, जीवनमुक्ति का रास्ता बताना है । 85. सेवा में विघ्न रूप नहीं बनना है । 86. कोई भी नया कर्मबन्धन नहीं बनाना है । 87. सम्बन्ध सम्पर्क में आते सदा रूहानियत में रहना है । 88. अशरीरी बनने का अभ्यास करते ही रहना है । 89. पतितों को पावन बनाने की सेवा करनी है । 90. वायुमण्डल में शान्ति, शक्ति, खुशी, उमंग-उत्साह के वायब्रेशन फैलाने की सेवा करनी है । 91. मम्मा बाबा को फालो करना है । 92. सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास नहीं करना है । 93. इस पुरानी दुनिया से बेहद के वैरागी बनना है । 94. साक्षी अवस्था में रह अपनी स्थिति को मजबूत बनाना है । 95. सच्ची दिल से बाप पर पूरा-पूरा बलिहार जाना है । 96. दैवी मैनर्स धारण करने और कराने हैं । 97. किसी के भी नाम, रूप में नहीं फंसना है । 98. कांटों को फूल बनाने की सेवा करनी है । 99. और सब संग तोड एक बाप के संग में रहना है । 100. योगबल से अपने पुराने सब हिसाब-किताब चुक्तु करने हैं । 101. अपना स्वभाव सरल बनाकर सबसे मिलनसार होकर रहना है। 102. योग-ज्वाला से अपने पुराने अवगुणी स्वभाव-संस्कार को जड़ से निकाल भस्म कर देना है। 103. सर्व आत्माओं को सुख देकर दुआओं का पात्र बन, अविनाशी खाता जमा करना है। 104. अपना बोल, चाल बहुत-बहुत मीठा रखना है सबको उमंग-उत्साह में लाने वाले बोल बोलने हैं। 105. सदैव बाबा को अपना साथी बनाकर रखना है। 106. बाप समान बन सबको शीतलता के छीटें डालकर शीतल बनाना है। 107. पवित्रता के बल पर श्रीमत द्वारा विश्व को पावन बनाने की निरंतर सेवा करते रहना है। 108. बाबा को इतना प्यार से, दिल से याद करना है जो आंखों से प्रेम के आंसू आ जायें। Useful links All BK Articles - Hindi & English 7 दिवस का राजयोग कोर्स (Hindi course) RESOURCES - Everything Audio Explore the Sitemap BK Google - Search engine

  • Shiv Jayanti Avyakt Murlis (1969 to 2016)

    A collection of ALL avyakt murlis spoken by Avyakt BapDada on auspicious occasions of "Maha Shivratri" aka "Shiv Jayanti" in a single PDF book (English) Introduction ➤ In this book, you will find all the precious Mahavakya (versions) of Shiv Baba, spoken through Avyakt Brahma baba via Dadi Gulzar, on the special occasions of "Maha Shivratri/Shiv Jayanti". We hope and wish that this Murli collection eBook will inspire you to enhance your Purusharth, and thereby take maximum benefit of this great beneficial time of 'confluence age'. परिचय ➤ यह महा शिवरात्रि, अर्थात शिव जयन्ती की विशेष अव्यक्त बापदादा की वाणी (मुरली) का संग्रह है। यह PDF बुक में आपको शिवरात्रि पर कहे गए शिव बाबा के अनमोल महावाक्य मिलेंगे। हम आशा करते है की आपको इसके द्वारा अपने पुरुषार्थ में लाभ होगा - और आप अपना विशेष व अंतिम और अनमोल संगम युगी ब्राह्मण जीवन सफल करेंगे। About Avyakt Murli Book Book maker: Madhuban team Editor: Manager, Shiv Baba Services Initiative team Publisher: Shiv Baba Services Initiative Officially available on: www.shivbabas.org (this site) eBook length: 184 pages Language: English How to Read this Book? We have hosted the PDF book on: https://www.shivbabas.org/_files/ugd/8cc233_9936836bffc349089c1d2b91c9026d93.pdf 1. BK Files and Media website (to access a specific page number) - 2. Google drive (good accessibility) - https://drive.google.com/file/d/1FJANiCSD0xTrji3qOlzojg3FpYsZhdRS/view Avyakt BapDada Murli on Shiv Jayanti 1993 (video) Listen Avyakt bapdada's Vaani of 18-02-1993 (Shiv Jayanti day)➥ ✤ FULL playlist➥ Avyakt Murlis spoken on Shiv Jayanti Day (of years: 1996, 97, 98, 99, 2000, 2001, 02, 03, 04, 05, 06, 07, 08, 09, 2010, 2011, 12, 13, 14, and 2015) on YouTube. Useful Links PDF books (English & Hindi) PDF section (large PDF collection) General Articles (read- Hindi+English) Online Services (daily sustenance) Godly Resources (for BKs only)

