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दुआयें दो, दुआयें लो

दुआयें दो, दुआयें लो

𝐋𝐞𝐧𝐠𝐭𝐡: 104 pages

Author

SpARC wing, Mt Abu

Genre

Purusharth, Avyakt Murli, Mahavakya

Book Description

यह पुस्तक मनुष्य के जीवन में "*दुआओं, शुभभावनाओं और शुभकामनाओं की शक्ति*" को सहज और आध्यात्मिक दृष्टि से समझने का आमंत्रण देती है। “दुआयें दो, दुआयें लो” केवल एक सुंदर वाक्य नहीं, बल्कि ऐसा जीवन जीने की प्रेरणा है जिसमें हम दूसरों को सुख, सम्मान, सहयोग और स्नेह दें, बदले की अपेक्षा न रखें और अपने कर्मों से उनके हृदय से दुआएँ अर्जित करें। ब्रह्माकुमारीज़ की शिक्षाओं में भी दुआओं को जीवन का ऐसा खजाना बताया गया है, जो शुभ भावना और शुभ कामना से समृद्ध होता है। पुस्तक का संदेश हमें शिकायत, क्रोध और प्रतिक्रिया के चक्र से ऊपर उठकर "*क्षमा, रहम, प्रेम और दाता-भाव*" अपनाने की ओर ले जाता है। जब हम परिस्थितियों और लोगों से दुःख लेने के बजाय उन्हें सुख देने का संकल्प करते हैं, तो भीतर हल्कापन, संतोष और खुशी जन्म लेती है। इस प्रकार “दुआयें दो, दुआयें लो” संबंधों को मधुर बनाने के साथ-साथ आत्मिक समृद्धि की ओर बढ़ने का मार्ग दिखाती है, जहाँ हमारा व्यवहार ही किसी के जीवन में आशा की एक छोटी-सी रोशनी बन जाता है।

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