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Bhagwan Tere Ghar Ka Shringar
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Artist/s
Asha Bhosle
Lyrics
दुल्हन बनी एक अभागिनी पिया की अर्थी लेकर चली
सती होने चली वो सुहागनी
अर्थी नहीं नारी का संसार जा रहा है
भगवान तेरे घर का शृंगार जा रहा है (2)
बजता था जीवन गीत दो सांसों के तारों में
दो सांसों के तारों में
टूटा है दुख का तार वो जा रहा है
भगव ान तेरे घर का शृंगार जा रहा है (2)
जलना था तब तक तन की जलती रहे चिंगारी
जलती रहे चिंगारी.. {x2}
उजले को अब जीवन का अंगार जा रहा है
भगवान तेरे घर का शृंगार जा रहा है (2)
ऐसे बिछड़े दो साथी भवसागर की लहरों में
ऐसे बिछड़े दो साथी (2)
सजनी मजधार साजन उस पार जा रहा है
भगवान तेरे घर का शृंगार जा रहा है... (2)

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