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अचल अडोल एकरस अवस्था

अचल अडोल एकरस अवस्था

𝐋𝐞𝐧𝐠𝐭𝐡: 57 pages

Author

SpARC wing, Mt Abu

Genre

Purusharth, Avyakt Murli, Mahavakya

Book Description

"अचल अडोल एकरस अवस्था" आत्मा को उस श्रेष्ठ स्थिति की ओर ले जाने वाली आध्यात्मिक मार्गदर्शिका है, जहाँ शिव बाबा की याद ही जीवन का एकमात्र सहारा और बुद्धि का स्थिर आधार बन जाती है। माया के विविध रूपों, परिस्थितियों और परीक्षाओं के बीच भी स्मृति की डोर न टूटे, संकल्पों में हलचल न हो और मन सदा एकरस रहे, यही इस पुस्तक का मूल संदेश है। ब्रह्माकुमारीज़ के अव्यक्त महावाक्यों पर आधारित यह पुस्तक समझाती है कि सच्ची **अचल-अडोल अवस्था** का अर्थ समस्याओं के आने से मुक्त होना नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में साक्षी-दृष्टा बनकर, “नथिंग न्यू” (Nothing New) की स्थिति में, शिव बाबा की याद में अडिग रहना है। माया की हलचल को अपनी आंतरिक स्थिति तक पहुँचने न देना, व्यर्थ संकल्पों को समाप्त करना और निश्चय-बुद्धि को इतना मजबूत बनाना कि कोई भी परिस्थिति उसे हिला न सके, यही विजयी आत्मा की पहचान है। निरंतर योग, आत्म-स्मृति, निश्चय और गहन पुरुषार्थ के माध्यम से यह पुस्तक पाठक को साधारण स्थिरता से आगे बढ़कर **अचल, अडोल, निरंतर और एकरस अवस्था** का अनुभव करने की प्रेरणा देती है। यह उस अंतिम आध्यात्मिक तैयारी की ओर संकेत करती है, जहाँ बाहरी हलचल के बीच भी आत्मा भीतर से शांत, निर्भय और विजय-निश्चित बनी रहती है।

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