
आओ मनाएं राखी का त्यौह ार
𝐏𝐨𝐞𝐭: Brahma Kumaris, Mt Abu
आओ मनाएं पावन-पावन, राखी का त्यौहार
परमधाम से परमपिता, लाए हैं उपहार
बंधन मुक्त बनाता, बंधन से ले जाता पार
दो धागों में भरा हुआ है, खुशियों का संसार।
हम हैं आत्मा भाई-भाई, कितना प्यारा नाता है
इस नाते की याद दिलाने, रक्षा बंधन आता है
रक्षा बंधन बंधा लो भैया, रक्षा का आधार।
राखी में शुभ भावनाएं, सबके दिल की दुआएं हैं
ईश्वर का वरदान है इसमें, मंगल कामनाएं हैं
पवित्रता और प्रेम का, इसमें है भरा संसार।
रक्षा बंधन जीवन को, है आसान बनाती
मन-वचन और कर्मों को, दिव्य महान बनाती
सच पूछो तो यह राखी, लाती स्वर्ग बहार।
प्यारे-प्यारे दो धागों में, दोनों ही जहान हैं
खुशियों और उमंगों के, धरती आसमान हैं
शक्तियों-वरदानों का, इसमें है भरा भंडार।
संपूर्ण सुखों के स्वर्णिम युग की राखी निशानी है
स्वर्णिम भारत की इसमें, स्वर्णिम भरी कहानी है
रक्षा बंधन सबका रक्षक, महिमा अपरंपार।
हम स्व-रक्षक कुल-रक्षक, मर्यादा यज्ञ-रक्षक हैं
रक्षा बंधन बांध बनाते, बाबा विश्व-रक्षक हैं
संग बाबा के विश्व सेवा में, हम सारे बलिहार।
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