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वो स्वर्ग के नज़ारे नैना
𝐏𝐨𝐞𝐭: ब्रह्माकुमारीज़, माउंट आबू
श्रीकृष्ण आ रहे हैं, मुरली बजा रहे हैं
वो स्वर्ग के नज़ारे, हमको दिखा रहे हैं
जिसे जनमों से बुलाए हमें वो बुला रहे हैं
उनको निरख-निरख के नैना जुड़ा रहे हैं।
जमुना किनारे करके इशारे, आओ करे रास कब से पुकारे
हर गोपी को ऐसा ही लगता, रास करते संग कान्हा हमारे
बंसी बजैया रास रचैया
महामिलन में मन लुभा रहे हैं।
रंग बिरंगी दुनिया निराली, फूलों-फलों से लदी हुई डाली
राजे हुए सुंदर गहनों से, निकल रहे स्वर्णिम महलों से
कल-कल नदियाँ, महके बगिया
दृश्य अनोखे सपनों में ला रहे हैं।
वो देवी दुनिया आई कि आई, कृष्णपुरी की सबको बधाई
आंखों में है नई दुनिया समाई, दिल में हमारे बजती शहनाई।
वो मधुबन में, हर इक मन में
नाच रहे हैं, हमको नचा रहे हैं।
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