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विश्व सेवाधारी बनने का सौभाग्य

𝐏𝐨𝐞𝐭: BK Mukesh Modi

अपना श्रेष्ठ भाग्य देखकर असीम आनन्द आया
जन्म जन्म अविनाशी भाग्य देने वाला मैंने पाया

मेरी जीवन नैया की थामी उसने हाथों में पतवार
उसके प्यार में लीन होकर परिवर्तन हुए संस्कार

बाप के दिलतख्त पर हुआ हूँ जब से मैं आसीन
बेफिक्र बन मैं उड़ रहा मेरे पांव छूते नहीं जमीन

प्रभु प्यार में खोकर मैं हर आकर्षण से दूर हुआ
देहभान छोड़कर मैं बाबा के नयनों का नूर हुआ

निर्विघ्न बना मेरा जीवन हर समस्या हुई समाप्त
प्रभु प्यार की सुगन्ध मेरी नस नस हो गई व्याप्त

विश्व कल्याण का शुद्ध कर्तव्य मेरे मन में आया
अपने अन्दर सोई सर्व शक्तियों को मैंने जगाया

समय अनुसार सर्व शक्तियों को कार्य में लगाऊँ
मास्टर सर्व शक्तिमान का टाइटल बाप से पाऊँ

बाप समान विश्व सेवा करना पसन्द मुझे आया
धन्यवाद करूँ बाबा का जो ऐसा अवसर पाया ||

" ॐ शांति "

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