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आओ कृष्णा प्यारे
𝐏𝐨𝐞𝐭: ब्रह्माकुमारीज़, माउंट आबू
आओ कृष्णा, आओ कृष्णा, आओ कृष्णा प्यारे
अंखियों के तारे तुम्हें सारे ही पुकारे
कृष्ण कन्हैया रास रचैया, हमने आंखों में उतारा है
यह प्यारा स्वर्ग हमारा, कितना दिव्य नज़ारा है।
सोने जैसे दिन हैं, चांदी जैसी रातें
हीरे वाले महलों में, मोती की बरसातें
16 कला संपूर्ण, गोरे मुकुट धारे
सतयुग के राजकुंवर, सर्वगुण श्रृंगारे
श्याम वही नटवर, जमुना के तट पर
यह प्यारा स्वर्ग हमारा, कितना दिव्य नज़ारा है।
पावन-पावन मुखड़े, प्यारी मुस्कानें
बागों में, बहारों में, खुशियों के तराने
नदियों में कल-कल बहता पानी
झर-झर झरनों की, सरगम सुहानी
फूलों के बहारें, फूलों की कतारें
यह प्यारा स्वर्ग हमारा, कितना दिव्य नज़ारा है।
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