
आओ मनाएं सच्ची नवरात्रि
𝐏𝐨𝐞𝐭: Brahma Kumaris, Mt Abu
नवरात्रि के अवसर पर, माँ की आज्ञा हम मानें
माँ के हर रूप का, आध्यात्मिक रहस्य पहचानें।
नवरात्रि का त्यौहार आया, मिलकर सत्कार करें
अन्तर्मन में बैठें, सर्व गुप्त असुरों का संहार करें।
प्रथम शैल पुत्री हिमालय सी, दृढ़ता का स्वरूप
बैल की सवारी दर्शायें, शिव-शक्ति का प्रतिरूप।
ज्ञान के अस्त्र-शस्त्र, त्रिशूल आदि इनका श्रृंगार
पद्म लिये हाथ में, पवित्रता की बन गई अवतार।
शिव की दूसरी शक्ति, माँ ब्रह्मचारिणी कहलाएँ
सुख, शान्ति और आनन्द, सदा सर्व पर बरसायें।
साक्षात् तपस्या करके, स्वराज्य अधिकारी बनी
परमात्मा से सम्बन्ध जोड़कर, ब्रह्मचारिणी बनी।
शिव की तीसरी शक्ति, देवी चन्द्र घण्टा कहलाएँ
शान्ति और सुख लुटाकर, वो सबका मन हर्षायें।
शेर पर सवार होकर, निर्भयता का भरती है बल
व्यर्थ का विनाश करती, वो शीतला माँ निश्छल।
अज्ञान ग्रस्त सृष्टि पाती, परमात्म ज्ञान से शक्ति
सूर्यवंशी बन विचरण करे, सिंहवाहिनी माँ शक्ति।
ईश्वरीय याद पवित्रता से, मुक्ति-जीवनमुक्ति पाए
श्वेतवस्त्र धारणी से, पवित्रता रूपी ज्ञान-धन आए।
सर्व प्राप्ति वरदाता, ईश्वरीय राज्य भाग्य दिलाती
शिव संग बन भाग्य दायिनी, सोये भाग्य जगाती।
ईश्वरीय ज्ञान की, भरपूरता का हम जागरण करें
माँ-पुत्र का रिश्ता निभाकर, सबको सम्पूर्ण करें।
माता सिद्धि से यह दिव्य ज्ञान, अमृत हम पीते
साधु-संत-भक्तजन सभी, ईश्वरीय ज्ञान से तरते।
निराकार शिव परमात्मा ने, ली परीक्षा शक्ति की
अर्धनारीश्वर बन पूर्ण की, इच्छा जीवनमुक्ति की।
चैतन्य देवियों समान स्वयं का, ज्ञान श्रृंगार करें
दिव्य गुणों से सजकर, शक्तियाँ आत्मसात करें ||
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