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संस्कार परिवर्तन (व्यव्हार शुद्धि)
Book Description
"संस्कार परिवर्तन (व्यवहार शुद्धि)" आत्म-परिवर्तन की उस गहरी यात्रा का मार्गदर्शन है, जिसमें पुराने संस्कारों को केवल दबाया नहीं जाता, बल्कि योग-तपस्या की अग्नि में उन्हें रूपांतरित कर दिव्य संस्कारों का निर्माण किया जाता है। ब्रह्माकुमारीज़ के आध्यात्मिक ज्ञान के अनुसार हमारे विचार, भावनाएँ, बोल और कर्म हमारे संस्कारों की अभिव्यक्ति हैं; इसलिए स्थायी व्यवहार-शुद्धि का वास्तविक आरंभ भीतर से होता है।
शिव बाबा की याद में स्थित होकर किया गया योग आत्मा को अपने पुराने संस्कारों को पहचानने, उनके मूल कारणों को समझने और उन्हें श्रेष्ठ संकल्पों से बदलने की शक्ति देता है। क्रोध, अहंकार, मोह, ईर्ष्या, चिड़चिड़ापन और प्रतिक्रिया जैसे पुराने संस्कारों के स्थान पर शांति, प्रेम, नम्रता, सहनशीलता, मधुरता और आत्म-सम्मान जैसे दिव्य संस्कारों को धारण करना ही सच्चा पुरुषार्थ है।
यह पुस्तक बताती है कि *"संस्कार बदलेंगे तो व्यवहार बदलेगा, व्यवहार बदलेगा तो संबंध बदलेंगे और संबंधों के बदलने से जीवन की पूरी दिशा बदल सकती है।"* योग, आत्म-स्मृति और निरंतर तपस्या के द्वारा अपने संस्कारों को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा देने वाली यह कृति हर उस साधक के लिए उपयोगी है, जो बाहरी सुधार से आगे बढ़कर अपने व्यक्तित्व के मूल में वास्तविक परिवर्तन लाना चाहता है।
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