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प्रवृत्ति मार्ग वालों को बाबा का डायरेक्शन

𝐏𝐨𝐞𝐭: BK Mukesh Modi

देखकर खुश हूँ प्रवृत्ति मार्ग वालों की अवस्था
प्रवृत्ति और निवृत्ति के मध्य सुन्दर है व्यवस्था

बाप की याद की छत्रछाया के नीचे रहने वाले
माया के सर्व आकर्षणों से बचकर रहने वाले

ऐसे न्यारे निराले बच्चों के बाबा गुण गाता
सच्चाई पर चलने वालों पर राजी हो जाता

नियम है प्रवृत्ति का हर छोटी बात को समाना
किसी भी हालात में कोई भी व्यर्थ न फैलाना

यदि मामूली सी बातें हम यहाँ वहाँ फैलाएंगे
तो विश्वकल्याण के कार्य से वंचित हो जाएंगे

राजी हो जाओ ज्ञान के हर राज को जानकार
खत्म करो व्यर्थ बातें तुम मेरा कहना मानकर

अगर चाहते हो मुझसे सच्चा मिलन मनाना
सर्वप्रथम खुद को साकारी से आकारी बनाना

बनता हूँ मैं आपके लिए निराकारी से साकारी
तुम भी बनो फिर मेरे लिए साकारी से आकारी

देहाभिमान से न्यारे होकर अशरीरी बन जाओ
वस्त्र पहनकर चमकीले मुझसे मिलन मनाओ

मिलन का आनंद आएगा जब होंगे एक समान
एक मैं दूजे तुम फिर किसी और का क्या काम

बापदादा से बच्चों इतनी शुद्ध घनिष्ठता बढ़ाओ
प्रवृत्ति में रहकर भी कमल पुष्प तुम कहलाओ ||

" ॐ शांति "

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