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प्यार का सागर बन जाऊं

𝐏𝐨𝐞𝐭: BK Mukesh Modi

ये साँसे आते जाते, एक तेरा नाम ही कहती है
मेरी दोनों आँखे सिर्फ, तेरी याद में ही बहती है

ऐसा क्या जादू डाला तुमने, हो गया हूँ मैं तेरा
उठा लिया है मैंने अब, पुरानी दुनिया से डेरा

बसे हो ऐसे मुझमें जैसे, बहता है नसों में रक्त
मिलन मनाऊं बाबा तुझसे, होकर मैं अव्यक्त

तेरी श्रीमत से बन जाऊं, खिलता हुआ गुलाब
मेरे चेहरे चलन से झलके, पवित्रता का रूहाब

तेरी गोद में खाता रहूँ, मैं तेरे प्यार का झूला
तेरे संग रहकर मैं तो, माया का नाम भी भूला

तेरे प्यार के आगे, सब कुछ फीका सा लगता
तेरा प्रेमरस पाने को, मैं अमृत वेला में जगता

बड़े प्यार से पहनाते हो, मुझको बाहों का हार
दिल में ठान लिया तुम पर, हो जाऊं बलिहार

प्यार तेरा पाकर मैं, सागर प्यार का बन जाऊँ
हर प्यासी आत्मा की, प्यार की प्यास बुझाऊँ ||

" ॐ शांति "

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