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अपना पार्ट सुधारो, नई दुनिया में पधारो
𝐏𝐨𝐞𝐭: BK Mukesh Modi
बोलो क्यों रूठ जाते हो, अपने ही परिवार से
क्यों टकराते हो तुम, हर किसी के संस्कार से
सबका अपना पार्ट है, बाबा ने जब समझाया
फिर औरों के पार्ट पर, संशय तुझे क्यों आया
अपना पार्ट बजा, सबको पसन्द आने लायक
वरना सबकी नजरों में, बन जाएगा नालायक
हर कर्तव्य निभा, दिव्यता का गुण अपनाकर
बच्चे अपने चरित्र को, रख तूँ रोज चमकाकर
तेरी चमक से औरों का, भाग्य चमक जाएगा
तेरे श्रेष्ठ पार्ट से औरों का, पार्ट निखर जाएगा
खुद को देखकर बाबा से, कर अपना मिलान
अपने संग संग औरों को, बना दे बाबा समान
यही एक पुरुषार्थ बच्चे, सबका पार्ट सुधारेगा
दैवी परिवार के संग तू, नई दुनिया में पधारेगा ||
" ॐ शांति "
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