  • राजयोगिनी दादी रतन मोहिनी की जीवनी

    दादी (वरिष्ठ बहन) रत्न मोहिनी (अर्थात जो रत्नों को आकर्षित करें अथवा सबसे सुंदर रतन) प्रजापिता ब्रह्माकुमारी अध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय की वर्तमान मुख्य प्रशासनिक प्रमुख हैं, दादी गुलज़ार के ११ मार्च, २०२१ के दिन अव्यक्त होने के बाद उनको कमिटी ने मुख्य प्रशाशिका नियुक्त किया। Tip: Download PDF ➤ जीवनी का PDF version जीवनी को सुने ➤ Audio version Also Read ➤ Dadi Ratan's Biography (in English) दादी की जीवन कहानी दादी रत्न मोहिनी का जन्म का नाम लक्ष्मी था। उनका जन्म हैदराबाद सिंध में, (जो अब पाकिस्तान में है) के एक प्रसिद्ध व धार्मिक परिवार में 25 मार्च, 1925 को हुआ। जैसे दादी वर्णन करती हैं, कि वे बहुत शर्मीली थीं और बात करते हुए बहुत संकोच करती थी, परन्तु एक बहुत अच्छी छात्रा (स्टूडेंट) थीं। वह अपना अधिकांश समय शिक्षा को समर्पित करती थी। जब वह ज्ञान में आई (ब्रह्माकुमारी के संपर्क में आई), तब उनकी उम्र केवल 13 वर्ष थी। बचपन से ही उनका झुकाव अध्यात्मिकता व पूजा-पाठ की तरफ था, पर उन्हें कोई अंदाजा नहीं था कि जिंदगी उन्हें परमात्मा के इतने करीब ले आएगी। दादी का प्रथम अनुभव दादी ने ओम् मण्डली (ब्रह्माकुमारी का पुर्व नाम) के साथ अपने अनुभव को नीचे वर्णित किया है: दादी कहती है: "मैं लगभग १३ साल की थी। मेरी स्कूल की छुट्टियों के दौरान मेरी मां मुझे भगवत गीता के सत्संग में ले गई जो हमारे शहर में आयोजित किया गया था। मैं जाकर पहली पंक्ति में बैठ गई। बाबा (ब्रह्मा बाबा) आए और वह भी बैठ गए। ओम् ध्वनि के साथ सत्संग का आरंभ हुआ। जैसे ही मैंने ब्रह्मा बाबा के मुख से ओम् ध्वनि सुनी, मैंने गहरी आंतरिक शांति का अनुभव किया और मैं ट्रांस में चली गई। जहां तक मुझे याद है, मैं अपनी चेतना को आसपास के वातावरण से अलग कर चुकी थी, और अनुभव किया कि इस व्यक्ति के माध्यम से कोई ऊँच शक्ति बोल रही हैं। लगभग एक घंटे में सत्संग समाप्त हो गया, परन्तु मैं बाबा को निहारती रही। उन्होंने मुझे देखा और मुझे उठाया। मेरी मां मुझे हिला कर होश में लाई और मैं बाबा के पास गई और फिर मैंने उनसे सत्संग के बारे में कई प्रश्न पुछे (क्योंकि मुझे कुछ याद नहीं था)। उन्होंने मुझे समझाया... मैंने उनके साथ पिता के संबंध को अनुभव किया। तब से धीरे धीरे मेरी आध्यात्मिक यात्रा आरंभ हुई..." ओम् मण्डली के साथ पुर्व यात्रा २००२ के अपने साक्षात्कार में दादी रत्न ने हमें अपनी जीवन यात्रा का संक्षेप में विवरण दिया। लक्ष्मी ने पहले ही महसूस कर लिया था कि यह कोई उच्च शक्ति (भगवान) है जो दादा के माध्यम से यह ज्ञान सुना रहे हैे। शुरू में उनके परिवार ने उन्हें सहयोग नहीं दिया, पर बाद में उन्होंने अनुमति दे दी और लक्ष्मी (दादी रत्न मोहिनी, जिनका १९३७-३८ में फिर से नाम रखा गया) ने ओम् मण्डली सत्संग में दी जाने वाली शिक्षाओं के आधार पर अपना जीवन अध्यात्मिक ज्ञान को समर्पित करने का निर्णय किया। तब से, उनकी कहानी ओम् मण्डली संगठन (लगभग २८४ आत्माओं के साथ) के साथ जुड़ी हुई है,जो इस ईश्वरीय संस्था का आधार बनें। "मेरा परिवार राधे-कृष्ण का अनन्य भक्त था और मैं भी सुबह स्कूल जाने से पहले पूजा किया करती थी। एक बच्चे के रूप में मुझे कोई अंदाजा नहीं था कि भगवान क्या है, ना ही मैंने कभी यह सोचा था कि स्वयं भगवान मेरा शिक्षक होंगे।" - दादी रत्न मोहिनी, अपने २००२ के साक्षात्कार में कहती हैं। दादी के उत्तरदायित्व वर्तमान समय दादी यज्ञ (ब्रह्माकुमारीज़) के मुख्य प्रशासनिक-प्रमुख के रूप में सेवारत हैं। और उन्होंने निम्नलिखित सेवाएं भी दी है: ➤राजयोग एजुकेशन और रिसर्च फाउंडेशन के युवा प्रभाग के अध्यक्ष। ➤ब्रह्माकुमारी मुख्यालय , माउन्ट आबू में कार्मिक विभाग के निदेशिका। ➤राजस्थान ज़ोन में ब्रह्माकुमारीज़ सेवा केंद्रो के ज़ोनल हैड। ➤भारत में शिक्षक प्रशिक्षण (टीचरस ट्रेनिंग) के निदेशिका। दादी रतन के गुण ➤ एक गहन विचारक ➤ किसी आध्यात्मिक विषय की कुशल वक्ता ➤ दयालु ➤ बहुत विनम्र ➤ सेवा के लिए सदा तैयार ➤ आध्यात्मिक रूप से परिपक्व ➤ हमेशा मुस्कुराते रहना ➤ सभी को खुश करना ➤ दादी पवित्रता, शांति और उच्च उद्देश्य के जीवन का एक उदाहरण है ➤ रत्न मोहिनी दादी को बहुत से लोगों द्वारा एक आदर्श ब्रह्माकुमारी के रूप में देखा जाता है। Useful Links महान आत्माओ की जीवनी राजयोग कोर्स (online) Online Services (for BKs) Centre Locator (India -New) Mobile Apps⇗ (Android & iOS)

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