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अमृत वेला का अनुभव

𝐏𝐨𝐞𝐭: BK Mukesh Modi

शिवबाबा ने मिलते ही मुझे भाग्य कलम थमाई
अपनी किस्मत लिखने की विधि भी मुझे बताई

होकर तन से न्यारा तूं करना केवल मेरा ध्यान
मिट जायेंगे तेरे अंदर बैठे काम क्रोध अभिमान

पावनता के पथ पर चलना होकर पूरा सावधान
योग बल से मिटा दे विकारों का सारा खानदान

पवित्रता की सुगन्ध फैलती जाएगी तेरे अन्दर
बन जायेगा एक दिन तूँ देवताओं समान सुन्दर ||

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