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बाबा से सर्व सम्बन्ध
𝐏𝐨𝐞𝐭: BK Mukesh Modi
सर्व सम्बन्धों से बाबा को, अपना मैं बनाऊंगा
देह के किसी बंधन में, ख़ुद को ना फ़साऊँगा
नष्टोमोहा नहीं बना तो, बुद्धि भटकती जाएगी
जिसके प्रति मोह होगा, उसकी याद सतायेगी
मोह माया में भटकते हुए, मैंने कुछ ना पाया
जितना भी पाया मैंने, उससे अधिक गंवाया
स्वर्ण महल के बदले, मिले पत्थर के मकान
कंगाल हो गया मैं पूरा, जो था इतना धनवान
कोई बदले या ना बदले, खुद को मैं बदलूंगा
स्व परिवर्तन के पथ पर, अब तो रोज चलूंगा
छोटी मोटी इच्छाएं, अपने दिल से मिटाऊंगा
एक बाप दूजा ना कोई, मन में उसे बिठाऊंगा
मन में व्यर्थ की बातें, कभी भरकर ना रखूंगा
सर्वशक्तिवान बनकर, शुभकामना देता रहूंगा
छोडूंगा सारे बंधन, दृढ़ निश्चय मन में जगाकर
सदा रखूंगा अपना दिल, मैं बाबा में लगाकर ||
" ॐ शांति "
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